एफआईएच प्रो लीग 2025-26: भारत ने वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को 3-1 से रौंदा, मनप्रीत ने तोड़ा दिलीप टिर्की का रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
एफआईएच हॉकी प्रो लीग 2025-26 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 18 जून को रॉटरडैम में वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को 3-1 से पराजित कर शानदार जीत दर्ज की। मनदीप सिंह, शिलानंद लाकड़ा और नीलकांत शर्मा के गोलों से सजी इस जीत में भारत ने शुरू से अंत तक मैच पर अपना दबदबा बनाए रखा।
मैच का घटनाक्रम
भारत ने पजेशन कंट्रोल के साथ मैच की आक्रामक शुरुआत की। 7वें मिनट में मनदीप सिंह ने गोल के सामने एक तेज़ टर्न से नेट हिलाकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद 13वें मिनट में शिलानंद लाकड़ा ने जर्मन गोलकीपर अलेक्जेंडर स्टैडलर को छकाते हुए शानदार स्ट्राइक से स्कोर 2-0 कर दिया।
दूसरे क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी की कोशिश की और 24वें व 27वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन अमित रोहिदास और गोलकीपर मोहित ने दोनों अवसर नाकाम कर दिए। हाफटाइम तक भारत 2-0 से आगे था।
35वें मिनट में नीलकांत शर्मा ने जर्मन डिफेंडरों को चकमा देते हुए एकल प्रयास में गोल दागकर भारत की बढ़त 3-0 कर दी। तीसरे क्वार्टर के अंतिम 20 सेकंड में राफेल हार्टकोफ ने 45वें मिनट में जर्मनी के लिए एकमात्र गोल किया और स्कोर 3-1 हुआ।
अंतिम क्वार्टर में जर्मनी ने रफ्तार बढ़ाई और 59वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर भी जीता, लेकिन भारतीय बैकलाइन ने हर अटैक को नाकाम करते हुए 3-1 की जीत सुनिश्चित की।
हार्दिक सिंह बने 'प्लेयर ऑफ द मैच'
मिडफील्डर हार्दिक सिंह को मिडफील्ड से खेल को नियंत्रित करने के उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। भारत ने काउंटर-प्रेस और विंग्स से आक्रमण की रणनीति अपनाकर जर्मनी को पूरे मैच में दबाव में रखा।
मनप्रीत सिंह का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
इस मैच में मनप्रीत सिंह ने भारत की ओर से सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप टिर्की के 412 मैचों के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए अपना 413वाँ अंतरराष्ट्रीय मैच खेला।
पुरुष हॉकी की ऑल-टाइम इंटरनेशनल कैप सूची में मनप्रीत अब बेल्जियम के जॉन-जॉन डोहमेन (481), नीदरलैंड्स के ट्यून डी नूइजर (453), ऑस्ट्रेलिया के एडी ओकेनडेन (451) और ग्रेट ब्रिटेन के बैरी मिडलटन (432) के बाद पाँचवें स्थान पर आ गए हैं।
आगे क्या
यह जीत एफआईएच प्रो लीग में भारत की स्थिति को और मजबूत करती है। वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी जैसी टीम को एकतरफा अंदाज़ में हराना भारतीय हॉकी के बढ़ते आत्मविश्वास और रणनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है। आने वाले मैचों में भारत इसी लय को बरकरार रखने की कोशिश करेगा।