यमुना जल समझौता 2025: हरियाणा-राजस्थान में सहमति, अगले सोमवार PM मोदी की मौजूदगी में होगा हस्ताक्षर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में 23 जून को नई दिल्ली में हुई बैठक में हरियाणा और राजस्थान के बीच तीन दशक पुराने यमुना जल समझौते को नई दिशा देने पर सहमति बन गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोनों इस बैठक में उपस्थित रहे। अगले सोमवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नए समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
मुख्य घटनाक्रम
जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बैठक के बाद बताया कि 1994 के मूल समझौते के तहत हरियाणा के अतिरिक्त पानी के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक में तय हुआ कि एक नया समझौता किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि राजस्थान को उसके मूल आवंटन के अनुसार पानी मिले। यह पानी पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान तक पहुँचाया जाएगा और दोनों राज्य इस व्यवस्था पर सहमत हो गए हैं।
पाटिल ने कहा कि आज के फैसले को अंतिम रूप दे दिया गया है और सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में समझौते का आदान-प्रदान किया जाएगा।
राज्यों की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बैठक में जल वितरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर 'विस्तृत एवं सकारात्मक चर्चा' हुई। उन्होंने कहा, 'हमारा प्रयास है कि संवाद और सहयोग की भावना के साथ जल संसाधनों के न्यायसंगत एवं प्रभावी प्रबंधन की दिशा में सार्थक समाधान सुनिश्चित किए जाएं।' सैनी ने यह भी बताया कि लखवार, किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं पर सहमति बन चुकी है, जिनसे राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के लोगों को लाभ होगा।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े विषयों पर भी सार्थक विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि यह परियोजना शेखावटी क्षेत्र को पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ किसानों की सिंचाई संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति भी करेगी।
ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व
गौरतलब है कि राजस्थान लंबे समय से यमुना के पानी में अपना हिस्सा माँग रहा था। 1994 के मूल फैसले को अब सभी संबंधित पक्षों के बीच बातचीत के ज़रिए आगे बढ़ाया गया है — यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय जल विवाद दशकों से अनसुलझे पड़े हैं। शर्मा ने बताया कि राजस्थान-मध्य प्रदेश, हरियाणा-राजस्थान, हिमाचल प्रदेश-उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड और हरियाणा-उत्तर प्रदेश-दिल्ली जैसे कई पुराने जल विवादों पर केंद्र की सक्रिय भूमिका से नई योजनाएं बनाई और लागू की जा रही हैं।
यह भी तय हुआ कि मानसून के दौरान बेकार बह जाने वाले वर्षा जल का उपयोग किया जाए और उसे राजस्थान की दिशा में निर्देशित किया जाए — जो जल प्रबंधन के नज़रिए से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आम जनता पर असर
इस समझौते के लागू होने पर राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र सहित कई हिस्सों में पेयजल संकट कम होने की उम्मीद है। किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा और लखवार, किशाऊ व रेणुका बांध परियोजनाओं के पूरा होने पर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तीनों राज्यों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा मिलेगी।
क्या होगा आगे
अब सभी की निगाहें अगले सोमवार होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी स्वयं उपस्थित रहेंगे। समझौते की शर्तों को अमलीजामा पहनाने और पाइपलाइन के माध्यम से जल वितरण की समयसीमा पर अभी विस्तृत ब्यौरा सामने आना बाकी है।