रामगढ़ बांध पुनरुद्धार: राजस्थान हाईकोर्ट की सरकार को फटकार, 23 जुलाई तक ठोस योजना तलब
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान हाईकोर्ट ने 21 जुलाई 2026 को रामगढ़ बांध के पुनरुद्धार में हो रही अस्वीकार्य देरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को 23 जुलाई तक एक विस्तृत बहाली कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार की इच्छाशक्ति हो, तो इस ऐतिहासिक जलाशय को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
अदालत का रुख और निर्देश
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने बांध के जीर्णोद्धार से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए। बेंच ने जल संसाधन विभाग, सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग के सचिवों और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के अधिकारियों को 23 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर ठोस कार्य योजना पेश करने को कहा है।
अदालत ने यह भी चिंता व्यक्त की कि बांध के कैचमेंट एरिया में लगातार हो रहे अतिक्रमणों और पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। बेंच ने पाया कि अवैध कब्जों, भूमि के अनधिकृत आवंटन, खाइयों और पक्के निर्माणों ने जलग्रहण क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है।
ज़मीनी हकीकत: प्रगति नगण्य
एमिकस क्यूरी अभिनव शर्मा ने अदालत को बताया कि जमीनी स्तर पर अब तक बेहद कम काम हुआ है और बांध में पानी का प्राकृतिक बहाव बुरी तरह बाधित हो चुका है। उन्होंने मूल जल निकासी प्रणाली को बहाल करने के लिए कैचमेंट एरिया की स्थलाकृति की जाँच कराने का आग्रह किया।
रिपोर्टों के अनुसार, रोडा और माधोवेनी नदियों के बहाव क्षेत्रों में कृषि गतिविधियाँ और निर्माण कार्य अब भी जारी हैं, जिससे बांध में जल आवक और कम हो रही है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, बांध के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र का लगभग 930 हेक्टेयर हिस्सा JDA के अधिकार क्षेत्र में आता है।
एनओसी विवाद और सरकारी निष्क्रियता
अधिकारियों का आरोप है कि बांध के कैचमेंट एरिया में होटलों, रिसॉर्ट्स, कृषि परियोजनाओं और अन्य निर्माण कार्यों के लिए कई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किए गए थे। इन NOC की जाँच के लिए गठित विभागीय समिति ने अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। रिपोर्टों के अनुसार, अवैध निर्माण की शिकायतों के बावजूद सरकार कथित कब्जों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई शुरू करने में असमर्थ रही है।
गौरतलब है कि राजस्थान विधानसभा में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद, JDA और राजस्व विभाग द्वारा जारी NOC की जाँच सहित प्रमुख मुद्दों पर प्रगति अब तक स्पष्ट नहीं है।
जनसमर्थन और सरकार का रुख
स्थानीय निवासियों की ओर से पेश वकील करण राठौड़ ने इस मामले में पक्षकार बनने की अर्जी दाखिल की। उनके सहयोगी अधिवक्ता अंशुमन सक्सेना ने अदालत को बताया कि रामगढ़ बांध के पुनरुद्धार के लिए जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद ने हाईकोर्ट को जीर्णोद्धार प्रयासों में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया, हालाँकि यह ऐसे समय में आया है जब वर्षों की घोषणाओं के बाद भी जमीन पर कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं दिखा है।
आगे क्या होगा
23 जुलाई की अगली सुनवाई में हाईकोर्ट सरकार की बहाली योजना की समीक्षा करेगा। यह तारीख जयपुर के सबसे महत्वपूर्ण जल स्रोतों में से एक के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। अदालत की सख्त निगरानी में यह मामला अब केवल एक याचिका नहीं, बल्कि राजस्थान की जल सुरक्षा की परीक्षा बन चुका है।