पांचना बांध जल विवाद: किसानों ने 27 जून तक का अल्टीमेटम दिया, खंडीप महापंचायत का 19वाँ दिन
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के खंडीप में पांचना बांध का पानी नहरों में छोड़ने की माँग को लेकर चल रहा किसान आंदोलन 23 जून 2026 को अपने 19वें दिन में प्रवेश कर गया। विधायक रामकेश मीणा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 70 वर्षों में राजस्थान में किसानों का इतना बड़ा आंदोलन नहीं देखा गया और खंडीप महापंचायत की चर्चा अब दिल्ली तक पहुँच चुकी है। किसानों ने राज्य सरकार को 27 जून तक पानी छोड़ने का स्पष्ट अल्टीमेटम दे दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
आंदोलन के 19वें दिन धरना स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी। नदौती और टोडाभीम तहसीलों के दर्जनों गांवों से पंच-पटेल, किसान, महिलाएँ और युवा बड़ी संख्या में पहुँचे। सांसद, विधायक और वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी आंदोलन स्थल पर पहुँचकर खुला समर्थन दिया।
पंचना कमांड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति ने घोषणा की कि 24 जून को क्षेत्र के विभिन्न गांवों से हज़ारों किसान, महिलाएँ, युवा और पंच-पटेल सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ आंदोलन स्थल पर पहुँचेंगे।
नेताओं की प्रतिक्रिया
सभा को सांसद हरिश्चंद्र मीणा, विधायक घनश्याम मेहर, पूर्व विधायक लखन सिंह मीणा और पूर्व मंत्री गोलमा देवी ने संबोधित किया। सभी ने तुरंत पानी छोड़ने की माँग की।
पूर्व विधायक लखन सिंह मीणा ने कहा, 'किसानों के अधिकारों की इस लड़ाई को हम अंत तक लड़ेंगे। किसानों के हक की अनदेखी नहीं होने देंगे।'
विधायक घनश्याम मेहर ने कहा, 'यह किसी एक गाँव या एक समाज का आंदोलन नहीं है, बल्कि हज़ारों किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। हर जनप्रतिनिधि को खंडीप आकर किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए। जो नहीं आएंगे, उन्हें जनता को जवाब देना होगा।'
सांसद हरिश्चंद्र मीणा ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी माँग पूरी तरह न्यायसंगत है और अदालत के फैसलों के अनुरूप है। उन्होंने कहा, 'हमारी लड़ाई किसी समाज के खिलाफ नहीं है। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि सरकार अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाए।'
सरकार पर आरोप
विधायक रामकेश मीणा ने राज्य सरकार पर आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए समाजों के बीच विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े आंदोलन के बावजूद सरकार चुप क्यों है और मंत्री आसपास के गांवों में तो जा रहे हैं, लेकिन खंडीप आने से बच रहे हैं।
गौरतलब है कि यह आंदोलन पूर्वी राजस्थान के उन क्षेत्रों में हो रहा है जहाँ पांचना बांध के पानी पर किसानों की सिंचाई निर्भरता दशकों पुरानी है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार की चुप्पी प्रशासनिक विफलता का संकेत है।
आगे क्या होगा
किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 27 जून 2026 तक पांचना बांध का पानी नहरों में नहीं छोड़ा गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। समिति और विधायक रामकेश मीणा ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों से आंदोलन स्थल पर पहुँचकर किसानों का समर्थन करने की अपील की है। बढ़ती भीड़ और राजनीतिक समर्थन को देखते हुए खंडीप महापंचायत पूर्वी राजस्थान के सबसे बड़े किसान आंदोलनों में से एक बनती जा रही है।