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लोअर भवानी डैम संकट: तमिलनाडु के WRD ने सिंचाई जल छोड़ने से किया इनकार, किसानों ने 6 जुलाई से भूख हड़ताल की दी चेतावनी

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लोअर भवानी डैम संकट: तमिलनाडु के WRD ने सिंचाई जल छोड़ने से किया इनकार, किसानों ने 6 जुलाई से भूख हड़ताल की दी चेतावनी

सारांश

लोअर भवानी डैम में 32.8 TMC क्षमता के मुकाबले मात्र 5.34 TMC पानी बचा है और आवक सिर्फ 81 क्यूसेक। WRD ने सिंचाई जल छोड़ने से इनकार किया, पेयजल को प्राथमिकता दी। कलिंगरायन के किसानों ने 6 जुलाई से भूख हड़ताल की चेतावनी दी, जबकि LBP किसान किसी भी पानी के बँटवारे के विरोध में हैं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु WRD ने 2 जुलाई 2026 को कलिंगरायन और LBP नहरों में सिंचाई जल छोड़ने से इनकार किया।
लोअर भवानी डैम में 32.8 TMC क्षमता के विरुद्ध केवल 5.34 TMC जल शेष; आवक मात्र 81 क्यूसेक ।
सिंचाई जल के लिए न्यूनतम 5,000–6,000 क्यूसेक निरंतर प्रवाह आवश्यक, जो अभी उपलब्ध नहीं।
कलिंगरायन किसान संगठन ने 5 जुलाई तक पानी न मिलने पर 6 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी।
केले, गन्ने, हल्दी और प्याज की फसलें प्रभावित; मार्च से नहर मरम्मत के कारण आपूर्ति बंद।
LBP किसानों ने कलिंगरायन को पानी देने के विरुद्ध सड़क जाम की चेतावनी दी।

इरोड जिले में लोअर भवानी डैम का जलस्तर गंभीर रूप से घटने के बाद तमिलनाडु जल संसाधन विभाग (WRD) ने 2 जुलाई 2026 को कलिंगरायन और लोअर भवानी प्रोजेक्ट (LBP) नहर प्रणालियों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने से स्पष्ट इनकार कर दिया। विभाग के अनुसार, 32.8 हजार मिलियन क्यूबिक फीट की क्षमता वाले इस जलाशय में मंगलवार तक केवल 5.34 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी शेष था और जलग्रहण क्षेत्र से आवक मात्र 81 क्यूसेक थी।

जल संकट की स्थिति

WRD अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि डैम में उपलब्ध सीमित जल भंडार को फिलहाल केवल पेयजल आपूर्ति के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। उनके अनुसार, कलिंगरायन या LBP नहर प्रणाली में पानी छोड़ने से पहले जलग्रहण क्षेत्र से 5,000 से 6,000 क्यूसेक का निरंतर प्रवाह आवश्यक है। गौरतलब है कि वर्तमान आवक इस न्यूनतम सीमा से कहीं नीचे है।

यह ऐसे समय में आया है जब जून में सामान्य से कम वर्षा के कारण जलग्रहण क्षेत्रों में पानी का संचय नहीं हो पाया। इस वर्ष मार्च में कलिंगरायन नहर के नवीनीकरण कार्यों के लिए आपूर्ति बंद की गई थी और अधिकारियों ने जून के अंत तक पानी छोड़ने की योजना बनाई थी, जिसे अब अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है।

किसानों की माँगें और आंदोलन की चेतावनी

कलिंगरायन नहर प्रणाली पर निर्भर किसानों के एक संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 5 जुलाई तक सिंचाई जल नहीं छोड़ा गया, तो वे 6 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। किसानों का कहना है कि लंबे समय से पानी की आपूर्ति बंद होने से केले और गन्ने जैसी खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और हल्दी व प्याज की खेती की तैयारियाँ भी बाधित हो गई हैं।

आम तौर पर कलिंगरायन नहर में जून के मध्य से लोअर भवानी डैम का पानी आता है और यह सिलसिला अप्रैल के अंत तक जारी रहता है। इस बार नहर मरम्मत और जल संकट की दोहरी मार ने किसानों की स्थिति विकट कर दी है।

LBP किसानों का विरोध

दूसरी ओर, लोअर भवानी प्रोजेक्ट नहर प्रणाली के अंतर्गत आने वाले किसान कलिंगरायन नहर को पानी देने के किसी भी निर्णय का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि कावेरी जल आवंटन और सरकार के पूर्व आदेशों का सख्ती से पालन होना चाहिए। इन किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा हालात में पानी का रुख बदला गया, तो वे सड़क जाम सहित विरोध-प्रदर्शन करेंगे।

इस प्रकार दोनों नहर प्रणालियों के किसान संगठन परस्पर विरोधी माँगों के साथ सरकार पर दबाव बना रहे हैं, जिससे प्रशासन के लिए संतुलन बनाना कठिन हो गया है।

विभाग का रुख और आगे की राह

WRD अधिकारियों ने बताया कि कलिंगरायन नहर के मरम्मत कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं, जिससे जलाशय की स्थिति सुधरते ही तत्काल पानी छोड़ा जा सकेगा। हालाँकि, विभाग ने स्पष्ट किया कि जलग्रहण क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा और आवक बढ़ने तक सिंचाई जल छोड़ने का कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। अब सब कुछ मानसून की गति पर निर्भर करता है — यदि आने वाले दिनों में जलग्रहण क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई, तो ही दोनों नहर प्रणालियों के किसानों को राहत मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मानसून की अनिश्चितता और किसान संगठनों की परस्पर विरोधी माँगें एक साथ टकरा रही हैं। WRD का पेयजल को प्राथमिकता देने का निर्णय तकनीकी रूप से उचित है, लेकिन कलिंगरायन और LBP किसानों के बीच की खाई यह दर्शाती है कि राज्य के पास अभी तक कोई ठोस जल-साझाकरण नीति नहीं है जो संकट काल में लागू हो सके। 6 जुलाई की भूख हड़ताल की समयसीमा सरकार पर दबाव बढ़ाएगी, लेकिन बिना मानसून की मदद के कोई भी राजनीतिक हस्तक्षेप डैम को नहीं भर सकता।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोअर भवानी डैम में अभी कितना पानी है?
मंगलवार, 2 जुलाई 2026 तक लोअर भवानी डैम में केवल 5.34 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) पानी था, जबकि इसकी कुल क्षमता 32.8 TMC है। जलग्रहण क्षेत्र से आवक मात्र 81 क्यूसेक थी।
तमिलनाडु WRD ने सिंचाई जल क्यों नहीं छोड़ा?
जल संसाधन विभाग ने कहा कि डैम में उपलब्ध जल भंडार केवल पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त है। सिंचाई के लिए कम से कम 5,000 से 6,000 क्यूसेक का निरंतर प्रवाह आवश्यक है, जो अभी जलग्रहण क्षेत्र से नहीं आ रहा।
कलिंगरायन नहर के किसान क्या माँग कर रहे हैं?
कलिंगरायन नहर प्रणाली के किसान संगठन ने 5 जुलाई तक सिंचाई जल छोड़ने की माँग की है और चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर 6 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू होगी। उनका कहना है कि केले, गन्ने, हल्दी और प्याज की फसलें लंबे समय से पानी न मिलने के कारण बर्बाद हो रही हैं।
LBP किसान कलिंगरायन को पानी देने का विरोध क्यों कर रहे हैं?
लोअर भवानी प्रोजेक्ट नहर के किसानों का तर्क है कि कावेरी जल आवंटन और सरकार के पूर्व आदेशों के अनुसार पानी का बँटवारा होना चाहिए। वे मानते हैं कि संकट काल में कलिंगरायन को पानी देने से उनके हिस्से का पानी कम हो जाएगा और उन्होंने सड़क जाम सहित विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
कलिंगरायन नहर में पानी कब मिल सकता है?
WRD अधिकारियों के अनुसार, कलिंगरायन नहर की मरम्मत लगभग पूरी हो चुकी है और जलाशय की स्थिति सुधरते ही पानी छोड़ा जा सकता है। लेकिन यह पूरी तरह जलग्रहण क्षेत्र में मानसून की बारिश पर निर्भर है — जब तक आवक 5,000 क्यूसेक से ऊपर नहीं जाती, सिंचाई जल छोड़ने का कोई निर्णय नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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