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यमुना जल समझौते पर अविनाश गहलोत का पलटवार: '32 साल पुराना सपना साकार, कांग्रेस का विरोध बेबुनियाद'

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यमुना जल समझौते पर अविनाश गहलोत का पलटवार: '32 साल पुराना सपना साकार, कांग्रेस का विरोध बेबुनियाद'

सारांश

32 साल के इंतजार के बाद यमुना जल समझौते पर एमओयू साइन हो चुका है — लेकिन सियासत थमी नहीं। कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने कांग्रेस के विरोध को 'बेबुनियाद' करार दिया और ₹34 हजार करोड़ की परियोजना को राजस्थान के तीन जिलों के लिए ऐतिहासिक सौगात बताया।

मुख्य बातें

कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने 4 जुलाई को जयपुर में यमुना जल समझौते पर कांग्रेस के विरोध को 'बेबुनियाद' करार दिया।
यमुना जल समझौते के तहत ₹34 हजार करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली है, जिससे राजस्थान के तीन जिलों को पानी मिलेगा।
मंत्री ने कहा कि यह सपना 32 साल पहले भैरो सिंह शेखावत ने देखा था, जो आज साकार हो रहा है।
राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार के सहयोग से एमओयू पर हस्ताक्षर किए और संयुक्त प्रेसवार्ता की।
अविनाश गहलोत ने दावा किया कि 75 लाख लोग मुख्यमंत्री को धन्यवाद दे रहे हैं और जनता में उत्साह का माहौल है।

राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने 4 जुलाई को जयपुर में यमुना जल समझौते पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ₹34 हजार करोड़ की इस परियोजना का स्वागत होना चाहिए, न कि राजनीतिक विरोध।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि यह समझौता 32 वर्षों के इंतजार का परिणाम है। उन्होंने याद दिलाया कि इस काम की नींव भैरो सिंह शेखावत ने रखी थी। उनके अनुसार, राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार के सहयोग से इस दिशा में संयुक्त प्रेसवार्ता की और एमओयू पर हस्ताक्षर किए — जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा, 'इससे पहले जो काम कभी नहीं हुआ था, वो आज हो रहा है। यमुना जल समझौते से राजस्थान के तीन जिलों को उनके हक का पानी मिलेगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा समय में 75 लाख लोग मुख्यमंत्री को धन्यवाद दे रहे हैं।

कांग्रेस पर सीधा हमला

अविनाश गहलोत ने कांग्रेस के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एक पुरानी आदत है — जब भी भाजपा सरकार कोई सकारात्मक काम करती है, तो उसे विरोध की नजर से देखा जाता है। उन्होंने अशोक गहलोत के उस पुराने बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि अगर भजनलाल सरकार यमुना का पानी राजस्थान लाई, तो वे माला पहनाने जाएंगे।

मंत्री ने कहा, 'अब हमने एमओयू साइन कर काम शुरू कर दिया है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से सवाल उठाना समझ से परे है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी कहा था कि अगर राजस्थान में उनकी सरकार आई, तो वे अपने हिस्से का पानी भी अपने लोगों को नहीं देंगे।

परियोजना का महत्व

यमुना जल समझौते के तहत ₹34 हजार करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली है। इस समझौते से राजस्थान के तीन जिलों को पेयजल और सिंचाई के लिए उनके हिस्से का पानी उपलब्ध होगा। अविनाश गहलोत ने इसे 'एक सैद्धांतिक सौगात' करार दिया और कहा कि इसका सभी को मिलकर स्वागत करना चाहिए।

गौरतलब है कि राजस्थान लंबे समय से पानी की किल्लत से जूझता रहा है और यमुना के पानी पर उसके दावे को लेकर दशकों से बातचीत चलती आई है। यह समझौता उस लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया का परिणाम बताया जा रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया और जनता का उत्साह

मंत्री के अनुसार, इस समझौते को लेकर आम जनता में उत्साह का माहौल है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता कांग्रेस को आगामी दिनों में 'माकूल जवाब' देगी। उनका यह भी कहना था कि जब तक कांग्रेस के पास कोई ठोस आधार नहीं है, तब तक उसे बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए।

क्या होगा आगे

एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद अब परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ₹34 हजार करोड़ की इस योजना के तहत राजस्थान के संबंधित जिलों में बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया जाएगा। आने वाले महीनों में इसकी प्रगति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एमओयू से जमीन तक पानी पहुँचने की समयसीमा और जवाबदेही का ढाँचा क्या है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के बयान परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता से ज्यादा एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप पर केंद्रित हैं — जो राजस्थान के प्यासे जिलों के लिए शुभ संकेत नहीं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यमुना जल समझौता राजस्थान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान के तीन जिलों को उनके हिस्से का पानी मिलेगा, जिसके लिए ₹34 हजार करोड़ की परियोजना को मंजूरी मिली है। राजस्थान दशकों से पानी की कमी से जूझ रहा है और यह समझौता उस दीर्घकालिक समस्या के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अविनाश गहलोत ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि कांग्रेस भाजपा के हर सकारात्मक कदम का विरोध करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कभी कहा था कि वे अपने हिस्से का पानी भी राजस्थान के लोगों को नहीं देंगे, इसलिए उनका अब विरोध करना बेबुनियाद है।
यमुना जल समझौते की शुरुआत कब और किसने की थी?
मंत्री अविनाश गहलोत के अनुसार, इस काम की नींव 32 साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत ने रखी थी। अब भजनलाल सरकार ने राजस्थान और हरियाणा के बीच एमओयू साइन कर इसे आगे बढ़ाया है।
इस परियोजना से राजस्थान के कितने जिलों को फायदा होगा?
यमुना जल समझौते से राजस्थान के तीन जिलों को पेयजल और सिंचाई के लिए उनके हक का पानी मिलेगा। परियोजना की कुल लागत ₹34 हजार करोड़ बताई गई है।
एमओयू साइन होने के बाद आगे क्या होगा?
एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आने वाले महीनों में संबंधित जिलों में बुनियादी ढाँचे के निर्माण का काम शुरू होने की उम्मीद है, हालाँकि सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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