1 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यमुना जल समझौता: ₹34,102 करोड़ की परियोजना से राजस्थान में जल क्रांति, सीएम भजनलाल ने बताया 'स्वर्ण अध्याय'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यमुना जल समझौता: ₹34,102 करोड़ की परियोजना से राजस्थान में जल क्रांति, सीएम भजनलाल ने बताया 'स्वर्ण अध्याय'

सारांश

तीन दशकों की प्रतीक्षा के बाद राजस्थान और हरियाणा के बीच ₹34,102 करोड़ का यमुना जल समझौता हुआ। सीएम भजनलाल शर्मा ने इसे 'स्वर्ण अध्याय' बताया — शेखावाटी जैसे जल-संकटग्रस्त इलाकों के लिए यह परियोजना कृषि, उद्योग और रोज़गार की नई संभावनाओं का द्वार खोल सकती है।

मुख्य बातें

राजस्थान और हरियाणा के बीच ₹34,102 करोड़ की यमुना जल परियोजना पर समझौता; तीन दशक बाद ऐतिहासिक करार।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में समझौते को 'स्वर्ण अध्याय' बताया।
परियोजना से शेखावाटी सहित जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में लाखों परिवारों को सुरक्षित पेयजल मिलने की उम्मीद।
भूजल पर निर्भरता घटेगी; कृषि , उद्योग , पर्यटन और रोज़गार को नई गति मिलने का अनुमान।
प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन के तहत जल सुरक्षा को केंद्रीय प्राथमिकता बताया गया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित जोधपुर हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए यमुना जल परियोजना समझौते को जल प्रबंधन के इतिहास का 'स्वर्ण अध्याय' करार दिया। ₹34,102 करोड़ की यह परियोजना लगभग तीन दशकों से लंबित थी और अब इसके पूरा होने से शेखावाटी सहित राज्य के जल-संकटग्रस्त इलाकों में लाखों परिवारों को सुरक्षित पेयजल मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

समझौते का महत्व और दायरा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल दो राज्यों के बीच जल-बंटवारे की तकनीकी व्यवस्था नहीं है, बल्कि राजस्थान के करोड़ों निवासियों की जल सुरक्षा और समृद्धि की दिशा में एक मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि पानी की बेहतर उपलब्धता से कृषि, उद्योग, पर्यटन और बुनियादी ढाँचे के विकास को एक साथ गति मिलेगी।

परियोजना से भूजल पर निर्भरता घटेगी, जल संरक्षण के प्रयास सुदृढ़ होंगे और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवन-स्तर में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है। शर्मा ने इसे 'इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना' नहीं, बल्कि 'राजस्थान के भविष्य में ऐतिहासिक निवेश' बताया।

केंद्र-राज्य तालमेल और राजनीतिक नेतृत्व

मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रभावी मार्गदर्शन को दिया। उनके अनुसार, शाह ने राजस्थान और हरियाणा के बीच रचनात्मक बातचीत को सुगम बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई, जिससे इस जटिल मुद्दे पर सहमति संभव हो सकी।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहयोग की भी सराहना करते हुए शर्मा ने कहा कि 'डबल-इंजन सरकार' ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामूहिक संकल्प से दशकों पुरानी चुनौतियों का समाधान संभव है।

शेखावाटी और जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों पर असर

परियोजना का सबसे सीधा लाभ शेखावाटी जैसे उन इलाकों को मिलेगा जहाँ पानी की कमी दशकों से कृषि और आजीविका के लिए सबसे बड़ी बाधा रही है। यमुना जल की उपलब्धता से इन क्षेत्रों में कृषि और पशुपालन को नई गति मिलेगी, औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा और रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

गौरतलब है कि राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसके बड़े भाग में वार्षिक वर्षा औसत से काफी कम रहती है, जिससे जल प्रबंधन यहाँ की दीर्घकालिक विकास रणनीति का केंद्रीय मुद्दा रहा है।

विकसित भारत 2047 और जल सुरक्षा

मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन से जोड़ते हुए कहा कि जल सुरक्षा इस राष्ट्रीय लक्ष्य का एक अहम स्तंभ है। राज्य सरकार ने हर चरण की बारीकी से निगरानी करने और परियोजना को समय पर तथा गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

आने वाले वर्षों में यमुना जल की उपलब्धता एक आत्मनिर्भर और जल-सुरक्षित राजस्थान की नींव रखेगी — यह परियोजना केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का दीर्घकालिक संकल्प है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — ₹34,102 करोड़ की परियोजना के लिए समयबद्ध निष्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण अनिवार्य है। शेखावाटी जैसे इलाकों में जल-संकट की जड़ें गहरी हैं और केवल आपूर्ति बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी — माँग प्रबंधन और भूजल पुनर्भरण की समानांतर रणनीति भी ज़रूरी है। यह भी देखना होगा कि परियोजना का लाभ वास्तव में ग्रामीण और वंचित तबकों तक पहुँचता है या केवल शहरी और औद्योगिक उपभोक्ताओं तक सीमित रहता है। राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन हो चुका है; अब जवाबदेही और पारदर्शी निगरानी तंत्र की परीक्षा बाकी है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान-हरियाणा यमुना जल समझौता क्या है?
यह राजस्थान और हरियाणा के बीच हुआ एक ऐतिहासिक जल-साझाकरण करार है, जिसके तहत ₹34,102 करोड़ की यमुना जल परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह समझौता लगभग तीन दशकों से लंबित था और इसका उद्देश्य राजस्थान के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
इस परियोजना से राजस्थान के किन इलाकों को सबसे अधिक फायदा होगा?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अनुसार, शेखावाटी जैसे पानी की कमी वाले इलाकों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा राज्य के अन्य जल-संकटग्रस्त ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी लाखों परिवारों को सुरक्षित पेयजल मिलने की उम्मीद है।
इस समझौते में केंद्र सरकार की क्या भूमिका रही?
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सक्रिय मार्गदर्शन से दोनों राज्यों के बीच सहमति बन सकी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया।
यमुना जल परियोजना से राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
पानी की बेहतर उपलब्धता से कृषि , पशुपालन , उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे नए औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनेगा, रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवन-स्तर में सुधार अपेक्षित है।
परियोजना कब तक पूरी होगी और इसकी निगरानी कैसे होगी?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परियोजना को समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि हर चरण की बारीकी से निगरानी की जाएगी ताकि लाभ राजस्थान के लोगों तक जल्द से जल्द पहुँचे; हालाँकि पूर्णता की कोई विशेष समय-सीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 9 घंटे पहले
  3. कल
  4. कल
  5. 5 दिन पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 6 महीने पहले