24 अगस्त 2026
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जोजरी नदी किनारे 100 मीटर में निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 500 मीटर तक प्रदूषणकारी उद्योग भी बंद

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जोजरी नदी किनारे 100 मीटर में निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 500 मीटर तक प्रदूषणकारी उद्योग भी बंद

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने जोजरी नदी को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए कड़ा अंतरिम आदेश दिया है — किनारे से 100 मीटर में निर्माण बंद, 500 मीटर तक प्रदूषणकारी उद्योग प्रतिबंधित। जोधपुर, पाली और बाड़मेर में डॉक्यूमेंट्री से उजागर हुए भारी प्रदूषण के बाद यह स्वतः संज्ञान मामला अब निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अगस्त 2026 को जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में सभी निर्माण और विकास कार्यों पर तत्काल रोक लगाई।
नदी की बाढ़ सीमा से दोनों ओर 500 मीटर तक प्रदूषणकारी उद्योगों और गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया।
यह अंतरिम आदेश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान मामले में दिया।
मामला जोधपुर , पाली और बाड़मेर में जोजरी नदी के भारी प्रदूषण को उजागर करने वाली एक डॉक्यूमेंट्री के बाद शुरू हुआ।
नवंबर 2025 में कोर्ट ने न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय इकोसिस्टम निगरानी समिति गठित की थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अगस्त 2026 को राजस्थान की जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में सभी प्रकार के निर्माण और विकास कार्यों पर तत्काल रोक लगा दी। यह अंतरिम आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक नदी की बाढ़ सीमा और आवश्यक पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र का वैज्ञानिक पद्धति से निर्धारण और सीमांकन पूरा नहीं हो जाता। साथ ही, कोर्ट ने नदी की मौजूदा बाढ़ सीमा से दोनों ओर 500 मीटर तक किसी भी प्रदूषणकारी उद्योग या गतिविधि को अनुमति देने से भी मना किया है।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने जोजरी समेत राजस्थान की नदियों में औद्योगिक प्रदूषण से संबंधित एक स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) मामले में यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नदी और उसके आसपास के पर्यावरण को पहले ही गंभीर क्षति पहुँच चुकी है, इसलिए एक 'अंतरिम, निश्चित और मापने योग्य सुरक्षा क्षेत्र' बनाना अनिवार्य है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'हमारी राय है कि बाढ़ सीमा और जरूरी पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र तय करने और उनकी सीमा तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया के दौरान नदी के इकोसिस्टम की ठीक से सुरक्षा के लिए एक अंतरिम, निश्चित और मापने योग्य सुरक्षा क्षेत्र बनाना जरूरी है। इसलिए, हम निर्देश देते हैं कि नदी के किनारे से 100 मीटर की दूरी के भीतर किसी भी तरह का निर्माण या विकास कार्य करने की अनुमति नहीं होगी।'

मामले की पृष्ठभूमि

यह स्वतः संज्ञान मामला तब सर्वोच्च न्यायालय के सामने आया जब एक डॉक्यूमेंट्री में जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों में जोजरी नदी के भीतर भारी औद्योगिक प्रदूषण का खुलासा हुआ। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान की कई नदियाँ रंगाई-छपाई और अन्य उद्योगों के रासायनिक अपशिष्ट से लंबे समय से प्रदूषित हैं।

नवंबर 2025 में कोर्ट ने जोजरी, बांडी और लूनी नदियों की सफाई के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 2022 के निर्देशों को पुनः लागू किया था। उसी समय राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय इकोसिस्टम निगरानी समिति का गठन भी किया गया था।

आदेश का दायरा और असर

कोर्ट का 500 मीटर का प्रतिबंध उन सभी उद्योगों और गतिविधियों पर लागू होगा जिनसे नदी में प्रदूषण, गंदगी या पर्यावरण को किसी अन्य प्रकार की क्षति होने की संभावना हो। 100 मीटर का निर्माण-प्रतिबंध एक व्यापक सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगा, जो वैज्ञानिक सीमांकन पूरा होने तक बना रहेगा।

यह आदेश जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों में नदी के किनारे बसे उद्योगों, व्यापारियों और निर्माण परियोजनाओं को सीधे प्रभावित करेगा। स्थानीय प्रशासन को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, अब वैज्ञानिक पद्धति से जोजरी नदी की बाढ़ सीमा और पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र का सीमांकन किया जाएगा। न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता वाली निगरानी समिति इस प्रक्रिया की देखरेख करेगी। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, अंतरिम प्रतिबंध जारी रहेंगे — और किसी भी उल्लंघन पर न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — राजस्थान में नदी किनारे अतिक्रमण और औद्योगिक प्रदूषण दशकों पुरानी समस्या है जिसे एनजीटी के 2022 के निर्देश भी पूरी तरह नहीं रोक पाए। जोजरी, बांडी और लूनी — तीनों नदियाँ रंगाई-छपाई उद्योग के रासायनिक कचरे की शिकार हैं, फिर भी निगरानी तंत्र लगातार कमज़ोर साबित हुआ है। न्यायमूर्ति लोढ़ा समिति की वास्तविक शक्तियाँ और रिपोर्टिंग की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। बिना ज़मीनी प्रवर्तन और उद्योगों के लिए वैकल्पिक अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था के, यह आदेश भी पिछले निर्देशों की तरह कागज़ों तक सीमित रहने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी पर क्या आदेश दिया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने जोजरी नदी के किनारे से 100 मीटर के दायरे में सभी निर्माण और विकास कार्यों पर अंतरिम रोक लगाई है। साथ ही, नदी की बाढ़ सीमा से 500 मीटर तक किसी भी प्रदूषणकारी उद्योग या गतिविधि को अनुमति नहीं होगी।
यह रोक कब तक लागू रहेगी?
यह अंतरिम प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक नदी की बाढ़ सीमा और पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र का वैज्ञानिक पद्धति से निर्धारण और सीमांकन पूरा नहीं हो जाता। इस प्रक्रिया की कोई निश्चित समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
जोजरी नदी प्रदूषण का यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुँचा?
एक डॉक्यूमेंट्री में जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों में जोजरी नदी के भीतर भारी औद्योगिक प्रदूषण का खुलासा हुआ, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेकर यह मामला दर्ज किया। नवंबर 2025 में कोर्ट ने एनजीटी के 2022 के निर्देशों को पुनः लागू करते हुए निगरानी समिति भी गठित की थी।
इस आदेश से किन जिलों और लोगों पर असर पड़ेगा?
यह आदेश मुख्य रूप से जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों में नदी किनारे स्थित उद्योगों, निर्माण परियोजनाओं और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करेगा। रंगाई-छपाई और अन्य उद्योगों को 500 मीटर के दायरे से बाहर जाना होगा या अपनी प्रदूषणकारी गतिविधियाँ बंद करनी होंगी।
इकोसिस्टम निगरानी समिति की क्या भूमिका है?
राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में गठित यह उच्च-स्तरीय समिति जोजरी, बांडी और लूनी नदियों की सफाई और पर्यावरण सुरक्षा की निगरानी करेगी। वैज्ञानिक सीमांकन की प्रक्रिया भी इसी समिति की देखरेख में होगी।
राष्ट्र प्रेस
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