मनप्रीत सिंह का संकल्प: चौथा विश्व कप होगा आखिरी, 51 साल के पदक सूखे को खत्म करने की कसम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय हॉकी टीम के अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने स्पष्ट किया है कि एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 उनके करियर का अंतिम विश्व कप हो सकता है, और वह इसे खाली हाथ नहीं लौटना चाहते। जियोस्टार पर दिए एक इंटरव्यू में मनप्रीत ने कहा कि 51 साल से चले आ रहे विश्व कप पदक के सूखे को समाप्त करना उनका सबसे बड़ा लक्ष्य है।
मनप्रीत का दृढ़ संकल्प
मनप्रीत ने कहा, "यह विश्व कप मेरे लिए बहुत मायने रखता है। यह मेरा चौथा विश्व कप है। हमने लगातार दो ओलंपिक पदक जीते हैं, लेकिन विश्व कप पदक अभी भी बाकी है। हर खिलाड़ी का सपना होता है कि दोनों हों। मेरे लिए, यह मेरा आखिरी विश्व कप हो सकता है, इसलिए मैं इसी सोच के साथ इसे खेल रहा हूं।" उन्होंने जोड़ा, "मैंने वह हासिल करने का पक्का इरादा कर लिया है जो हमने अभी तक नहीं किया है।"
गौरतलब है कि भारत ने 1975 में आखिरी बार हॉकी विश्व कप पदक जीता था। तब से टीम इस खिताब के करीब तो आई, लेकिन पोडियम से दूर रही। इसके विपरीत, टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 में लगातार दो ओलंपिक कांस्य पदक जीतकर टीम ने साबित किया है कि वह विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी है।
टीम की तैयारी और रणनीति
मनप्रीत ने टीम की तैयारियों को लेकर आत्मविश्वास जताया। उन्होंने कहा, "टीम के पास आगे बढ़ने के लिए अनुभव और प्रतिभा है। हमने अच्छी तैयारी की है, और भरोसा बहुत है। हमारी टीम में युवा और अनुभव का अच्छा बैलेंस है।" उन्होंने बताया कि कप्तान हरमनप्रीत सिंह, मंदीप सिंह और उन्होंने मिलकर युवा खिलाड़ियों के साथ अपने अनुभव साझा किए हैं — क्या काम किया, क्या नहीं, और हर मैच को पूरे फोकस के साथ कैसे खेलना है।
फिटनेस और डिफेंस पर विशेष जोर देते हुए मनप्रीत ने कहा, "हमारे कोच ने फिटनेस पर जोर दिया है क्योंकि हम जानते हैं कि फिट रहने से हमें श्रेष्ठ के खिलाफ मुकाबला करने में मदद मिलती है। हमने अपने डिफेंस पर भी कड़ी मेहनत की है। एक मजबूत डिफेंस हमें अटैक करने और गेम पर नियंत्रण रखने का आत्मविश्वास देता है।"
कप्तान हरमनप्रीत की तारीफ
मनप्रीत ने कप्तान हरमनप्रीत सिंह की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि हरमनप्रीत आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व करते हैं, मुश्किल समय में खिलाड़ियों को प्रेरित करते हैं और दबाव में टीम को शांत रखते हैं। मनप्रीत के अनुसार, "वह दुनिया के बेस्ट ड्रैग-फ्लिकर्स में से एक हैं। उनके हिट्स में जबरदस्त ताकत और विविधता है, और जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तो वह हमेशा आगे आते हैं। उनके जैसा कप्तान होने से पूरी टीम को आत्मविश्वास मिलता है।"
ऐतिहासिक मौके पर भारत की उम्मीद
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय हॉकी का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है। टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 में लगातार ओलंपिक पदक जीतने के बाद टीम इंडिया के पास यह साबित करने का सुनहरा मौका है कि वह विश्व कप के मंच पर भी अपनी छाप छोड़ सकती है। मनप्रीत को पूरा भरोसा है कि भारत फाइनल तक पहुँचेगा और 51 साल का पदक सूखा समाप्त करेगा।