भवानीसागर बांध: तीनों नहरों में एक साथ पानी छोड़ने की मांग, लोअर भवानी के किसानों ने उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
इरोड जिले के लोअर भवानी सिंचाई क्षेत्र के किसानों ने 15 जुलाई को तमिलनाडु सरकार से मांग की है कि भवानीसागर बांध से निकलने वाली तीनों प्रमुख नहर प्रणालियों — लोअर भवानी, थडापल्ली-अरक्कनकोट्टई और कलिंगरायन — में सिंचाई का पानी एक साथ और समान रूप से छोड़ा जाए। किसानों का कहना है कि मौजूदा चरणबद्ध शेड्यूल के कारण लोअर भवानी क्षेत्र के किसानों को बार-बार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मौजूदा शेड्यूल से क्या है समस्या
वर्तमान व्यवस्था के तहत थडापल्ली-अरक्कनकोट्टई नहर को अप्रैल में और कलिंगरायन नहर को जून में पानी मिलता है, जबकि लोअर भवानी नहर को पानी अगस्त तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। किसानों के अनुसार, तब तक खेती का अहम मौसम निकल चुका होता है और फसल बुआई का सही समय हाथ से जाता रहता है।
किसानों ने आरोप लगाया कि इस असमान बंटवारे के कारण लोअर भवानी कमांड एरिया में धान की खेती के 8 चक्र और दालों की खेती के 16 चक्र बर्बाद हो चुके हैं। यह क्षेत्र अब भयंकर सूखे की चपेट में है और कई गांवों में पीने के पानी की किल्लत भी गंभीर रूप ले चुकी है।
किसानों की मुख्य मांगें
एक किसान बैठक में यह मांगें सामने आईं। किसानों ने जल संसाधन विभाग से आग्रह किया कि पानी का बंटवारा मौजूदा बारी-बारी वाले शेड्यूल की जगह प्रत्येक नहर प्रणाली के अंतर्गत आने वाले कृषि रकबे के अनुपात के आधार पर किया जाए। साथ ही उन्होंने वॉटर ट्रिब्यूनल के नियमों के अनुसार तीनों नहरों में एक साथ पानी छोड़ने की माँग भी रखी।
किसानों का तर्क है कि ऐसी व्यवस्था से न केवल निष्पक्षता बनी रहेगी, बल्कि पानी के बंटवारे को लेकर बार-बार उठने वाले विवादों पर भी लगाम लगेगी।
भवानीसागर बांध का महत्व
भवानीसागर बांध तमिलनाडु के सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई जलाशयों में से एक है। यह इरोड, तिरुपुर और करूर जिलों में हज़ारों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई करता है। इस क्षेत्र में धान, गन्ना, हल्दी, केला और नारियल जैसी प्रमुख फसलें उगाई जाती हैं। यह जलाशय लाखों लोगों के लिए पेयजल का भी एक अहम स्रोत है।
गौरतलब है कि यह क्षेत्र तमिलनाडु के कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और इस बांध पर निर्भर किसानों की संख्या बड़ी है। ऐसे में जल वितरण में देरी का असर केवल एक मौसम तक सीमित नहीं रहता — यह दीर्घकालिक कृषि संकट में तब्दील हो जाता है।
किसान नेता की प्रतिक्रिया
लोअर भवानी सिंचाई किसान संघ के नेता वी. नल्लासामी ने कहा कि किसान अब सिंचाई के पानी को देर से और भेदभावपूर्ण तरीके से छोड़े जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे, क्योंकि इससे इस इलाके में खेती पर बार-बार बुरा असर पड़ा है। उन्होंने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
आगे क्या होगा
किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार करेंगे। अब सभी की निगाहें तमिलनाडु सरकार और जल संसाधन विभाग पर हैं कि वे इस दीर्घकालिक सिंचाई विवाद का स्थायी समाधान कब और कैसे निकालते हैं।