बलवीर सिंह जूनियर: 6 वर्ष की आयु में हॉकी स्टिक उठाई, एशियाई खेलों में देश को दिलाया रजत
सारांश
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नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बलवीर सिंह जूनियर को भारत के महान हॉकी खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। उन्होंने 1958 में आयोजित एशियाई खेलों में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश को रजत पदक दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हॉकी में अपनी उल्लेखनीय यात्रा के बाद, बलवीर ने भारतीय सेना में भी अपनी सेवाएं दीं, और मेजर के पद से रिटायर हुए।
बलवीर सिंह का जन्म जालंधर के संसारपुर में 13 अप्रैल 1932 को हुआ था। उस समय जालंधर को हॉकी का गढ़ माना जाता था। बलवीर ने मात्र 6 वर्ष की आयु में हॉकी की स्टिक पहली बार थामी, और इस खेल के प्रति उनका प्रेम दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया। बलवीर सेंटर फॉरवर्ड की भूमिका निभाते थे। घरेलू स्तर पर उनके शानदार खेल ने सभी को प्रभावित किया। उन्होंने पंजाब राज्य टीम के लिए खेलते हुए अद्वितीय प्रदर्शन किया और पंजाब विश्वविद्यालय को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाई। 1957, 1958, और 1959 में बलवीर ने भारतीय रेलवे को लगातार तीन वर्षों तक राष्ट्रीय खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बलवीर भारतीय रेलवे टीम का हिस्सा भी रहे और उन्होंने विदेशी मैदानों पर जाकर अपने खेल से सभी को मंत्रमुग्ध किया। 1951 में, बलवीर के करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब उन्हें अफगानिस्तान की यात्रा पर गई भारतीय टीम में शामिल किया गया, और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
भारतीय जर्सी में भी उन्होंने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। हालांकि, उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि 1958 में आई, जब टोक्यो में आयोजित एशियाई खेलों में भारतीय टीम ने रजत पदक जीता। बलवीर जूनियर का इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हॉकी में देश का नाम रोशन करने के बाद, 1962 में बलवीर जूनियर ने भारतीय सेना में आपातकालीन कमीशन अधिकारी के रूप में शामिल हो गए। सेना में उन्होंने कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं और आर्मी ऑर्डिनेंस कोर से मेजर के पद से रिटायर हुए। 1984 के बाद उन्होंने हॉकी से दूरी बनाई। बलवीर जूनियर का निधन 13 अप्रैल 2021 को 88 वर्ष की आयु में हुआ।