आय वृद्धि योजना ठप: झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार से 4 हफ्ते में माँगा जवाब, 2023 से बेरोजगार युवा वंचित
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाई कोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आय वृद्धि योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन न होने के मामले में चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करे। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2023 से रांची जिले के बेरोजगार युवाओं को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज और अधिवक्ता आकाश अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि वर्ष 2023 और 2024 में इस योजना के लिए आवंटित राशि खर्च नहीं हो सकी और उसे वापस कर दिया गया। अदालत ने सरकार से पूछा है कि योजना सुचारू रूप से क्यों नहीं चल रही और पात्र लाभुकों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है।
प्रशासनिक अड़चन की जड़
याचिका में बताया गया कि लाभुकों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी माँगी थी। इसके जवाब में खुलासा हुआ कि जिला कल्याण पदाधिकारी ने लाभुकों की सूची सत्यापन के लिए उच्च अधिकारियों को भेजी थी, लेकिन अब तक अंतिम स्वीकृत सूची वापस नहीं आई है। इसी प्रशासनिक अड़चन के कारण पात्र लाभुक योजना के लाभ से वंचित बने हुए हैं।
योजना की पृष्ठभूमि
याचिका के अनुसार, झारखंड सरकार ने वर्ष 2015 में बेरोजगार युवाओं की आय बढ़ाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की थी। गौरतलब है कि एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी योजना के क्रियान्वयन में लगातार देरी और प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के आरोप बने हुए हैं, जिससे योजना का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा।
अदालत ने क्या माँगा
खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह योजना के संचालन, लाभुकों के चयन की प्रक्रिया और लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराए। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बेरोजगारी और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
सरकार को 1 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद खंडपीठ अगली सुनवाई में मामले की समीक्षा करेगी। यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं दे पाती, तो अदालत आगे की कार्रवाई कर सकती है।