जोजरी नदी किनारे 100 मीटर में निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 500 मीटर तक प्रदूषणकारी उद्योग भी बंद
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अगस्त 2026 को राजस्थान की जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में सभी प्रकार के निर्माण और विकास कार्यों पर तत्काल रोक लगा दी। यह अंतरिम आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक नदी की बाढ़ सीमा और आवश्यक पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र का वैज्ञानिक पद्धति से निर्धारण और सीमांकन पूरा नहीं हो जाता। साथ ही, कोर्ट ने नदी की मौजूदा बाढ़ सीमा से दोनों ओर 500 मीटर तक किसी भी प्रदूषणकारी उद्योग या गतिविधि को अनुमति देने से भी मना किया है।
मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने जोजरी समेत राजस्थान की नदियों में औद्योगिक प्रदूषण से संबंधित एक स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) मामले में यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नदी और उसके आसपास के पर्यावरण को पहले ही गंभीर क्षति पहुँच चुकी है, इसलिए एक 'अंतरिम, निश्चित और मापने योग्य सुरक्षा क्षेत्र' बनाना अनिवार्य है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'हमारी राय है कि बाढ़ सीमा और जरूरी पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र तय करने और उनकी सीमा तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया के दौरान नदी के इकोसिस्टम की ठीक से सुरक्षा के लिए एक अंतरिम, निश्चित और मापने योग्य सुरक्षा क्षेत्र बनाना जरूरी है। इसलिए, हम निर्देश देते हैं कि नदी के किनारे से 100 मीटर की दूरी के भीतर किसी भी तरह का निर्माण या विकास कार्य करने की अनुमति नहीं होगी।'
मामले की पृष्ठभूमि
यह स्वतः संज्ञान मामला तब सर्वोच्च न्यायालय के सामने आया जब एक डॉक्यूमेंट्री में जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों में जोजरी नदी के भीतर भारी औद्योगिक प्रदूषण का खुलासा हुआ। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान की कई नदियाँ रंगाई-छपाई और अन्य उद्योगों के रासायनिक अपशिष्ट से लंबे समय से प्रदूषित हैं।
नवंबर 2025 में कोर्ट ने जोजरी, बांडी और लूनी नदियों की सफाई के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 2022 के निर्देशों को पुनः लागू किया था। उसी समय राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय इकोसिस्टम निगरानी समिति का गठन भी किया गया था।
आदेश का दायरा और असर
कोर्ट का 500 मीटर का प्रतिबंध उन सभी उद्योगों और गतिविधियों पर लागू होगा जिनसे नदी में प्रदूषण, गंदगी या पर्यावरण को किसी अन्य प्रकार की क्षति होने की संभावना हो। 100 मीटर का निर्माण-प्रतिबंध एक व्यापक सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगा, जो वैज्ञानिक सीमांकन पूरा होने तक बना रहेगा।
यह आदेश जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों में नदी के किनारे बसे उद्योगों, व्यापारियों और निर्माण परियोजनाओं को सीधे प्रभावित करेगा। स्थानीय प्रशासन को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, अब वैज्ञानिक पद्धति से जोजरी नदी की बाढ़ सीमा और पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र का सीमांकन किया जाएगा। न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता वाली निगरानी समिति इस प्रक्रिया की देखरेख करेगी। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, अंतरिम प्रतिबंध जारी रहेंगे — और किसी भी उल्लंघन पर न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।