पुरी रथ यात्रा भगदड़: कांग्रेस ने भीड़ प्रबंधन पर उठाए सवाल, प्रशासन से सुधार की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पुरी रथ यात्रा के दौरान हुई भगदड़ की घटना पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 17 जुलाई को प्रशासन की भीड़ प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के ओडिशा प्रभारी लालजी देसाई ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
मुख्य घटनाक्रम
लालजी देसाई ने बताया कि वे स्वयं रथ यात्रा के दौरान पुरी में उपस्थित थे और व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से देखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा जैसे आस्था के विषय का राजनीतिकरण नहीं करना चाहते, परंतु प्रशासनिक व्यवस्थाओं में जो कमियाँ दिखीं, उनकी ओर ध्यान दिलाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार और उसके पुलिस व प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
बैरिकेड खुलने से बनी अव्यवस्था
देसाई ने दावा किया कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ पर विराजमान होने के बाद पीछे लगाए गए बैरिकेड अचानक खोल दिए गए, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ आगे बढ़ने लगे। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि बैरिकेड किसके निर्देश पर और क्यों खोले गए। इसी कारण भीड़ एक स्थान पर एकत्र हुई और अव्यवस्था की स्थिति बनी। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से समीक्षा करने की माँग की।
राष्ट्रीय आस्था का केंद्र, विशेष सुरक्षा की ज़रूरत
देसाई ने रेखांकित किया कि देशभर से लाखों श्रद्धालु पुरी की रथ यात्रा में शामिल होने आते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं गुजरात से आते हैं और वहाँ भी बड़ी संख्या में लोग इस यात्रा में भाग लेना चाहते हैं। उनके अनुसार पुरी की रथ यात्रा केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था का केंद्र है, इसीलिए यहाँ विशेष स्तर की सुरक्षा एवं भीड़ नियंत्रण व्यवस्था अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले वर्ष भी रथ यात्रा के दौरान अव्यवस्था की घटनाएँ सामने आई थीं, जो दर्शाता है कि यह समस्या नई नहीं है।
प्रशासन की तैयारी पर सवाल
पिछले वर्ष की अव्यवस्था का उल्लेख करते हुए देसाई ने कहा कि प्रशासन को पहले से इस चुनौती का अनुमान होना चाहिए था। उनकी अपेक्षा थी कि पुलिस दोनों ओर पर्याप्त संख्या में तैनात होगी, रथ खींचने की व्यवस्था सुव्यवस्थित होगी और श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित होगी — परंतु मौके पर ऐसी प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं दी। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है नई सरकार को इतने विशाल धार्मिक आयोजन के प्रबंधन का पर्याप्त अनुभव न हो, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन को और अधिक सतर्क रहना होगा।
आगे क्या होना चाहिए
देसाई ने स्पष्ट किया कि इस समय किसी व्यक्ति या विभाग को सीधे दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि प्रशासन इस घटना से सबक ले। उन्होंने माँग की कि ऐसी व्यापक योजना बनाई जाए जिससे रथ यात्रा शुरू होते ही श्रद्धालु सुरक्षित दूरी से दोनों ओर खड़े होकर दर्शन कर सकें और भगदड़ या दुर्घटना की संभावना समाप्त हो। उनके अनुसार व्यवस्था का उद्देश्य केवल भीड़ को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना होना चाहिए — ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।