झारखंड हाईकोर्ट की कड़ी चेतावनी, संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों का दिया 10 दिन का अल्टीमेटम

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झारखंड हाईकोर्ट की कड़ी चेतावनी, संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों का दिया 10 दिन का अल्टीमेटम

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। राज्य सरकार को 10 दिनों का अल्टीमेटम देकर कहा गया है कि यदि नियुक्तियों की अधिसूचना नहीं जारी की गई, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

Key Takeaways

  • झारखंड हाईकोर्ट ने संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की।
  • राज्य सरकार को 10 दिनों का अंतिम अल्टीमेटम दिया गया।
  • महत्वपूर्ण पदों की रिक्तता से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
  • अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
  • राज्य सरकार ने नामों की अनुशंसा में देरी की है।

रांची, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त और सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के रिक्त रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। सोमवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को १० दिनों का अंतिम अल्टीमेटम दिया, यह स्पष्ट करते हुए कि यदि इस अवधि में नियुक्तियों की अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि नियुक्तियों में हो रही देरी अब स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने इसे अंतिम समयसीमा बताते हुए कहा कि सरकार को हर हाल में १० दिनों के भीतर प्रक्रिया को पूरा करना होगा। मामले की अगली सुनवाई अब २३ अप्रैल को निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि २५ मार्च को हुई चयन समिति की बैठक में नामों की अनुशंसा कर फाइल राजभवन (लोक भवन) भेजी गई थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। इस पर प्रार्थी के अधिवक्ता अभय मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने जानबूझकर सूचना आयुक्त के लिए पाँच में से तीन नाम ऐसे भेजे थे, जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि थी।

इस पर राज्यपाल की आपत्ति के बाद फाइल वापस हो गई। महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार दोबारा नामों की अनुशंसा कर जल्द ही फाइल राजभवन को भेजेगी। उल्लेखनीय है कि राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग जैसे शीर्ष पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर पहली जनहित याचिका वर्ष २०२० में दाखिल की गई थी। पिछले छह वर्षों में कई बार सुनवाई होने के बावजूद अब तक इन पदों को नहीं भरा जा सका है।

इस मामले में १ अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान भी हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की थी। तब महाधिवक्ता ने अदालत को जानकारी दी थी कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक हुई है और प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रार्थी राजकुमार और एडवोकेट एसोसिएशन की ओर से दायर इन याचिकाओं में लगातार दलील दी जा रही है कि महत्वपूर्ण पदों के खाली होने से राज्य की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

Point of View

जो राज्य की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। सरकार को चाहिए कि वह अदालत के निर्देशों का पालन करें और जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करें।
NationPress
15/04/2026

Frequently Asked Questions

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कितने दिन का अल्टीमेटम दिया है?
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।
कौन से संवैधानिक पद रिक्त हैं?
राज्य में लोकायुक्त और सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद रिक्त हैं।
राज्य सरकार ने नियुक्तियों में देरी क्यों की?
राज्य सरकार ने नामों की अनुशंसा की थी, लेकिन बाद में कुछ नामों को वापस ले लिया गया।
इस मामले में अगली सुनवाई कब है?
इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
क्या राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है?
हां, महत्वपूर्ण पदों के खाली होने से राज्य की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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