पंजाब बिजली संकट पर वड़िंग का AAP पर हमला: 12-18 घंटे कटौती के लिए कुप्रबंधन ज़िम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (कांग्रेस/INC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने 20 सितंबर 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा कि उसकी अक्षमता, कुप्रबंधन और कथित भ्रष्टाचार के कारण पंजाब के हालिया इतिहास में पहली बार इतना गंभीर बिजली संकट उत्पन्न हुआ। उनके आरोपों के अनुसार, किसान, छात्र और उद्योग जगत 12 से 18 घंटे तक की बिजली कटौती झेलने पर मजबूर हुए।
मुख्य आरोप: कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का गठजोड़
'वॉरिंग विद वॉरियर्स' कार्यक्रम के सातवें सत्र में लाइव बातचीत के दौरान वड़िंग ने दावा किया कि पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को दिल्ली से पंजाब तक फैले कथित 'भ्रष्ट लोगों के गठजोड़' ने कमाई का ज़रिया बना दिया है। उन्होंने कहा कि AAP सरकार ने एक गैर-तकनीकी और अनुभवहीन नौकरशाह को PSPCL का चेयरमैन नियुक्त किया, जिसने अपने लगभग 300 दिनों के कार्यकाल में मात्र 25-30 दिन ही कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराई।
वड़िंग के अनुसार, परंपरागत रूप से इस पद पर कम से कम 25 वर्षों के तकनीकी अनुभव वाले विशेषज्ञ की नियुक्ति होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि PSPCL करीब छह महीने तक डायरेक्टर (जनरेशन) के बिना चला।
हरजीत सिंह प्रकरण और पात्रता में ढील
वड़िंग ने आरोप लगाया कि तत्कालीन डायरेक्टर हरजीत सिंह को कथित तौर पर सरकार के अवैध निर्देश न मानने पर विजिलेंस के ज़रिए प्रताड़ित किया गया। बाद में जिस अधिकारी को नियुक्त किया गया, उसके लिए पात्रता मानदंड में विशेष ढील दी गई — यह आरोप उन्होंने कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से लगाया। गौरतलब है कि PSPCL राज्य की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य स्तंभ है और इसके नेतृत्व में कोई भी खामी सीधे उपभोक्ताओं को प्रभावित करती है।
बिजली खरीद में महँगाई और सब्सिडी का अंतर
वड़िंग ने दावा किया कि सरकार ने गर्मियों से पहले बिजली खरीद की कोई अग्रिम योजना नहीं बनाई। उनके अनुसार, PSPCL पहले जहाँ ₹4-5 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदता था, वहीं अब निजी व्यापारियों से ₹8.10 प्रति यूनिट की दर पर खरीद की जा रही है — यानी लागत लगभग दोगुनी।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत PSPCL को ₹22,000 करोड़ की सब्सिडी देनी थी, लेकिन केवल ₹15,000 करोड़ ही जारी किए गए। इस ₹7,000 करोड़ के अंतर को कथित तौर पर 'लाभ' बताया गया, जबकि वास्तव में PSPCL को ₹10,000 करोड़ का कर्ज़ लेना पड़ा और इस कर्ज़ के लिए एक निजी बिचौलिए को ₹150 करोड़ कमीशन दिया गया।
कोयला संकट का खंडन, असली वजह बताई
मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा बिजली संकट के लिए कोयले की कमी को जिम्मेदार ठहराए जाने पर वड़िंग ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पंजाब के पास अपनी कैप्टिव कोयला खदानें हैं, इसलिए संकट कोयले की कमी से नहीं, बल्कि लेहरा मोहब्बत और रोपड़ थर्मल प्लांटों में अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण बिजली उत्पादन घटने से पैदा हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में गर्मियों की माँग पहले से चरम पर थी।
UBDC हाइड्रो परियोजना की स्थिति
वड़िंग ने यह भी कहा कि पिछले साल बाढ़ से क्षतिग्रस्त UBDC हाइड्रो पावर परियोजना अब तक पूरी क्षमता से चालू नहीं हो पाई है, जिसके कारण राज्य की समग्र बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित बनी हुई है। यह स्थिति संकट को और गहरा करती है। आलोचकों का कहना है कि AAP सरकार को इस परियोजना की बहाली को प्राथमिकता देनी चाहिए थी।
वड़िंग के इन आरोपों पर AAP सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र या जन-प्रदर्शनों के ज़रिए यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है।