यमुना जल समझौता: ₹34,102 करोड़ की परियोजना से राजस्थान में जल क्रांति, सीएम भजनलाल ने बताया 'स्वर्ण अध्याय'
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित जोधपुर हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए यमुना जल परियोजना समझौते को जल प्रबंधन के इतिहास का 'स्वर्ण अध्याय' करार दिया। ₹34,102 करोड़ की यह परियोजना लगभग तीन दशकों से लंबित थी और अब इसके पूरा होने से शेखावाटी सहित राज्य के जल-संकटग्रस्त इलाकों में लाखों परिवारों को सुरक्षित पेयजल मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
समझौते का महत्व और दायरा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल दो राज्यों के बीच जल-बंटवारे की तकनीकी व्यवस्था नहीं है, बल्कि राजस्थान के करोड़ों निवासियों की जल सुरक्षा और समृद्धि की दिशा में एक मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि पानी की बेहतर उपलब्धता से कृषि, उद्योग, पर्यटन और बुनियादी ढाँचे के विकास को एक साथ गति मिलेगी।
परियोजना से भूजल पर निर्भरता घटेगी, जल संरक्षण के प्रयास सुदृढ़ होंगे और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवन-स्तर में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है। शर्मा ने इसे 'इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना' नहीं, बल्कि 'राजस्थान के भविष्य में ऐतिहासिक निवेश' बताया।
केंद्र-राज्य तालमेल और राजनीतिक नेतृत्व
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रभावी मार्गदर्शन को दिया। उनके अनुसार, शाह ने राजस्थान और हरियाणा के बीच रचनात्मक बातचीत को सुगम बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई, जिससे इस जटिल मुद्दे पर सहमति संभव हो सकी।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहयोग की भी सराहना करते हुए शर्मा ने कहा कि 'डबल-इंजन सरकार' ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामूहिक संकल्प से दशकों पुरानी चुनौतियों का समाधान संभव है।
शेखावाटी और जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों पर असर
परियोजना का सबसे सीधा लाभ शेखावाटी जैसे उन इलाकों को मिलेगा जहाँ पानी की कमी दशकों से कृषि और आजीविका के लिए सबसे बड़ी बाधा रही है। यमुना जल की उपलब्धता से इन क्षेत्रों में कृषि और पशुपालन को नई गति मिलेगी, औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा और रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
गौरतलब है कि राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसके बड़े भाग में वार्षिक वर्षा औसत से काफी कम रहती है, जिससे जल प्रबंधन यहाँ की दीर्घकालिक विकास रणनीति का केंद्रीय मुद्दा रहा है।
विकसित भारत 2047 और जल सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन से जोड़ते हुए कहा कि जल सुरक्षा इस राष्ट्रीय लक्ष्य का एक अहम स्तंभ है। राज्य सरकार ने हर चरण की बारीकी से निगरानी करने और परियोजना को समय पर तथा गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
आने वाले वर्षों में यमुना जल की उपलब्धता एक आत्मनिर्भर और जल-सुरक्षित राजस्थान की नींव रखेगी — यह परियोजना केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का दीर्घकालिक संकल्प है।