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अशोक दीवान: 1975 हॉकी विश्व कप जिताने वाले गोलकीपर, जिन्होंने मॉन्ट्रियल ओलंपिक में भी दिखाया दम

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अशोक दीवान: 1975 हॉकी विश्व कप जिताने वाले गोलकीपर, जिन्होंने मॉन्ट्रियल ओलंपिक में भी दिखाया दम

सारांश

अशोक दीवान ने 1975 के हॉकी विश्व कप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ अपनी अभेद्य गोलकीपिंग से भारत को उसका एकमात्र विश्व खिताब दिलाया। 9 अगस्त 1954 को जन्मे इस गोलकीपर को 2002 में मेजर ध्यानचंद पुरस्कार से नवाजा गया। पचास साल बाद भी भारत वह खिताब दोबारा नहीं जीत सका।

मुख्य बातें

अशोक दीवान का जन्म 9 अगस्त 1954 को हुआ; वे भारत के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर्स में गिने जाते हैं।
1975 हॉकी विश्व कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उनकी गोलकीपिंग ने भारत को उसका इकलौता विश्व कप खिताब दिलाया।
1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक में Astroturf पर खेले मुकाबलों में भारत खाली हाथ लौटा; अभ्यास के दौरान अशोक के दो दाँत टूट गए थे।
2002 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया।
कोविड-19 के दौरान अमेरिका में फंसने और तबीयत बिगड़ने पर भारत सरकार ने उनके इलाज की व्यवस्था कराई।

भारतीय हॉकी के इतिहास में अशोक दीवान का नाम उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल है, जिन्होंने देश को उसका इकलौता हॉकी विश्व कप दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। 9 अगस्त 1954 को जन्मे अशोक दीवान को भारत के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर्स में गिना जाता है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी गोलकीपिंग से विरोधियों के हौसले पस्त किए।

हॉकी से लगाव और राष्ट्रीय टीम में एंट्री

बचपन से ही अशोक दीवान को हॉकी के प्रति गहरा लगाव था। घरेलू स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय हॉकी टीम में जगह मिली। उनकी चुस्त रिफ्लेक्स और गोल के सामने अडिग मौजूदगी ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और 1975 के विश्व कप के लिए उनका चयन हुआ।

1975 विश्व कप: इतिहास रचने का पल

1975 हॉकी विश्व कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ अशोक दीवान ने कई अहम बचाव कर भारत को पहली बार विश्व चैंपियन बनाया। यह भारतीय हॉकी का स्वर्णिम अध्याय था — और आज तक का इकलौता विश्व कप खिताब। गौरतलब है कि 1975 के बाद से भारतीय टीम दोबारा यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी नहीं जीत सकी है, जो इस उपलब्धि को और भी दुर्लभ बनाता है।

मॉन्ट्रियल ओलंपिक 1976: कृत्रिम मैदान की चुनौती

1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक में अशोक दीवान भारतीय दल का हिस्सा रहे, लेकिन यह अनुभव कड़वा साबित हुआ। इस ओलंपिक में पहली बार हॉकी के मुकाबले कृत्रिम घास (Astroturf) पर कराए गए, जिसके लिए भारतीय टीम पर्याप्त रूप से तैयार नहीं थी। अभ्यास के दौरान अशोक दीवान के दो दाँत भी टूट गए थे। गोल्ड मेडल की प्रबल दावेदार मानी जा रही भारतीय टीम को इस ओलंपिक से खाली हाथ लौटना पड़ा — यह भारतीय हॉकी के लिए एक ऐतिहासिक झटका था।

मेजर ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मान

भारतीय हॉकी में उनके योगदान को देखते हुए 2002 में भारत सरकार ने अशोक दीवान को प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया — जो खेल जगत में दिया जाने वाला एक सर्वोच्च लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान है।

कोविड संकट और सरकारी सहायता

कोविड-19 महामारी के दौरान अशोक दीवान अपने बेटे से मिलने अमेरिका गए थे, लेकिन वीजा प्रतिबंधों के कारण वहीं फंस गए। इसी दौरान उनकी तबीयत भी अचानक बिगड़ गई। उन्होंने भारत के खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ से मदद की अपील की, जिसके बाद भारत सरकार ने उनके इलाज की व्यवस्था कराई और वे स्वस्थ होने में सफल रहे। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि देश के लिए पदक और गौरव लाने वाले खिलाड़ियों को संकट की घड़ी में संस्थागत समर्थन की कितनी ज़रूरत होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय हॉकी के उस स्वर्णिम युग का प्रतीक है जो 1975 के बाद दोबारा नहीं लौटा। पाँच दशक बीत जाने के बाद भी भारत वह खिताब नहीं दोहरा सका — यह सवाल उठाता है कि क्या हमने उस पीढ़ी के खिलाड़ियों से सीखने की कोशिश की? कोविड के दौरान उनका विदेश में फंसना और सरकारी मदद के लिए गुहार लगाना यह भी दर्शाता है कि देश के लिए खेलने वालों के लिए संस्थागत सुरक्षा तंत्र अभी भी कमज़ोर है। Astroturf की चुनौती ने 1976 में भारतीय हॉकी को जो झटका दिया, वह आज भी खेल नीति निर्माताओं के लिए एक सबक है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक दीवान कौन हैं और उनकी हॉकी में क्या उपलब्धि है?
अशोक दीवान भारत के पूर्व हॉकी गोलकीपर हैं, जिन्होंने 1975 के हॉकी विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में शानदार प्रदर्शन कर भारत को उसका एकमात्र विश्व कप खिताब दिलाया। उन्हें 2002 में मेजर ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भारत ने 1975 हॉकी विश्व कप कैसे जीता?
1975 हॉकी विश्व कप के फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराया, जिसमें गोलकीपर अशोक दीवान ने कई महत्वपूर्ण बचाव किए। यह भारत का पहला और अब तक का इकलौता हॉकी विश्व कप खिताब है।
1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन क्यों खराब रहा?
1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक में पहली बार हॉकी के मुकाबले कृत्रिम घास (Astroturf) पर कराए गए, जिस पर खेलने का भारतीय टीम को पर्याप्त अनुभव नहीं था। इस कारण गोल्ड मेडल की दावेदार मानी जा रही भारतीय टीम खाली हाथ लौटी।
मेजर ध्यानचंद पुरस्कार क्या है और अशोक दीवान को यह कब मिला?
मेजर ध्यानचंद पुरस्कार भारत सरकार द्वारा खेलों में आजीवन योगदान के लिए दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित सम्मान है। अशोक दीवान को यह पुरस्कार 2002 में उनके उत्कृष्ट हॉकी करियर के लिए प्रदान किया गया।
कोविड-19 के दौरान अशोक दीवान के साथ क्या हुआ था?
कोविड-19 महामारी के दौरान अशोक दीवान अपने बेटे से मिलने अमेरिका गए थे, जहाँ वीजा प्रतिबंधों के कारण फंस गए और उनकी तबीयत भी बिगड़ गई। उन्होंने खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ से मदद माँगी, जिसके बाद भारत सरकार ने उनके इलाज की व्यवस्था कराई और वे स्वस्थ हुए।
राष्ट्र प्रेस
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