झारखंड हाईकोर्ट का रामगढ़ प्रदूषण पर सख्त आदेश: साल में दो बार होगा औद्योगिक निरीक्षण
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने 14 सितंबर 2026 को रामगढ़ जिले की निजी औद्योगिक इकाइयों से कथित वायु और जल प्रदूषण के मामले में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के मूल अधिकार का अभिन्न हिस्सा है, और इसकी अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राम किशोर द्वारा दायर जनहित याचिका का निष्पादन करते हुए ये आदेश पारित किए। याचिका में रामगढ़ स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड पर चिमनियों से धुआं व धूल उत्सर्जित करने तथा दामोदर नदी एवं आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषित करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
खंडपीठ ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हजारीबाग क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिया कि दोनों औद्योगिक इकाइयों का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण किया जाए। इनमें से कम से कम एक निरीक्षण बिना पूर्व सूचना के (औचक) होना अनिवार्य है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन हो सके।
उत्सर्जन निगरानी पर निर्देश
अदालत ने यह भी तय किया कि यदि किसी उद्योग का कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) लगातार 48 घंटे से अधिक समय तक निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन दर्ज करे, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सात दिनों के भीतर संबंधित उद्योग को कारण बताओ नोटिस जारी करे। यह प्रावधान इकाइयों को मनमाने उत्सर्जन से रोकने के लिए एक स्वचालित जवाबदेही तंत्र स्थापित करता है।
जल प्रदूषण जाँच की समयसीमा
जल प्रदूषण की स्थिति की दोबारा जाँच के लिए खंडपीठ ने स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है। विवा इंटरनेशनल स्कूल के पास तथा दामोदर नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों से तीन महीने के भीतर पानी के नमूने एकत्र कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जाँच कराई जाए। परीक्षण रिपोर्ट रामगढ़ उपायुक्त को सौंपी जाएगी।
गौरतलब है कि दामोदर नदी झारखंड के कई जिलों और लाखों लोगों की पेयजल व सिंचाई आवश्यकताओं के लिए महत्त्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरणीय अनुपालन को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।
पर्यावरणीय अनुमोदन की समीक्षा
खंडपीठ ने दोनों कंपनियों के पर्यावरणीय अनुमोदन, कंसेंट टू एस्टेब्लिश (CTE) और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) की विस्तृत समीक्षा का भी निर्देश दिया है। इन दस्तावेजों की अगले दो महीने में जाँच कर समेकित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यदि कोई अनुमति समाप्त या अनुचित पाई जाती है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अनुपालन और आगे की राह
अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता राम किशोर को भविष्य में आदेशों के उल्लंघन या प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ने पर इसी मामले में इंटरमीडिएट एप्लिकेशन दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी गई है। इस आदेश से रामगढ़ क्षेत्र में औद्योगिक पर्यावरण अनुपालन की निगरानी का एक सुदृढ़ ढाँचा तैयार हो गया है, जिसकी परीक्षा अब क्रियान्वयन में होगी।