हॉकी के सितारे गुरजंत सिंह ने अंतरराष्ट्रीय खेल से लिया विदाई, ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता
सारांश
Key Takeaways
- गुरजंत सिंह ने 130 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 33 गोल किए।
- उन्होंने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में कांस्य पदक जीते।
- गुरजंत ने 2016 में जूनियर विश्व कप जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उन्हें 2021 में अर्जुन पुरस्कार मिला।
- गुरजंत का सफर हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
नई दिल्ली, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के फॉरवर्ड गुरजंत सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित हॉकी इंडिया पुरस्कार समारोह में अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास की घोषणा की। 31 साल के इस स्टार ने भारतीय टीम के लिए 130 मैचों में 33 गोल किए।
26 जनवरी 1995 को अमृतसर के खैलारा में जन्मे गुरजंत ने बचपन से ही हॉकी के प्रति गहरा लगाव रखा। इस खेल में उत्कृष्टता पाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने 2016 में लखनऊ में फाइनल में गोल करते हुए भारत की जूनियर विश्व कप जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2017 में उन्होंने सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियां ओलंपिक मंच पर सामने आईं, जहां वे टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 में कांस्य पदक जीतने वाली टीमों का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। ओलंपिक के अलावा, गुरजंत ने भारत को 2022 के हांगझोऊ एशियाई खेलों में स्वर्ण, 2017 एशिया कप में स्वर्ण और कई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी खिताब जीतने में सहायता की। 2021 में, उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारत के सर्वोच्च खेल सम्मानों में से एक है।
अपने संन्यास की घोषणा करते हुए गुरजंत ने कहा, "आज मैं गर्व और गहरी भावनाओं के साथ अपने संन्यास की घोषणा करता हूं। मैंने अपनी हॉकी यात्रा की शुरुआत इस कमरे में बैठे अपने सीनियर खिलाड़ियों को आदर्श मानकर की थी, और उनके साथ भारत के लिए खेलने का सपना पूरा करना मेरे लिए एक अनमोल याद है जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा।"
उन्होंने कहा, "भारतीय हॉकी के ऐतिहासिक पुनरुद्धार का हिस्सा बनकर और दो ओलंपिक पदक हासिल करके मुझे बेहद संतोष है। ट्रॉफियों से बढ़कर, सबसे बड़ी याद जो मैं अपने साथ ले जा रहा हूं, वह है अपने साथियों के साथ बिताया गया समय। हम एक परिवार की तरह रहे, और हर उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का साथ दिया। मैं हॉकी इंडिया का धन्यवाद करना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे इतनी सम्मानजनक विदाई दी। मैं अंतरराष्ट्रीय मंच से एक बहुत ही खुश और गर्वित इंसान के तौर पर विदा ले रहा हूं।"
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, "गुरजंत सिंह लगभग एक दशक से भारत की हॉकी कहानी का एक अहम हिस्सा रहे हैं। उनकी रफ्तार, उनकी ऊर्जा और बड़े मौकों पर गोल करने की क्षमता ने उन्हें एक ऐसा खिलाड़ी बनाया जिससे विरोधी हमेशा डरते थे। उन्होंने गर्व के साथ अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय हॉकी को उन्होंने जो कुछ भी दिया है, उसके लिए हम उनका धन्यवाद करते हैं।"
हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने कहा, "पंजाब के खेतों से लेकर दो ओलंपिक पोडियम तक का गुरजंत का सफर इस देश के हर युवा खिलाड़ी के लिए एक प्रेरणा है। इतने सालों तक उनका समर्पण उनके चरित्र का प्रमाण है। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।"