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यमुना जल समझौता 2025: हरियाणा-राजस्थान में सहमति, अगले सोमवार PM मोदी की मौजूदगी में होगा हस्ताक्षर

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यमुना जल समझौता 2025: हरियाणा-राजस्थान में सहमति, अगले सोमवार PM मोदी की मौजूदगी में होगा हस्ताक्षर

सारांश

तीन दशक बाद यमुना जल विवाद सुलझने की राह पर — हरियाणा और राजस्थान ने 1994 के मूल आवंटन के आधार पर नए समझौते पर सहमति जताई। पाइपलाइन से राजस्थान को पानी पहुँचाने का फैसला, अगले सोमवार PM मोदी की मौजूदगी में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।

मुख्य बातें

23 जून को नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्री सी.आर.
पाटिल की अध्यक्षता में हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल समझौते पर बैठक हुई।
1994 के मूल समझौते के आधार पर नया MoA किया जाएगा; राजस्थान को उसका मूल जल आवंटन पाइपलाइन के ज़रिए मिलेगा।
अगले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।
लखवार, किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं पर भी सहमति बनी; तीनों राज्यों — राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली — को लाभ होगा।
शेखावटी क्षेत्र को पेयजल और किसानों को सिंचाई जल मिलने की उम्मीद; मानसून के अतिरिक्त जल के उपयोग पर भी सहमति।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में 23 जून को नई दिल्ली में हुई बैठक में हरियाणा और राजस्थान के बीच तीन दशक पुराने यमुना जल समझौते को नई दिशा देने पर सहमति बन गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोनों इस बैठक में उपस्थित रहे। अगले सोमवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नए समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

मुख्य घटनाक्रम

जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बैठक के बाद बताया कि 1994 के मूल समझौते के तहत हरियाणा के अतिरिक्त पानी के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक में तय हुआ कि एक नया समझौता किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि राजस्थान को उसके मूल आवंटन के अनुसार पानी मिले। यह पानी पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान तक पहुँचाया जाएगा और दोनों राज्य इस व्यवस्था पर सहमत हो गए हैं।

पाटिल ने कहा कि आज के फैसले को अंतिम रूप दे दिया गया है और सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में समझौते का आदान-प्रदान किया जाएगा।

राज्यों की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बैठक में जल वितरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर 'विस्तृत एवं सकारात्मक चर्चा' हुई। उन्होंने कहा, 'हमारा प्रयास है कि संवाद और सहयोग की भावना के साथ जल संसाधनों के न्यायसंगत एवं प्रभावी प्रबंधन की दिशा में सार्थक समाधान सुनिश्चित किए जाएं।' सैनी ने यह भी बताया कि लखवार, किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं पर सहमति बन चुकी है, जिनसे राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के लोगों को लाभ होगा।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े विषयों पर भी सार्थक विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि यह परियोजना शेखावटी क्षेत्र को पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ किसानों की सिंचाई संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति भी करेगी।

ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व

गौरतलब है कि राजस्थान लंबे समय से यमुना के पानी में अपना हिस्सा माँग रहा था। 1994 के मूल फैसले को अब सभी संबंधित पक्षों के बीच बातचीत के ज़रिए आगे बढ़ाया गया है — यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय जल विवाद दशकों से अनसुलझे पड़े हैं। शर्मा ने बताया कि राजस्थान-मध्य प्रदेश, हरियाणा-राजस्थान, हिमाचल प्रदेश-उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड और हरियाणा-उत्तर प्रदेश-दिल्ली जैसे कई पुराने जल विवादों पर केंद्र की सक्रिय भूमिका से नई योजनाएं बनाई और लागू की जा रही हैं।

यह भी तय हुआ कि मानसून के दौरान बेकार बह जाने वाले वर्षा जल का उपयोग किया जाए और उसे राजस्थान की दिशा में निर्देशित किया जाए — जो जल प्रबंधन के नज़रिए से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आम जनता पर असर

इस समझौते के लागू होने पर राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र सहित कई हिस्सों में पेयजल संकट कम होने की उम्मीद है। किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा और लखवार, किशाऊ व रेणुका बांध परियोजनाओं के पूरा होने पर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तीनों राज्यों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा मिलेगी।

क्या होगा आगे

अब सभी की निगाहें अगले सोमवार होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी स्वयं उपस्थित रहेंगे। समझौते की शर्तों को अमलीजामा पहनाने और पाइपलाइन के माध्यम से जल वितरण की समयसीमा पर अभी विस्तृत ब्यौरा सामने आना बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी समझौते के क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि 1994 का मूल समझौता भी कागज़ पर था, ज़मीन पर नहीं उतरा। पाइपलाइन निर्माण की समयसीमा, लागत-साझेदारी का ढाँचा और जल-प्रवाह की निगरानी तंत्र — इन तीन बिंदुओं पर अभी कोई सार्वजनिक ब्यौरा नहीं है। राजस्थान के शेखावटी जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए यह घोषणा उम्मीद जगाती है, लेकिन अंतर-राज्यीय जल समझौतों का इतिहास बताता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और तकनीकी-प्रशासनिक अमल के बीच की खाई अक्सर सबसे बड़ी बाधा बनती है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल समझौते पर क्या सहमति बनी है?
23 जून को नई दिल्ली में हुई बैठक में दोनों राज्यों ने 1994 के मूल समझौते के आधार पर एक नया MoA करने पर सहमति जताई है। राजस्थान को उसके मूल आवंटन के अनुसार पानी पाइपलाइन के ज़रिए पहुँचाया जाएगा।
इस समझौते पर हस्ताक्षर कब और कहाँ होंगे?
जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के अनुसार अगले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर और आदान-प्रदान होगा। स्थान की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
राजस्थान को इस समझौते से क्या फायदा होगा?
राजस्थान को यमुना में उसका मूल जल हिस्सा मिलेगा, जिससे शेखावटी क्षेत्र में पेयजल संकट कम होगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। इसके अलावा मानसून के अतिरिक्त वर्षा जल को भी राजस्थान की दिशा में निर्देशित करने पर सहमति बनी है।
किशाऊ, लखवार और रेणुका बांध परियोजनाएँ क्या हैं और इनका क्या होगा?
ये तीनों बहुउद्देशीय बांध परियोजनाएँ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में प्रस्तावित हैं और वर्षों से लंबित हैं। बैठक में इन पर सहमति बनी है; इनके पूरा होने पर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तीनों को दीर्घकालिक जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
1994 का यमुना जल समझौता क्या था और अब क्यों बदला जा रहा है?
1994 में हुए समझौते के तहत यमुना नदी के जल का आवंटन हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों के बीच किया गया था। राजस्थान का आरोप रहा है कि उसे मूल आवंटन के अनुसार पानी नहीं मिला; नया समझौता इसी कमी को दूर करने और पाइपलाइन के ज़रिए जल वितरण सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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