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पंचना बांध विवाद दो दशक बाद सुलझा: करौली में नहरों में छोड़ा गया ट्रायल पानी, 39 गांवों को राहत

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पंचना बांध विवाद दो दशक बाद सुलझा: करौली में नहरों में छोड़ा गया ट्रायल पानी, 39 गांवों को राहत

सारांश

करीब दो दशक बाद राजस्थान के करौली में पंचना बांध का जल-विवाद सुलझा। 6 जुलाई को नहरों में ट्रायल पानी छोड़ा गया और ₹61 लाख की लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई — जिससे 39 गांव और 13,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

पंचना बांध का करीब दो दशक पुराना जल-बंटवारे का विवाद 6 जुलाई 2025 को सुलझा।
कमांड एरिया की नहरों में ट्रायल रन के तौर पर पानी छोड़ा गया; गंभीरी नदी के लिए बांध के तीन गेट खोले गए।
करीब ₹61 लाख की लागत वाली परियोजनाओं से 13,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई जल मिलने की उम्मीद।
बांध के आसपास के 39 गांवों को नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं का लाभ मिलेगा।
30 जून को सरकार स्तर पर विवाद समाधान पर सहमति बनी थी।
कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेधम उपस्थित रहे।

राजस्थान के करौली जिले में पंचना बांध को लेकर करीब दो दशकों से चला आ रहा जल-बंटवारे का विवाद अब सुलझ गया है। सोमवार, 6 जुलाई को कमांड एरिया की नहरों में ट्रायल के तौर पर पानी छोड़ा गया, ताकि वितरण व्यवस्था की जाँच की जा सके। इसी अवसर पर एक लिफ्ट सिंचाई परियोजना की आधारशिला भी रखी गई, जिसका सीधा लाभ बांध के आसपास के 39 गांवों को मिलेगा।

मुख्य घटनाक्रम

जल संसाधन और सिंचाई मंत्री सुरेश सिंह रावत तथा गृह राज्य मंत्री व करौली जिले के प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेधम ने संयुक्त रूप से पंचना बांध पर दो नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं और गुडला लिफ्ट परियोजना के तहत पीडीएन सिस्टम के रीमॉडलिंग कार्य की आधारशिला रखी। इससे पहले गंभीरी नदी में पानी प्रवाहित करने के लिए बांध के तीन गेट भी खोले गए।

पहाड़ी गांव स्थित देवनारायण मंदिर परिसर में आधारशिला रखने से पूर्व पारंपरिक पूजा-अर्चना की गई। जनसभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

परियोजना का दायरा और लागत

करीब ₹61 लाख की लागत वाली इन परियोजनाओं से लगभग 13,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई जल उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके साथ ही बांध के कैचमेंट और कमांड एरिया में आने वाले गांवों को भी नियमित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान के कई जिलों में सिंचाई जल की उपलब्धता एक पुरानी चुनौती रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया

जनसभा को संबोधित करते हुए मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि भजनलाल सरकार अपने हर वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और लोगों के हित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि 30 जून को सरकार स्तर पर इस विवाद के समाधान पर सहमति बनी थी, जिसके बाद जल संसाधन विभाग ने त्वरित तैयारी शुरू की थी।

प्रशासनिक तैयारी

कार्यक्रम से दो दिन पूर्व जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा, पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल, कार्यकारी अभियंता विवेक बंसल और अन्य अधिकारियों ने बांध का स्थलीय निरीक्षण किया और परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव कृष्ण कुणाल, संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, पुलिस महानिरीक्षक कैलाश बिश्नोई, करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर और मुख्य अभियंता भुवन भास्कर भी उपस्थित रहे।

आम जनता पर असर

करीब 20 वर्षों बाद पंचना बांध से पानी छोड़े जाने की खबर से स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह और राहत का माहौल है। किसानों को उम्मीद है कि नहरों में नियमित जल-आपूर्ति से खरीफ और रबी दोनों फसलों की सिंचाई सुनिश्चित हो सकेगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि ट्रायल रन के बाद नियमित वितरण व्यवस्था कब से प्रभावी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ट्रायल रन के बाद नियमित और न्यायसंगत जल-वितरण में होगी। दो दशक के विवाद की जड़ें अक्सर प्रशासनिक जटिलताओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में होती हैं — महज आधारशिला रखने से किसानों की जमीन तक पानी नहीं पहुँचता। ₹61 लाख की परियोजना लागत अपेक्षाकृत मामूली है, जो दर्शाती है कि यह एक बड़े बुनियादी ढाँचे की शुरुआत है, न कि अंत। यह देखना होगा कि 13,000 हेक्टेयर भूमि तक सिंचाई का वादा किस समयसीमा में और किस निगरानी तंत्र के साथ पूरा होता है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचना बांध विवाद क्या था और यह कब से चल रहा था?
पंचना बांध राजस्थान के करौली जिले में स्थित है और इसके जल-बंटवारे को लेकर करीब दो दशकों से विवाद चला आ रहा था। 30 जून 2025 को सरकार स्तर पर सहमति बनने के बाद 6 जुलाई को नहरों में ट्रायल पानी छोड़कर इस विवाद का व्यावहारिक समाधान शुरू किया गया।
पंचना बांध से पानी छोड़ने से किन गांवों और किसानों को फायदा होगा?
बांध के आसपास के 39 गांवों को नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके अलावा करीब 13,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र के किसानों को सीधा फायदा होगा।
पंचना बांध की नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं की लागत कितनी है?
दो नई लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं और गुडला लिफ्ट परियोजना के तहत पीडीएन सिस्टम के रीमॉडलिंग कार्य की कुल लागत करीब ₹61 लाख बताई गई है। इन परियोजनाओं की आधारशिला 6 जुलाई को रखी गई।
ट्रायल रन के बाद नहरों में नियमित पानी कब से मिलेगा?
फिलहाल 6 जुलाई को कमांड एरिया की नहरों में ट्रायल के तौर पर पानी छोड़ा गया है ताकि वितरण व्यवस्था की जाँच हो सके। नियमित जल-आपूर्ति की समयसीमा के बारे में सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए?
कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, प्रभारी मंत्री जवाहर सिंह बेधम, ग्रामीण विकास सचिव कृष्ण कुणाल, संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, पुलिस महानिरीक्षक कैलाश बिश्नोई, जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा, पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल, करौली विधायक दर्शन सिंह गुर्जर और मुख्य अभियंता भुवन भास्कर उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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