झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: साइबर ठगी पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था लागू

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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: साइबर ठगी पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था लागू

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए राहत भरा कदम उठाते हुए सरकार को मुआवजा व्यवस्था स्थापित करने का आदेश दिया है। यह व्यवस्था पीड़ितों को अपनी शिकायतें दर्ज करने और मुआवजा मांगने में मदद करेगी।

Key Takeaways

  • साइबर ठगी के पीड़ितों को राहत देने के लिए हाईकोर्ट ने मुआवजा व्यवस्था लागू की है।
  • सरकार को एक महीने के भीतर इस तंत्र को चालू करने का आदेश दिया गया है।
  • आसान और यूजर-फ्रेंडली ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है।
  • छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश।
  • साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पीड़ितों को समय पर न्याय मिलना चाहिए।

रांची, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में साइबर ठगी और ऑनलाइन लूट के पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया है कि वह तुरंत एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करे, जिससे पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और ठगी से हुए नुकसान का मुआवजा मांग सकें।

यह आदेश शुक्रवार को अधिवक्ता उत्कर्ष सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनाक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की बेंच ने कहा कि जबकि नियम 2003 में बनाए गए थे, लेकिन 21 साल बीतने के बाद भी आम जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिला। यह सिस्टम अब तक सिर्फ कागजों पर ही था।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि झारखंड के आईटी सचिव को इस तरह के मामलों की सुनवाई और निर्णय लेने का अधिकार पहले से ही दिया गया था। लेकिन सिस्टम के सक्रिय न होने के कारण, ऑनलाइन धोखाधड़ी या डेटा चोरी के शिकार लोग मुआवजे के लिए कहीं अपील नहीं कर पा रहे थे।

अब अदालत ने सरकार को एक महीने के भीतर इस तंत्र को सक्रिय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया जितनी सरल होगी, उतने ही अधिक लोग इसका उपयोग कर सकेंगे। इसलिए सरकार को एक आसान और यूजर-फ्रेंडली ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि लोगों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े।

हालांकि, ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजने की सुविधा पहले से उपलब्ध है, लेकिन अदालत ने कहा कि इसकी जानकारी लोगों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जानी चाहिए। इसके अलावा, सरकार को 15 दिनों के भीतर अखबारों और अन्य माध्यमों से इस व्यवस्था की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है, ताकि आम जनता को इसके बारे में जानकारी हो सके। साथ ही, छह महीने के भीतर शिकायत दर्ज करने के लिए स्पष्ट और सरल गाइडलाइन तैयार करने और विशेष रूप से छात्रों एवं वरिष्ठ नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाने का भी आदेश दिया गया है, क्योंकि ये वर्ग अक्सर साइबर ठगी के शिकार होते हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, डेटा लीक और पहचान की चोरी जैसे साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और इनका स्वरूप भी समय के साथ जटिल होता जा रहा है। इसीलिए यह आवश्यक है कि पीड़ितों को समय पर और प्रभावी न्याय मिल सके।

Point of View

जो साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करेगा। यह व्यवस्था न केवल न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाएगी, बल्कि लोगों में जागरूकता और सुरक्षा की भावना भी बढ़ाएगी।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए क्या आदेश दिया?
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक ऐसी व्यवस्था शुरू करने का आदेश दिया है, जिससे पीड़ित अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें और मुआवजा मांग सकें।
क्या पीड़ितों को मुआवजा कैसे मिलेगा?
पीड़ितों को मुआवजा प्राप्त करने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जिससे वे आसानी से अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें।
इस व्यवस्था का लाभ किसे मिलेगा?
यह व्यवस्था विशेष रूप से छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों जैसे वर्गों को लाभ पहुंचाएगी, जिन्हें साइबर ठगी का अधिक जोखिम होता है।
सरकार को इस व्यवस्था को लागू करने में कितना समय लगेगा?
अदालत ने सरकार को इस तंत्र को एक महीने के भीतर चालू करने का निर्देश दिया है।
क्या ईमेल के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है?
जी हां, ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजने की सुविधा पहले से उपलब्ध है, लेकिन इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
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