एनजीटी ने स्पष्ट किया: कृत्रिम तटबंध यमुना के बाढ़ क्षेत्र की सीमा निर्धारित नहीं कर सकते

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एनजीटी ने स्पष्ट किया: कृत्रिम तटबंध यमुना के बाढ़ क्षेत्र की सीमा निर्धारित नहीं कर सकते

सारांश

नई दिल्ली में एनजीटी ने यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र की सीमा को लेकर दिल्ली के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। कृत्रिम तटबंधों को बाढ़ क्षेत्र की सीमा तय करने के लिए मान्यता नहीं दी गई है। जानें इस महत्वपूर्ण आदेश के बारे में।

मुख्य बातें

यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
कृत्रिम तटबंधों को बाढ़ क्षेत्र की सीमा तय करने के लिए मान्यता नहीं दी गई है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण का कार्य 31 जुलाई 2026 तक पूरा होगा।

नई दिल्ली, 29 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के संबंधित अधिकारियों को यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) की 22 किलोमीटर लंबी सीमा का विभाजन वजीराबाद से पल्ली तक कानूनी प्रावधानों के अनुसार सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि कृत्रिम तटबंध (बांध) बाढ़ क्षेत्र की सीमा को निर्धारित नहीं कर सकते।

एनजीटी की पीठ, जिसका नेतृत्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव कर रहे थे, में विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंटिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद शामिल थे। यह पीठ यमुना के बाढ़ क्षेत्र के सीमांकन और अतिक्रमणों से संबंधित मामलों की सुनवाई कर रही थी।

दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट में बताया गया कि जीआईएस-आधारित तकनीक और 1‑मीटर कंटूर डेटा का उपयोग करके बाढ़ क्षेत्र का प्रारूप नक्शा तैयार किया गया है। इस नक्शे को दिल्ली विकास प्राधिकरण को भेजा गया है ताकि भूमि पर सीमांकन किया जा सके, जिसमें बॉउंड्री मार्कर लगाना और सत्यापन करना शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस सीमांकन और बोलार्ड लगाने का कार्य 31 जुलाई 2026 तक पूरा होने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि अतिक्रमणों को लगातार हटाया जा रहा है और मई 2022 से फरवरी 2026 तक 1,426.6 एकड़ बाढ़ क्षेत्र की भूमि वापस ली गई है।

एनजीटी ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर भी गौर किया, जिसमें मजनू का टीला से निगमबोध घाट तक बाढ़ रोकने की दीवार बनाने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, न्यायमूर्ति श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे संरचनाएं बाढ़ क्षेत्र की सीमा को निर्धारित नहीं कर सकतीं।

एनजीटी ने कहा, “बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन ‘रिवर गंगा (रेजुवेनशन, प्रोटेक्शन एंड मैनेजमेंट) अथॉरिटीज आर्डर, 2016’ की धारा 3(I) के अनुसार किया जाना चाहिए और कृत्रिम तटबंध को बाढ़ क्षेत्र की बाहरी सीमा के रूप में नहीं माना जा सकता।”

दिल्ली विकास प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि वह इस कार्य को तय समयसीमा में पूरा कर लेगा। एनजीटी ने दिल्ली सरकार और डीडीए को निर्देश दिया कि वे आगे की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। डीडीए के वकील ने कहा, “यह 22 किलोमीटर लंबी सीमा में बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन डीडीए की जिम्मेदारी है और यह कार्य 31 जुलाई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।”

इस मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को होगी। एनजीटी ने कहा कि प्रगति रिपोर्ट कम से कम एक सप्ताह पहले प्रस्तुत की जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि हम प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सही कदम उठाएं। एनजीटी का निर्णय एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो बाढ़ प्रबंधन में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करता है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि स्थानीय निवासियों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनजीटी ने दिल्ली के अधिकारियों को क्या निर्देश दिए हैं?
एनजीटी ने दिल्ली के अधिकारियों को यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र की 22 किलोमीटर लंबी सीमा का विभाजन कानूनी प्रावधानों के अनुसार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
क्या कृत्रिम तटबंध बाढ़ क्षेत्र की सीमा तय कर सकते हैं?
एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि कृत्रिम तटबंध बाढ़ क्षेत्र की सीमा को निर्धारित नहीं कर सकते।
दिल्ली विकास प्राधिकरण इस कार्य को कब तक पूरा करेगा?
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि वह इस कार्य को 31 जुलाई 2026 तक पूरा कर लेगा।
राष्ट्र प्रेस
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