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पंजाब बिजली संकट पर वड़िंग का AAP पर हमला: 12-18 घंटे कटौती के लिए कुप्रबंधन ज़िम्मेदार

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पंजाब बिजली संकट पर वड़िंग का AAP पर हमला: 12-18 घंटे कटौती के लिए कुप्रबंधन ज़िम्मेदार

सारांश

कांग्रेस नेता राजा वड़िंग ने पंजाब में 12-18 घंटे की बिजली कटौती के लिए AAP सरकार को जिम्मेदार ठहराया — PSPCL में अनुभवहीन चेयरमैन, ₹8.10/यूनिट महँगी खरीद, ₹7,000 करोड़ सब्सिडी का अंतर और ₹150 करोड़ कमीशन के गंभीर आरोप। यह पंजाब के हालिया इतिहास का सबसे बड़ा बिजली संकट बताया जा रहा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस/INC के पंजाब प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने AAP सरकार पर पंजाब के हालिया इतिहास का सबसे बड़ा बिजली संकट पैदा करने का आरोप लगाया।
किसान, छात्र और उद्योग जगत 12 से 18 घंटे तक की बिजली कटौती झेलने पर मजबूर हुए।
PSPCL का चेयरमैन गैर-तकनीकी और अनुभवहीन बताया; कथित तौर पर 300 दिनों में केवल 25-30 दिन कार्यालय में उपस्थित रहा।
बिजली खरीद दर ₹4-5/यूनिट से बढ़कर ₹8.10/यूनिट हुई; निजी बिचौलिए को ₹150 करोड़ कमीशन का आरोप।
PSPCL को ₹22,000 करोड़ की जगह केवल ₹15,000 करोड़ सब्सिडी मिली; ₹10,000 करोड़ का कर्ज़ लेना पड़ा।
बाढ़-क्षतिग्रस्त UBDC हाइड्रो पावर परियोजना अब भी पूरी क्षमता पर चालू नहीं।

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (कांग्रेस/INC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 20 सितंबर 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा कि उसकी अक्षमता, कुप्रबंधन और कथित भ्रष्टाचार के कारण पंजाब के हालिया इतिहास में पहली बार इतना गंभीर बिजली संकट उत्पन्न हुआ। उनके आरोपों के अनुसार, किसान, छात्र और उद्योग जगत 12 से 18 घंटे तक की बिजली कटौती झेलने पर मजबूर हुए।

मुख्य आरोप: कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का गठजोड़

'वॉरिंग विद वॉरियर्स' कार्यक्रम के सातवें सत्र में लाइव बातचीत के दौरान वड़िंग ने दावा किया कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को दिल्ली से पंजाब तक फैले कथित 'भ्रष्ट लोगों के गठजोड़' ने कमाई का ज़रिया बना दिया है। उन्होंने कहा कि AAP सरकार ने एक गैर-तकनीकी और अनुभवहीन नौकरशाह को PSPCL का चेयरमैन नियुक्त किया, जिसने अपने लगभग 300 दिनों के कार्यकाल में मात्र 25-30 दिन ही कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराई।

वड़िंग के अनुसार, परंपरागत रूप से इस पद पर कम से कम 25 वर्षों के तकनीकी अनुभव वाले विशेषज्ञ की नियुक्ति होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि PSPCL करीब छह महीने तक डायरेक्टर (जनरेशन) के बिना चला।

हरजीत सिंह प्रकरण और पात्रता में ढील

वड़िंग ने आरोप लगाया कि तत्कालीन डायरेक्टर हरजीत सिंह को कथित तौर पर सरकार के अवैध निर्देश न मानने पर विजिलेंस के ज़रिए प्रताड़ित किया गया। बाद में जिस अधिकारी को नियुक्त किया गया, उसके लिए पात्रता मानदंड में विशेष ढील दी गई — यह आरोप उन्होंने कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से लगाया। गौरतलब है कि PSPCL राज्य की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य स्तंभ है और इसके नेतृत्व में कोई भी खामी सीधे उपभोक्ताओं को प्रभावित करती है।

बिजली खरीद में महँगाई और सब्सिडी का अंतर

वड़िंग ने दावा किया कि सरकार ने गर्मियों से पहले बिजली खरीद की कोई अग्रिम योजना नहीं बनाई। उनके अनुसार, PSPCL पहले जहाँ ₹4-5 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदता था, वहीं अब निजी व्यापारियों से ₹8.10 प्रति यूनिट की दर पर खरीद की जा रही है — यानी लागत लगभग दोगुनी।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत PSPCL को ₹22,000 करोड़ की सब्सिडी देनी थी, लेकिन केवल ₹15,000 करोड़ ही जारी किए गए। इस ₹7,000 करोड़ के अंतर को कथित तौर पर 'लाभ' बताया गया, जबकि वास्तव में PSPCL को ₹10,000 करोड़ का कर्ज़ लेना पड़ा और इस कर्ज़ के लिए एक निजी बिचौलिए को ₹150 करोड़ कमीशन दिया गया।

कोयला संकट का खंडन, असली वजह बताई

मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा बिजली संकट के लिए कोयले की कमी को जिम्मेदार ठहराए जाने पर वड़िंग ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पंजाब के पास अपनी कैप्टिव कोयला खदानें हैं, इसलिए संकट कोयले की कमी से नहीं, बल्कि लेहरा मोहब्बत और रोपड़ थर्मल प्लांटों में अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बिजली उत्पादन घटने से पैदा हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में गर्मियों की माँग पहले से चरम पर थी।

UBDC हाइड्रो परियोजना की स्थिति

वड़िंग ने यह भी कहा कि पिछले साल बाढ़ से क्षतिग्रस्त UBDC हाइड्रो पावर परियोजना अब तक पूरी क्षमता से चालू नहीं हो पाई है, जिसके कारण राज्य की समग्र बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित बनी हुई है। यह स्थिति संकट को और गहरा करती है। आलोचकों का कहना है कि AAP सरकार को इस परियोजना की बहाली को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।

वड़िंग के इन आरोपों पर AAP सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र या जन-प्रदर्शनों के ज़रिए यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹150 करोड़ कमीशन और 300 दिनों में 25-30 दिन की उपस्थिति जैसे दावे सत्यापन की माँग करते हैं, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है। यह ऐसे समय में आया है जब AAP पंजाब में 'बिजली माफ़ी' को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताती रही है — यदि खरीद लागत वास्तव में दोगुनी हुई है, तो यह राज्य के वित्त पर गंभीर सवाल खड़े करता है। UBDC परियोजना की बहाली में देरी और PSPCL का कर्ज़ भार — ये संरचनात्मक विफलताएँ हैं जो किसी एक बयानबाज़ी से परे हैं। असली जवाबदेही तब होगी जब विधानसभा में आँकड़ों की स्वतंत्र जाँच हो।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में बिजली संकट का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
कांग्रेस नेता राजा वड़िंग के अनुसार, संकट का मुख्य कारण कोयले की कमी नहीं, बल्कि लेहरा मोहब्बत और रोपड़ थर्मल प्लांटों में अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल, PSPCL में कुप्रबंधन और अग्रिम बिजली खरीद योजना का अभाव है। इसके अलावा UBDC हाइड्रो पावर परियोजना का बाढ़ के बाद पूरी क्षमता से न चलना भी एक बड़ा कारण बताया गया है।
PSPCL में कथित भ्रष्टाचार के क्या आरोप लगाए गए हैं?
वड़िंग ने आरोप लगाया कि PSPCL को ₹10,000 करोड़ का कर्ज़ लेना पड़ा और इसके लिए एक निजी बिचौलिए को ₹150 करोड़ कमीशन दिया गया। साथ ही ₹22,000 करोड़ की जगह केवल ₹15,000 करोड़ सब्सिडी दी गई और ₹7,000 करोड़ के काल्पनिक लाभ का दावा किया गया।
पंजाब में बिजली कटौती से कौन-कौन प्रभावित हुए?
वड़िंग के बयान के अनुसार, 12 से 18 घंटे तक की बिजली कटौती से किसान, छात्र और उद्योग जगत सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। राज्य की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था में बिजली कटौती सिंचाई और उत्पादन दोनों को प्रभावित करती है।
PSPCL के चेयरमैन की नियुक्ति पर क्या विवाद है?
वड़िंग का आरोप है कि AAP सरकार ने एक गैर-तकनीकी और अनुभवहीन नौकरशाह को PSPCL का चेयरमैन बनाया, जिसने करीब 300 दिनों के कार्यकाल में केवल 25-30 दिन कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराई। परंपरागत रूप से इस पद पर कम से कम 25 वर्ष के तकनीकी अनुभव वाले विशेषज्ञ की नियुक्ति होती है।
AAP सरकार ने बिजली संकट पर क्या कहा है?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बिजली संकट के लिए कोयले की कमी को ज़िम्मेदार ठहराया था, जिसे वड़िंग ने सिरे से खारिज किया। AAP सरकार ने वड़िंग के विशिष्ट आरोपों — जैसे बिचौलिए को कमीशन और सब्सिडी के अंतर — पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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