मनप्रीत सिंह: सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले भारतीय हॉकी खिलाड़ी, कप्तानी में दिलाया 41 साल बाद ओलंपिक पदक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय हॉकी के स्टार मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में वे मुकाम हासिल किए हैं, जिनका सपना हर हॉकी खिलाड़ी देखता है। उनकी कप्तानी में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक 2020 (आयोजित 2021) में 41 साल के लंबे इंतज़ार को खत्म करते हुए ओलंपिक पदक जीता — यह उपलब्धि 1980 के बाद पहली बार भारत की झोली में आई।
प्रारंभिक जीवन और हॉकी की शुरुआत
मनप्रीत सिंह का जन्म 26 जून 1992 को पंजाब के जालंधर के निकट मीठापुर गाँव में हुआ। उनके बड़े भाई पहले से हॉकी खेलते थे, जिससे इस खेल के प्रति उनका लगाव बचपन से ही गहरा हो गया। हालाँकि, उनकी माँ हॉकी को एक जोखिम भरा खेल मानती थीं और शुरुआत में इसमें करियर बनाने की अनुमति देने को तैयार नहीं थीं।
अपनी अदम्य जिद, लगन और कठोर परिश्रम से मनप्रीत ने परिवार का भरोसा जीता। इसके बाद उनके परिजनों ने उनका दाखिला जालंधर की प्रतिष्ठित सुरजीत हॉकी अकादमी में कराया और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अंतरराष्ट्रीय करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ
घरेलू हॉकी में अपनी धाक जमाने के बाद मनप्रीत ने राष्ट्रीय जर्सी पहनकर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 2014 एशियाई खेलों में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में उनकी भूमिका अहम रही। 2017 एशिया कप में भी उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा।
2023 और 2024 में आयोजित एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भी मनप्रीत ने अपने दमदार खेल से भारतीय टीम को शानदार जीत दिलाई। वह भारत की ओर से सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं — उन्होंने भारत के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी दिलीप टर्की के 412 मैचों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
टोक्यो ओलंपिक: ऐतिहासिक कांस्य पदक
मनप्रीत के करियर की सर्वोच्च और सबसे ऐतिहासिक उपलब्धि 2021 में आई। टोक्यो ओलंपिक 2020 में उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 41 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ओलंपिक पदक जीता। टीम ने कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रचा — 1980 मॉस्को ओलंपिक के बाद यह भारत का पहला ओलंपिक हॉकी पदक था। यह जीत पूरे देश के लिए एक भावनात्मक क्षण था।
पुरस्कार और सम्मान
2019 में अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) ने मनप्रीत को 'प्लेयर ऑफ द ईयर' चुना — यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय खिलाड़ी बने। हॉकी में उनके असाधारण योगदान के लिए 2018 में उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाज़ा गया। 2021 में उन्हें भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
आगे का सफर
मनप्रीत सिंह का करियर भारतीय हॉकी की नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुका है। रिकॉर्ड मैचों के साथ मैदान पर उनकी निरंतरता और नेतृत्व क्षमता यह साबित करती है कि भारतीय हॉकी का भविष्य उज्ज्वल है।