14 सितंबर 2026
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झारखंड हाईकोर्ट का रामगढ़ प्रदूषण पर सख्त आदेश: साल में दो बार होगा औद्योगिक निरीक्षण

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झारखंड हाईकोर्ट का रामगढ़ प्रदूषण पर सख्त आदेश: साल में दो बार होगा औद्योगिक निरीक्षण

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ की दो कंपनियों पर प्रदूषण के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए साल में दो बार निरीक्षण, 48 घंटे में उत्सर्जन उल्लंघन पर 7 दिन में नोटिस और 3 माह में दामोदर नदी के जल नमूनों की जाँच का आदेश दिया — अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण को मौलिक अधिकार बताते हुए।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 14 सितंबर 2026 को रामगढ़ में प्रदूषण मामले पर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़े निर्देश जारी किए।
बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण अनिवार्य, जिसमें कम से कम एक औचक निरीक्षण होगा।
CEMS पर 48 घंटे से अधिक उल्लंघन पर 7 दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करना होगा।
दामोदर नदी और विवा इंटरनेशनल स्कूल के पास से 3 महीने के भीतर जल नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जाँच कराई जाएगी।
दोनों कंपनियों के CTE और CTO दस्तावेजों की 2 महीने के भीतर समीक्षा; अनुमति समाप्त मिलने पर कानूनी कार्रवाई होगी।
संबंधित अधिकारियों को 4 महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा।

झारखंड हाईकोर्ट ने 14 सितंबर 2026 को रामगढ़ जिले की निजी औद्योगिक इकाइयों से कथित वायु और जल प्रदूषण के मामले में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के मूल अधिकार का अभिन्न हिस्सा है, और इसकी अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राम किशोर द्वारा दायर जनहित याचिका का निष्पादन करते हुए ये आदेश पारित किए। याचिका में रामगढ़ स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड पर चिमनियों से धुआं व धूल उत्सर्जित करने तथा दामोदर नदी एवं आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषित करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

खंडपीठ ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हजारीबाग क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिया कि दोनों औद्योगिक इकाइयों का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण किया जाए। इनमें से कम से कम एक निरीक्षण बिना पूर्व सूचना के (औचक) होना अनिवार्य है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन हो सके।

उत्सर्जन निगरानी पर निर्देश

अदालत ने यह भी तय किया कि यदि किसी उद्योग का कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (CEMS) लगातार 48 घंटे से अधिक समय तक निर्धारित सीमा से अधिक उत्सर्जन दर्ज करे, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सात दिनों के भीतर संबंधित उद्योग को कारण बताओ नोटिस जारी करे। यह प्रावधान इकाइयों को मनमाने उत्सर्जन से रोकने के लिए एक स्वचालित जवाबदेही तंत्र स्थापित करता है।

जल प्रदूषण जाँच की समयसीमा

जल प्रदूषण की स्थिति की दोबारा जाँच के लिए खंडपीठ ने स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है। विवा इंटरनेशनल स्कूल के पास तथा दामोदर नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों से तीन महीने के भीतर पानी के नमूने एकत्र कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जाँच कराई जाए। परीक्षण रिपोर्ट रामगढ़ उपायुक्त को सौंपी जाएगी।

गौरतलब है कि दामोदर नदी झारखंड के कई जिलों और लाखों लोगों की पेयजल व सिंचाई आवश्यकताओं के लिए महत्त्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरणीय अनुपालन को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।

पर्यावरणीय अनुमोदन की समीक्षा

खंडपीठ ने दोनों कंपनियों के पर्यावरणीय अनुमोदन, कंसेंट टू एस्टेब्लिश (CTE) और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) की विस्तृत समीक्षा का भी निर्देश दिया है। इन दस्तावेजों की अगले दो महीने में जाँच कर समेकित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यदि कोई अनुमति समाप्त या अनुचित पाई जाती है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अनुपालन और आगे की राह

अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता राम किशोर को भविष्य में आदेशों के उल्लंघन या प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ने पर इसी मामले में इंटरमीडिएट एप्लिकेशन दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी गई है। इस आदेश से रामगढ़ क्षेत्र में औद्योगिक पर्यावरण अनुपालन की निगरानी का एक सुदृढ़ ढाँचा तैयार हो गया है, जिसकी परीक्षा अब क्रियान्वयन में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

CEMS-आधारित स्वतः-नोटिस और दस्तावेज़ समीक्षा सब एक साथ। लेकिन असली सवाल यह है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जो अक्सर संसाधन और जनशक्ति की कमी का हवाला देता है, इतने बहुआयामी निर्देशों का अनुपालन किस गति से करेगा। गौरतलब है कि दामोदर नदी प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं — दशकों से औद्योगिक इलाकों में यही कहानी दोहराई जाती रही है। चार महीने में अनुपालन हलफनामे की शर्त अदालती निगरानी को जीवित रखती है, जो इस आदेश को पूर्व के कई पर्यावरणीय निर्देशों से अलग करती है जो फाइलों में दब गए।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ प्रदूषण मामले में क्या आदेश दिए?
हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को रामगढ़ की दो औद्योगिक इकाइयों का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण करने, जिसमें एक औचक निरीक्षण अनिवार्य हो, और CEMS पर 48 घंटे से अधिक उल्लंघन पर 7 दिन के भीतर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही दामोदर नदी के जल नमूने 3 महीने में लेने और 4 महीने में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा गया।
इस मामले में किन कंपनियों पर आरोप हैं?
रामगढ़ स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड पर चिमनियों से धुआं और धूल छोड़ने तथा दामोदर नदी और आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषित करने के आरोप हैं। यह याचिका राम किशोर ने दायर की थी।
स्वच्छ पर्यावरण को अनुच्छेद 21 से क्यों जोड़ा गया?
चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन का अधिकार स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को भी समाहित करता है। यह व्याख्या सर्वोच्च न्यायालय के कई पूर्व निर्णयों के अनुरूप है और औद्योगिक प्रदूषण को संवैधानिक उल्लंघन की श्रेणी में रखती है।
दामोदर नदी के जल नमूने कहाँ से लिए जाएंगे?
अदालत के निर्देश के अनुसार, विवा इंटरनेशनल स्कूल के पास तथा दामोदर नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों से तीन महीने के भीतर नमूने लिए जाएंगे। जाँच मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में होगी और रिपोर्ट रामगढ़ उपायुक्त को सौंपी जाएगी।
कंपनियों के CTE और CTO दस्तावेज़ों की समीक्षा क्यों ज़रूरी है?
कंसेंट टू एस्टेब्लिश (CTE) और कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) किसी भी औद्योगिक इकाई के संचालन की कानूनी अनुमति के आधार होते हैं। अदालत ने इनकी समीक्षा इसलिए ज़रूरी मानी क्योंकि यदि ये अनुमतियाँ समाप्त हो चुकी हैं या शर्तों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित इकाइयों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह समीक्षा दो महीने के भीतर पूरी की जानी है।
राष्ट्र प्रेस
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