एड्रियन डिसूजा: भारतीय हॉकी के साहसी गोलकीपर जिन्होंने अजलान कप में स्वर्ण पदक दिलाया
सारांश
Key Takeaways
- एड्रियन डिसूजा भारतीय हॉकी के सफलतम गोलकीपर में से एक हैं।
- उन्होंने 2004 में अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया।
- 2007 के एशिया कप में स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- अजलान कप में स्वर्ण पदक जीतने वाले गोलकीपर।
- रशिंग तकनीक के लिए प्रसिद्ध।
नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एड्रियन डिसूजा को भारतीय हॉकी के साहसी गोलकीपरों में माना जाता है। उन्होंने भारतीय टीम के लिए 2004 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया। वह 2004 के एथेंस ओलंपिक और 2006 में हुए विश्व कप में भारतीय टीम का अभिन्न हिस्सा रहे।
एड्रियन डिसूजा ने भारत के लिए 100 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया और अपनी असाधारण गोलकीपिंग क्षमताओं के कारण भारत को कई मैचों में जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म 24 मार्च 1984 को मुंबई के मलाड में हुआ। शुरू से ही हॉकी के प्रति उनकी गहरी रुचि थी, और जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, उनका लगाव भी बढ़ता गया। हालांकि, उनके लिए यह राह आसान नहीं थी, क्योंकि उस समय हॉकी में सुविधाओं की कमी थी। क्रिकेट की तुलना में हॉकी को कम महत्व दिया जाता था, जिससे आगे बढ़ना कठिन हो गया। इसके बावजूद, उन्होंने मेहनत जारी रखी और स्थानीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से अपनी पहचान बनाई।
एड्रियन 2004 के एथेंस ओलंपिक में भारतीय टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। उसी वर्ष उन्हें प्लेयर ऑफ द ईयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इसके बाद, 2006 के विश्व कप में भी उन्होंने अपनी खेल प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। 2007 के एशिया कप में, एड्रियन ने भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई, जहां उन्होंने कई गोलों का शानदार बचाव किया।
2009 में, सुलतान अजलान शाह कप में भी उन्होंने गोलपोस्ट के सामने मजबूती से खड़े रहकर देश को स्वर्ण पदक दिलाया। वह 2007 में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे। 2006 में, एड्रियन डिसूजा को राज्य सरकार द्वारा छत्रपति शिवाजी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
हॉकी में एड्रियन डिसूजा को 'रशिंग तकनीक' को लोकप्रिय बनाने के लिए भी जाना जाता है, जो एक आक्रामक तकनीक है, जिसमें खिलाड़ी तेजी से रक्षात्मक क्षेत्र से बाहर निकलकर विरोधी के गोल क्षेत्र पर हमला करते हैं। हालांकि, 2012 में डोपिंग विवाद में फंसने के कारण उनकी भारतीय टीम में वापसी नहीं हो सकी। डोपिंग विवाद के कारण उन पर एक साल का बैन लगा था, लेकिन उनकी अपील के बाद इस बैन को घटाकर तीन महीने कर दिया गया था।