बड़ा फैसला: MP के गेहूं खरीदी लक्ष्य में 22 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी, CM यादव ने PM मोदी और शाह का जताया आभार
सारांश
Key Takeaways
- केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के गेहूं उपार्जन लक्ष्य में 22 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त बढ़ोतरी को मंजूरी दी।
- अब रबी विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश का कुल गेहूं खरीदी लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
- पहले 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित था, जो पिछले साल से 3 लाख MT अधिक था।
- CM मोहन यादव ने PM मोदी, अमित शाह, प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान का आभार जताया।
- इस वर्ष प्रदेश में गेहूं उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना हुआ है।
- जूट बोरों की कमी और वैश्विक निर्यात बाधाएं उपार्जन प्रक्रिया की प्रमुख चुनौतियां हैं।
भोपाल, 23 अप्रैल 2025 — मध्य प्रदेश के लाखों गेहूं उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। केंद्र सरकार ने राज्य के गेहूं उपार्जन लक्ष्य में 22 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त वृद्धि को मंजूरी दे दी है, जिससे रबी विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश का कुल गेहूं खरीदी लक्ष्य बढ़कर लगभग 100 लाख मीट्रिक टन हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
केंद्र सरकार की मंजूरी: क्या था पहले का लक्ष्य?
गौरतलब है कि भारत सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश को समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का प्रारंभिक लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया था। यह लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख मीट्रिक टन अधिक था, लेकिन इस वर्ष प्रदेश में गेहूं उत्पादन लगभग दोगुना हो जाने के कारण यह लक्ष्य अपर्याप्त साबित हो रहा था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव इस लक्ष्य में वृद्धि के लिए केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के साथ निरंतर संपर्क में थे। उनके प्रयासों के फलस्वरूप केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सहयोग से यह अतिरिक्त अनुमति प्राप्त हुई।
मुख्यमंत्री यादव का बयान और किसानों को आश्वासन
सीएम मोहन यादव ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान से अनुरोध करने पर राज्य को अतिरिक्त 22 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन की अनुमति मिली है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि क्रमशः सभी किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा और यदि आवश्यकता पड़ी तो उपार्जन की अंतिम तिथि भी बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने सोयाबीन के उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है।
बंपर उत्पादन और सामने आई चुनौतियां
इस वर्ष मध्य प्रदेश में गेहूं की फसल का बंपर उत्पादन हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है। इससे जहां किसानों को लाभ हुआ है, वहीं कई व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आई हैं।
वैश्विक स्तर पर गेहूं निर्यात को लेकर अनेक बाधाएं हैं। इसके अलावा उपार्जन प्रक्रिया में जूट के बोरों की उपलब्धता का संकट भी उभरकर सामने आया है, जो खरीदी की गति को प्रभावित कर सकता है।
गहन विश्लेषण: किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में शुमार हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में प्रदेश की गेहूं उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते उपार्जन न हो तो किसानों को खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर गेहूं बेचना पड़ सकता है, जिससे उनकी आय सीधे प्रभावित होती है। इस वर्ष गेहूं का MSP ₹2,275 प्रति क्विंटल निर्धारित है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो पंजाब और हरियाणा जैसे परंपरागत गेहूं उत्पादक राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश की खरीदी क्षमता और बुनियादी ढांचा अभी भी विकसित हो रहा है। जूट बोरों की कमी और भंडारण की सीमित क्षमता जैसी समस्याएं दीर्घकालिक नीतिगत ध्यान की मांग करती हैं।
आगामी दिनों में उपार्जन केंद्रों पर किसानों की भीड़ और खरीदी की गति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। यदि सरकार समय सीमा बढ़ाती है तो यह प्रदेश के कृषि प्रबंधन की एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।