राजस्थान विधानसभा में स्पीकर देवनानी की विधायकों की अनुपस्थिति पर कड़ी प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- विधायकों की अनुपस्थिति पर अध्यक्ष की नाराजगी।
- सदन में प्रश्नकाल का महत्व।
- भाजपा विधायक जगत सिंह के प्रश्न का मुद्दा।
- सदन में तीखी बहस का माहौल।
- शिक्षा मंत्री का स्पष्टीकरण।
जयपुर, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वसु देव देवनानी ने प्रश्नकाल के दौरान कई विधायकों के सदन में अनुपस्थित रहने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो विधायक सवाल पूछते हैं, उन्हें उत्तर सुनने के लिए सदन में उपस्थित रहना अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऐसा ही एक मामला एक दिन पहले भी देखने को मिला था, जब तीन-चार विधायक अपने सवालों के बावजूद सदन में मौजूद नहीं थे।
यह मुद्दा शुक्रवार को पुनः उभरकर सामने आया, जब भाजपा विधायक जगत सिंह का चंबल-धौलपुर-भरतपुर मेगा पेयजल परियोजना से संबंधित प्रश्न चर्चा के लिए रखा गया।
अध्यक्ष ने बार-बार जगत सिंह का नाम लिया, लेकिन वे सदन में उपस्थित नहीं थे। जगत सिंह ने यह पूछा था कि नदबई क्षेत्र के उन गांवों को कब तक पीने का पानी मिलेगा, जो अभी भी इस परियोजना से वंचित हैं।
शुक्रवार को देवनानी ने कहा कि जब भी कोई विधायक प्रश्नकाल या शून्यकाल में मुद्दा उठाए, तो उसे सदन में अवश्य उपस्थित रहना चाहिए। उन्होंने सभी विधायकों को इस संबंध में निर्देश भी दिए।
इस दौरान सदन में नेताओं के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। विपक्ष के उपनेता रामकेश मीणा ने अंबेडकर केंद्र और आधुनिक पुस्तकालय स्थापित करने की पिछली सरकार की घोषणा की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाया। इस पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि वर्तमान में कोई आधुनिक पुस्तकालय परियोजना नहीं चल रही है, इसलिए आगे की प्रगति का कोई सवाल नहीं उठता।
इस टिप्पणी पर विपक्ष के नेता ने तीखी प्रतिक्रिया दी और मंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते हुए उन पर ज्ञान की कमी और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
इस पर दिलावर ने कहा कि विपक्ष के नेता को पहले ठीक से पढ़ लेना चाहिए था। प्रस्ताव में डिजिटल लाइब्रेरी का जिक्र है, न कि आधुनिक लाइब्रेरी का। इस स्पष्टीकरण ने सदन में बहस और तेज कर दी।