महादेव सट्टा कांड: ईडी ने विकास गर्ग को किया गिरफ्तार, कोर्ट ने 24 जुलाई तक रिमांड मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से जुड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में विकास गर्ग को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। रायपुर के विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने उन्हें 24 जुलाई 2026 तक 10 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
गिरफ्तारी और रिमांड का घटनाक्रम
विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में गिरफ्तार किया गया। उन्हें पहले नई दिल्ली के विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ पारगमन रिमांड मंजूर हुई। इसके बाद 15 जुलाई को उन्हें रायपुर के विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसने 24 जुलाई तक की ईडी हिरासत स्वीकृत की।
जाँच की पृष्ठभूमि
यह जाँच छत्तीसगढ़ पुलिस, दुर्ग द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश व पश्चिम बंगाल की पुलिस द्वारा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्मों के संचालकों, प्रमोटरों और सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में दर्ज विभिन्न एफआईआर पर आधारित है। ईडी के अनुसार, यह सट्टेबाजी गिरोह विदेशों से संचालित फ्रेंचाइजी आधारित 'पैनल' नेटवर्क के ज़रिये काम करता था और अवैध सट्टेबाजी से प्रति माह ₹450 करोड़ से अधिक की अपराध-आय अर्जित कर रहा था।
मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल जाल
ईडी की जाँच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज से प्राप्त अपराध-आय को एक बहुस्तरीय संरचना के माध्यम से लॉन्ड्र किया गया। इसमें फर्जी संस्थाओं के जाल के ज़रिये नकद-बदली लेनदेन और दुबई, मॉरीशस व यूनाइटेड किंगडम में स्थित विदेशी संस्थाओं के माध्यम से क्यूआईपी, एफपीआई, एफडीआई और एफसीसीबी मार्गों से किए गए विदेशी निवेश शामिल थे।
जाँच एजेंसी के अनुसार, इन निवेशों को विकास गर्ग के स्वामित्व और नियंत्रण वाली सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में स्थानांतरित किया गया, ताकि दागी धन को वैध दिखाया जा सके।
₹940 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क
इस मामले में 5 जून 2026 को एक अंतरिम कुर्की आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनके स्वामित्व वाली संस्थाओं की चल व अचल संपत्तियाँ कुर्क की गई थीं। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग ₹940.77 करोड़ आँका गया है, जिनमें आवासीय संपत्तियाँ, भूमि, इक्विटी शेयर और अन्य प्रतिभूतियाँ शामिल हैं।
जाँच के दौरान भी छिपाने का प्रयास
ईडी ने आरोप लगाया है कि विकास गर्ग ने अपने खिलाफ जाँच जारी रहने के दौरान भी अपराध-आय को छिपाने और स्थानांतरित करने के प्रयास जारी रखे। यह मामला देश में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते नेटवर्क पर ईडी की बड़ी कार्रवाइयों की श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है।