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यमुना जल समझौते पर राजस्थान में सियासी संग्राम, भजनलाल ने गहलोत-डोटासरा को दिया करारा जवाब

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यमुना जल समझौते पर राजस्थान में सियासी संग्राम, भजनलाल ने गहलोत-डोटासरा को दिया करारा जवाब

सारांश

यमुना जल समझौते पर राजस्थान में सियासत उबाल पर है। CM भजनलाल शर्मा ने गहलोत की 'पानी पहुँचाकर दिखाओ' चुनौती और डोटासरा के 'झूठे MoU' के आरोप को खारिज करते हुए कांग्रेस के पाँच साल के शासन पर पलटवार किया। शेखावाटी की प्यास और राजनीतिक श्रेय की जंग एक साथ जारी है।

मुख्य बातें

यमुना जल समझौते और किसाऊ बांध परियोजना को लेकर राजस्थान में BJP और कांग्रेस के बीच 25 जून 2026 को सियासी टकराव तेज हुआ।
पूर्व CM अशोक गहलोत ने जोधपुर में चुनौती दी कि यमुना का पानी नीम का थाना तक पहुँचे तो वे CM आवास जाकर बधाई देंगे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नवीनतम समझौते को 'झूठा समझौता ज्ञापन' बताया और क्रियान्वयन की समय-सीमा माँगी।
CM भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर पेपर लीक, बिजली संकट और जल परियोजनाओं में विफलता का आरोप लगाते हुए पलटवार किया।
सरकार का दावा — 26 ज़िलों के किसानों को दिन में बिजली मिलनी शुरू; 2027 तक पूरे राजस्थान को यह सुविधा देने की प्रतिबद्धता।

राजस्थान में यमुना जल समझौते को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच राजनीतिक टकराव 25 जून 2026 को और तीखा हो गया। विवाद का केंद्र यह है कि सूखाग्रस्त शेखावाटी क्षेत्र में यमुना का पानी पहुँचाने का श्रेय किस दल को मिलना चाहिए — और क्या हस्ताक्षरित समझौते ज़मीन पर कोई वास्तविक बदलाव ला पाएँगे।

मुख्य घटनाक्रम

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में बोलते हुए भाजपा सरकार को खुली चुनौती दी कि वह समझौता ज्ञापनों की बजाय वास्तविक जल आपूर्ति सुनिश्चित करके दिखाए। उन्होंने कहा, 'केवल बैठकों से पानी नहीं आएगा। पानी पहुँचाइए, और मैं स्वयं जाकर मुख्यमंत्री को बधाई दूँगा।' उन्होंने यहाँ तक कहा कि यदि यमुना का पानी वास्तव में नीम का थाना तक पहुँचता है, तो वे व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री आवास जाकर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नवीनतम समझौते को 'झूठा समझौता ज्ञापन' करार दिया। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान के हितों से समझौता किया गया है और शेखावाटी के लोगों को कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि असल पानी चाहिए। उन्होंने यह भी माँग की कि परियोजना के क्रियान्वयन की समय-सीमा और तरीके पर स्पष्टता दी जाए।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस नेताओं को समझौता ज्ञापन और अनुबंध ज्ञापन जैसी बुनियादी अवधारणाओं की भी समझ नहीं है। कांग्रेस की समझ और दूरदृष्टि अपूर्ण है, यही कारण है कि देश भर में पार्टी की छवि धूमिल हो गई है।'

शर्मा ने यमुना जल समझौते और किसाऊ बांध परियोजना का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की जल सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए जा रहे हैं और केंद्र सरकार के साथ निरंतर संपर्क के ज़रिए राजस्थान के हितों की रक्षा की जा रही है।

कांग्रेस के शासनकाल पर भाजपा के आरोप

मुख्यमंत्री शर्मा ने कांग्रेस को उसके पाँच वर्षीय शासनकाल का हिसाब देने की चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने राजस्थान को बिजली संकट में धकेला, परीक्षा पेपर लीक और भर्ती घोटालों के ज़रिए लाखों युवाओं का भविष्य अनिश्चितता में डाला और प्रमुख जल परियोजनाओं को पूरा करने में विफल रही।

उन्होंने दावा किया, 'हमारी सरकार के कार्यकाल में एक भी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है।' साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने 26 ज़िलों के किसानों को पहले ही दिन के समय बिजली देनी शुरू कर दी है और 2027 तक पूरे राजस्थान में यह सुविधा पहुँचाने की प्रतिबद्धता है।

आम जनता पर असर

शेखावाटी क्षेत्र — जिसमें सीकर, झुंझुनू और चुरू जिले शामिल हैं — दशकों से जल संकट से जूझ रहा है। यमुना जल समझौता इस क्षेत्र के लाखों निवासियों के लिए दीर्घकालीन उम्मीद का प्रतीक है। आलोचकों का कहना है कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और ज़मीन पर पानी पहुँचने के बीच की खाई अभी भी बनी हुई है।

क्या होगा आगे

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव से पहले जल और बिजली जैसे बुनियादी मुद्दे राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। गौरतलब है कि किसाऊ बांध परियोजना और यमुना जल बँटवारे का मसला हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के बीच दशकों पुराना विवाद है। भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार विकास और बुनियादी ढाँचे पर केंद्रित रहेगी और कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक भ्रम की संज्ञा दी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में। शेखावाटी की जनता दोनों दलों के वादों की कीमत दशकों से चुका रही है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में यमुना जल समझौता विवाद क्या है?
यह विवाद इस बात पर है कि सूखाग्रस्त शेखावाटी क्षेत्र में यमुना का पानी लाने का श्रेय किस दल को मिलना चाहिए। कांग्रेस ने नवीनतम समझौते को 'झूठा MoU' बताया है, जबकि भाजपा सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि करार दे रही है।
अशोक गहलोत ने CM भजनलाल को क्या चुनौती दी?
पूर्व CM अशोक गहलोत ने जोधपुर में कहा कि यदि यमुना का पानी वास्तव में नीम का थाना तक पहुँचता है, तो वे व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री आवास जाकर बधाई देंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 'केवल बैठकों से पानी नहीं आएगा।'
किसाऊ बांध परियोजना क्या है और इसका राजस्थान से क्या संबंध है?
किसाऊ बांध हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के बीच यमुना की सहायक नदी टोंस पर प्रस्तावित एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जो दशकों से लंबित है। CM भजनलाल शर्मा ने इसे यमुना जल समझौते के साथ राज्य की जल सुरक्षा के लिए अहम बताया है।
CM भजनलाल शर्मा ने बिजली को लेकर क्या दावा किया?
CM शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने 26 जिलों के किसानों को पहले ही दिन के समय बिजली देनी शुरू कर दी है और 2027 तक पूरे राजस्थान में यह सुविधा पहुँचाने की प्रतिबद्धता है। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर राज्य को बिजली संकट में धकेलने का आरोप लगाया।
शेखावाटी क्षेत्र के लिए यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
सीकर, झुंझुनू और चुरू जिलों से मिलकर बना शेखावाटी क्षेत्र दशकों से गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। यमुना जल समझौता इस क्षेत्र के लाखों निवासियों के लिए दीर्घकालीन राहत की उम्मीद है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि MoU और ज़मीन पर पानी पहुँचने के बीच की खाई अभी भी बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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