मनप्रीत सिंह बोले — हॉकी विश्व कप में पदक जीते बहुत समय हुआ, अब हासिल करना ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और देश के लिए सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड रखने वाले अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने 18 जून 2026 को कहा कि भारतीय हॉकी टीम आगामी विश्व कप में पदक जीतने में सक्षम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शीर्ष अंतरराष्ट्रीय टीमों के खिलाफ हालिया प्रदर्शन ने टीम का आत्मविश्वास उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।
विश्व कप को लेकर उम्मीद और उत्साह
मनप्रीत ने मीडिया से बातचीत में कहा, "हम वर्ल्ड कप और एशियन गेम्स को लेकर बहुत उत्साहित हैं। टीम का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है। मुझे निजी तौर पर बहुत उम्मीद है कि हम विश्व कप में बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व कप में पदक जीते हुए काफी लंबा अरसा बीत चुका है और अब इसे हासिल करना बेहद ज़रूरी है।
जर्मनी पर जीत से बढ़ा हौसला
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एफआईएच हॉकी प्रो लीग 2025-26 के रॉटरडैम लेग में विश्व चैंपियन जर्मनी को 3-1 से हराया। मनदीप सिंह (7वें मिनट), शिलानंद लाकड़ा (13वें मिनट) और नीलकांत शर्मा (35वें मिनट) के गोलों से यह जीत दर्ज की गई। मनप्रीत ने कहा, "जर्मनी के खिलाफ हमारा पिछला मैच बहुत अच्छा था। हम नीदरलैंड के खिलाफ पहला मैच हार गए थे, लेकिन कुल मिलाकर टीम का प्रदर्शन अच्छा था।"
प्रो लीग — विश्व कप तैयारी की कसौटी
मनप्रीत ने बताया कि आगामी प्रो लीग मुकाबले, खासकर इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ, टीम के लिए विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि ये दोनों टीमें विश्व कप ग्रुप में भी भारत के साथ हैं। उन्होंने कहा, "ये तीनों टूर्नामेंट हमारे लिए बहुत ज़रूरी हैं। प्रो लीग में इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ खेलना खुद को तैयार करने का एक अच्छा मौका होगा।"
एशियन गेम्स — ओलंपिक क्वालिफिकेशन दांव पर
33 वर्षीय मनप्रीत ने एशियन गेम्स को भी उतनी ही अहमियत दी। उन्होंने कहा, "एशियन गेम्स बहुत ज़रूरी हैं क्योंकि वहाँ ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन दांव पर लगा है।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय हॉकी टीम एक साथ कई बड़े लक्ष्यों की तैयारी में जुटी है।
रिकॉर्ड और वैश्विक पहचान
मनप्रीत सिंह अब तक 413 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं और भारत की ओर से सर्वाधिक मुकाबले खेलने वाले खिलाड़ी हैं। वैश्विक स्तर पर वे पाँचवें स्थान पर हैं — उनसे आगे बेल्जियम के जॉन-जॉन डोहमेन (481), नीदरलैंड के ट्यून डी नूइजर (453), ऑस्ट्रेलिया के एडी ओकेनडेन (451) और ग्रेट ब्रिटेन के बैरी मिडलटन (432) हैं। उनका यह अनुभव और नेतृत्व क्षमता टीम के लिए बड़ी संपत्ति है — और उनके शब्दों में, अब सिर्फ प्रदर्शन नहीं, पदक चाहिए।