22 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 याचिका खारिज की, JPSC पहले ही कर चुका था रद्द

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 याचिका खारिज की, JPSC पहले ही कर चुका था रद्द

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 से जुड़े 35 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी — कारण: JPSC स्वयं परीक्षा रद्द कर चुका था। उत्तर कुंजी विवाद, आरक्षण विसंगति और अवमानना तक पहुँचा यह मामला अब पूरी तरह बंद हो गया है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त को 35 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज की, क्योंकि परीक्षा पहले ही रद्द हो चुकी थी।
JPSC ने 138 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों के लिए 10 मार्च 2024 को परीक्षा आयोजित की थी; 1,797 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए थे।
मॉडल उत्तर कुंजी में कथित त्रुटियों, आरक्षण और दिव्यांग कोटा विवाद के चलते मामला झारखंड उच्च न्यायालय से होते हुए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा।
झारखंड उच्च न्यायालय ने JPSC को संशोधित परिणाम जारी करने के निर्देश दिए थे; आयोग पर आदेश न मानने का आरोप लगा और अवमानना याचिका दायर हुई।
झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों के विरोध के बाद यह परीक्षा रद्द कर दी थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 अगस्त 2026 को झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 (सिविल जज जूनियर डिवीजन भर्ती) से जुड़े 35 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी। ये वे अभ्यर्थी थे जिन्हें संशोधित मेरिट सूची जारी होने के बाद चयन सूची से बाहर कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब परीक्षा ही निरस्त हो चुकी है, तो याचिका पर सुनवाई का कोई व्यावहारिक आधार नहीं बचता।

मुख्य घटनाक्रम

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा 10 मार्च 2024 को आयोजित की थी। परीक्षा के बाद आयोग ने तीन बार मॉडल उत्तर कुंजी जारी की और 2 जुलाई 2024 को परिणाम तथा कट-ऑफ अंक घोषित किए, जिसमें 1,797 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने स्वयं अदालत को बताया कि झारखंड सरकार और JPSC इस भर्ती परीक्षा को पहले ही रद्द कर चुके हैं। इसी आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका को निरस्त कर दिया।

विवाद की जड़

परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद मॉडल उत्तर कुंजी में कथित त्रुटियों, आरक्षण व्यवस्था और दिव्यांग कोटा को लेकर विवाद उभरा। मामला पहले झारखंड उच्च न्यायालय पहुँचा, जहाँ संशोधित परिणाम जारी करने के निर्देश दिए गए। आरोप लगा कि JPSC ने उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका दायर की और अदालत ने आयोग को कड़ी फटकार लगाई।

परीक्षा रद्द होने की पृष्ठभूमि

झारखंड सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों के व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद कई भर्ती परीक्षाएँ रद्द की थीं। झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 भी इन्हीं में शामिल रही। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ जब राज्य में भर्ती पारदर्शिता को लेकर सार्वजनिक दबाव चरम पर था।

सर्वोच्च न्यायालय का रुख

अदालत ने माना कि परीक्षा निरस्त होने के बाद संशोधित मेरिट सूची से बाहर हुए 35 अभ्यर्थियों की याचिका का कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं रह जाता। यह निर्णय न्यायिक समय और संसाधनों की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है — अदालत ने निरर्थक हो चुकी राहत के लिए सुनवाई जारी रखने से इनकार किया।

आगे क्या

अब जब परीक्षा और संबंधित याचिका दोनों समाप्त हो चुकी हैं, प्रभावित 35 अभ्यर्थियों के लिए अगला विकल्प नई भर्ती प्रक्रिया की प्रतीक्षा करना है। JPSC द्वारा सिविल जज पदों के लिए नई अधिसूचना कब जारी होगी, इस पर सरकार की ओर से अभी कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना के आरोप लगे और अंततः पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी। सवाल यह है कि 138 पदों के लिए शुरू हुई यह प्रक्रिया इतनी विवादास्पद क्यों हुई — और नई भर्ती में वही गलतियाँ न दोहराई जाएँ, इसके लिए राज्य सरकार के पास क्या ठोस तंत्र है। बिना संस्थागत सुधार के, अगली परीक्षा भी इसी रास्ते पर जा सकती है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा परीक्षा-2023 की याचिका क्यों खारिज की?
सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका इसलिए खारिज की क्योंकि झारखंड सरकार और JPSC पहले ही इस परीक्षा को रद्द कर चुके थे। जब परीक्षा ही निरस्त हो चुकी हो, तो चयन सूची से बाहर हुए अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई का कोई व्यावहारिक आधार नहीं बचता।
झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 किस कारण रद्द हुई?
झारखंड सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों के व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद यह परीक्षा रद्द की। मॉडल उत्तर कुंजी में त्रुटियों, आरक्षण व्यवस्था और दिव्यांग कोटा को लेकर भी गंभीर विवाद उठे थे।
JPSC सिविल जज भर्ती 2023 में कितने पद थे और परिणाम क्या रहा?
JPSC ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों के लिए 10 मार्च 2024 को परीक्षा आयोजित की थी। 2 जुलाई 2024 को घोषित परिणाम में 1,797 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था, लेकिन बाद में संशोधित मेरिट सूची जारी होने से 35 अभ्यर्थी बाहर हो गए।
झारखंड उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
झारखंड उच्च न्यायालय ने JPSC को संशोधित परिणाम जारी करने के निर्देश दिए थे। आरोप लगा कि आयोग ने इस आदेश का पालन नहीं किया, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका दायर की और अदालत ने JPSC को कड़ी फटकार लगाई।
प्रभावित 35 अभ्यर्थियों के लिए आगे क्या विकल्प हैं?
सर्वोच्च न्यायालय से याचिका खारिज होने के बाद इन अभ्यर्थियों के लिए अब नई भर्ती प्रक्रिया की प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प है। JPSC द्वारा सिविल जज पदों के लिए नई अधिसूचना कब जारी होगी, इस पर सरकार की ओर से अभी कोई समयसीमा नहीं दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 3 दिन पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले