गुजरात में मेथला बंधारा प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, 10 गांवों को होगा सिंचाई का लाभ
सारांश
Key Takeaways
- गुजरात सरकार ने मेथला बंधारा प्रोजेक्ट को 285 करोड़ रुपये की मंजूरी दी।
- 10 गांवों की 6,550 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिलेगी।
- प्रोजेक्ट खारेपन को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
- टेंडर प्रक्रिया के बाद प्रोजेक्ट लगभग दो साल में पूरा होगा।
- वन और पर्यावरण मंत्री ने लंबित मुद्दों का समाधान निकाला।
गांधीनगर, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात सरकार ने भावनगर जिले में लंबे समय से रुका हुआ मेथला बंधारा प्रोजेक्ट के लिए 285 करोड़ रुपए की मंजूरी प्रदान की है। इस योजना से 10 गांवों की लगभग 6,550 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और तटीय क्षेत्र में खारेपन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
जल संसाधन मंत्री ईश्वरसिंह पटेल ने कहा कि तलाजा तालुका में मेथला बंधारा योजना को स्वीकृति मिल गई है और इसे क्षेत्र में खारेपन को कम करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बताया कि यह योजना क्षेत्र में खारेपन को नियंत्रित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पटेल ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से लगभग 655 मिलियन क्यूबिक फीट बारिश का पानी संचित किया जा सकेगा, जिससे 10 गांवों में लगभग 6,550 हेक्टेयर फसल की भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। यह योजना भूजल को पुनर्भरण करने और आसपास के क्षेत्रों में कुओं और बोरवेल का जल स्तर बढ़ाने में भी सहायक होगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि बंधारा समुद्र के पानी को आगे बढ़ने से रोकने में मदद करेगा, जिससे क्षेत्र में खारेपन को बढ़ने से रोका जा सकेगा। यह प्रोजेक्ट किसानों के लिए एक वरदान सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इस प्रोजेक्ट के लगभग दो साल में पूरा होने की संभावना है।
वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि सरकार ने प्रोजेक्ट से संबंधित लंबे समय से लम्बित मुद्दों का समाधान किया है, जिसमें जंगल की भूमि भी शामिल है।
मोढवाडिया ने बताया कि मेथला बंधारा को भावनगर जिले के तलाजा तालुका में मेथला गांव के पास बागड़ नदी पर बनाने का प्रस्ताव है, जहां 598.2427 हेक्टेयर जंगल की भूमि जलमग्न हो जाएगी और इसके बदले में वल्लभीपुर तालुका के मोनपुर गांव में उतनी ही गैर-जंगल भूमि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को दी गई भूमि वेलावदर में ब्लैकबक नेशनल पार्क के पास है, जो इसे ब्लैकबक और अन्य जंगली प्रजातियों के निवास स्थान के रूप में उपयोगी हो सकती है। मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने आवश्यक वन मंजूरी प्रक्रिया के तहत 15 मार्च, 2024 को प्रोजेक्ट के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी।
मोढवाडिया ने दावा किया कि राज्य सरकार के इस निर्णय से प्रोजेक्ट के चालू होने के बाद किसानों और आसपास के गांवों के लोगों को लाभ होगा।
--आईएएनएल
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