पुरी रथ यात्रा विवाद: बीजद-कांग्रेस ने ओडिशा सरकार पर साधा निशाना, भाजपा ने आरोप नकारे
सारांश
मुख्य बातें
पुरी में विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान कथित कुप्रबंधन को लेकर 17 जुलाई 2026 को ओडिशा की राजनीति गरमा गई। मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजद) और ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए, जिन्हें भाजपा ने सिरे से खारिज कर दिया।
बीजद के आरोप: ताहिया विवाद और भीड़ प्रबंधन
बीजद की वरिष्ठ नेता प्रमिला मल्लिक ने आरोप लगाया कि पहंडी जुलूस के दौरान भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक ताहिया (पुष्पों से निर्मित पवित्र मुकुट) नहीं पहनाया गया, जो करोड़ों उड़िया भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। उन्होंने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी के इस स्पष्टीकरण को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया कि बारिश में भीगने के कारण ताहिया हटाना पड़ा।
मल्लिक ने सवाल उठाया कि यदि बारिश ही कारण था, तो भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के शिरोवस्त्र क्यों बरकरार रहे, केवल भगवान जगन्नाथ का ही ताहिया क्यों उतारा गया। उन्होंने माँग की कि राज्य सरकार करोड़ों जगन्नाथ भक्तों से इस चूक के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगे।
मारीचिकोटे हादसा: श्रद्धालु की मृत्यु और घायलों का आँकड़ा
बीजद ने पुरी के मारीचिकोटे में रथ यात्रा के दौरान अचानक भीड़ के कारण एक श्रद्धालु की मृत्यु पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पार्टी के अनुसार इस घटना में 362 लोग घायल हुए, जिनमें से 122 की स्थिति गंभीर बताई गई है। मल्लिक ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के बजाय वीआईपी सुरक्षा-व्यवस्था को प्राथमिकता दी, जो इन दुर्घटनाओं का मूल कारण रहा।
बीजद ने प्रत्येक मृतक श्रद्धालु के परिवार को ₹20 लाख के मुआवजे और सभी घायलों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क चिकित्सा उपचार की माँग की है।
कांग्रेस का हमला: तीन वर्षों की कथित लापरवाही
ओपीसीसी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार पिछले तीन वर्षों से भगवान जगन्नाथ के प्रबंधन में लगातार गंभीर लापरवाही बरत रही है, जिससे देवता की पवित्रता और गरिमा को बार-बार आघात पहुँचा है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने में विफल रही है।
भाजपा का पलटवार
सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष के सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया। पार्टी का कहना है कि रथ यात्रा का संचालन परंपराओं और नियमों के अनुसार हुआ और विपक्ष आस्था के विषय को राजनीतिक रंग दे रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा में भाजपा और बीजद के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि पुरी रथ यात्रा न केवल ओडिशा बल्कि विश्वभर के करोड़ों हिंदू भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र पर्व है। इस विवाद के बाद मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ेगा। विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए तो वे इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएँगे।