झारखंड सूचना आयोग को मिले 4 नए आयुक्त, राज्यपाल गंगवार ने दी मंजूरी; मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति जल्द के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड राज्य सूचना आयोग में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के प्रस्ताव को 10 जून 2026 को मंजूरी प्रदान कर दी है। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर स्वीकृति देते हुए उन्होंने अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक को सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त करने की अनुमति दी है। यह नियुक्तियाँ ऐसे समय में हुई हैं जब आयोग में पाँच वर्षों से अधिक समय से सभी पद रिक्त पड़े थे और हजारों मामले लंबित थे।
मुख्य घटनाक्रम
राजभवन, रांची से बुधवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राज्यपाल ने इन नियुक्तियों को कुछ शर्तों के साथ अनुमोदित किया है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि मुख्य सूचना आयुक्त (चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर) के रिक्त पद पर भी शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आयोग का कामकाज प्रभावी और सुचारू रूप से चल सके।
पाँच वर्षों की रिक्तता और लंबित मामले
झारखंड में सूचना आयुक्तों के सभी पद पाँच वर्ष से भी अधिक समय से खाली थे, जिसके कारण सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े हजारों मामले सुनवाई के लिए अटके पड़े थे। इस रिक्तता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे और झारखंड उच्च न्यायालय ने भी राज्य सरकार को नियुक्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। गौरतलब है कि यह देश के उन राज्यों में से एक है जहाँ सूचना आयोग सबसे लंबे समय तक निष्क्रिय रहा।
राजभवन की महत्वपूर्ण टिप्पणी
राज्यपाल ने राज्य सरकार को भेजे पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में नियुक्ति प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्रक्रियागत त्रुटि सामने आती है या सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन को लेकर कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। राजभवन की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि सूचना आयोग में नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर समय-समय पर कानूनी सवाल उठते रहे हैं।
आम नागरिकों पर असर
चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद आयोग की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। इससे सूचना के अधिकार से जुड़े हजारों लंबित मामलों के निपटारे में गति आने और आम नागरिकों को राहत मिलने की संभावना है। राज्यपाल ने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों और न्यायालयों के निर्देशों के पूर्णतः अनुरूप हो।
क्या होगा आगे
अब सबकी नजर मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति पर है, जिसके बिना आयोग की पूर्ण कार्यक्षमता बहाल नहीं हो सकती। राज्यपाल के निर्देश के बाद राज्य सरकार पर इस रिक्त पद को भरने का दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य सूचना आयुक्त के बिना आयोग की संरचना अधूरी रहेगी और लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में बाधा बनी रह सकती है।