मनप्रीत सिंह ने रॉटरडैम में दिलीप टिर्की के 412 अंतरराष्ट्रीय मैच के रिकॉर्ड की बराबरी की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने 14 जून 2025 को रॉटरडैम में नीदरलैंड के खिलाफ खेले गए मुकाबले में भारत के 412 अंतरराष्ट्रीय मैच के राष्ट्रीय रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। यह रिकॉर्ड पूर्व कप्तान और मौजूदा हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप टिर्की के नाम था, जिसे मनप्रीत ने अपने करियर की एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में बराबर किया।
एलीट क्लब में इकलौते सक्रिय खिलाड़ी
33 वर्षीय मनप्रीत सिंह अब उन खिलाड़ियों के विशिष्ट वर्ग में शामिल हैं जिन्होंने 400 से अधिक सीनियर अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। खास बात यह है कि इस एलीट क्लब में वे एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जो अभी भी सक्रिय रूप से अंतरराष्ट्रीय हॉकी खेल रहे हैं — यह उनकी अदम्य फिटनेस, निरंतरता और समर्पण का प्रमाण है।
दिलीप टिर्की ने दी बधाई
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने मनप्रीत को इस मील के पत्थर पर बधाई देते हुए कहा, 'मैं मनप्रीत को इस अहम पड़ाव तक पहुँचने पर बधाई देता हूँ। यह एक शानदार कामयाबी है और सालों से उनके समर्पण, प्रतिबद्धता और निरंतरता को दिखाता है। मैं उन्हें आगे के मैचों के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि वह कई और मौकों पर खेलते दिखेंगे। हम इंडियन हॉकी में उनके लगातार योगदान के लिए आभारी हैं।'
हॉकी इंडिया की प्रतिक्रिया
हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल भोला नाथ सिंह ने भी मनप्रीत की उपलब्धि को सराहा। उन्होंने कहा, '412 अंतरराष्ट्रीय मैच तक पहुँचना एक शानदार कामयाबी है। यह इस बात का सबूत है कि उन्होंने इतने सालों में देश का सबसे ऊँचे स्तर पर प्रतिनिधित्व करते हुए निरंतरता दिखाई है।' उन्होंने यह भी कहा कि मनप्रीत ने वैश्विक मंच पर भारत की वापसी में अहम भूमिका निभाई है और उनकी नेतृत्व क्षमता देश भर के उभरते हॉकी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
एक दशक की शानदार यात्रा
मनप्रीत सिंह पिछले एक दशक में भारतीय हॉकी की तरक्की के केंद्र में रहे हैं। उन्होंने कई ओलंपिक खेलों, विश्व कप, एशियन गेम्स और चैंपियंस ट्रॉफी अभियानों में भाग लिया है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम का अभिन्न हिस्सा होना शामिल है — जो भारतीय हॉकी के पुनरुत्थान का प्रतीक बना। गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब भारतीय हॉकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को और मज़बूत करने में जुटी है।
आगे क्या
मनप्रीत सिंह के पास अब अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने और भारतीय हॉकी इतिहास में सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले एकमात्र खिलाड़ी बनने का मौका है। उनकी निरंतर उपस्थिति और प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि वे इस रिकॉर्ड को और आगे ले जाने में सक्षम हैं।