2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कावेरी जल संकट: बोम्मई की चेतावनी — सुप्रीम कोर्ट में ठोस डेटा के बिना कर्नाटक को होगा नुकसान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कावेरी जल संकट: बोम्मई की चेतावनी — सुप्रीम कोर्ट में ठोस डेटा के बिना कर्नाटक को होगा नुकसान

सारांश

कावेरी बेसिन में बारिश से मिली राहत को स्थायी समाधान मानने से पूर्व CM बोम्मई ने इनकार किया। उन्होंने चेताया कि DMK की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में ठोस डेटा के बिना कर्नाटक को कठोर आदेश का सामना करना पड़ सकता है — और किसानों को एक बूंद पानी दिए बिना 'उपलब्धि' का दावा अस्वीकार्य है।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि कावेरी बेसिन में बारिश अस्थायी राहत है, स्थायी समाधान नहीं।
DMK की सुप्रीम कोर्ट याचिका पर सुनवाई अगले सोमवार को; बोम्मई ने ठोस डेटा के साथ तर्क पेश करने की अपील की।
राज्य सरकार द्वारा जल-विमोचन 9,500 क्यूसेक से घटाकर 3,500 क्यूसेक करने को उपलब्धि बताए जाने पर बोम्मई ने आपत्ति जताई।
सरकार की सलाह के बावजूद किसानों ने खरीफ और रबी दोनों फसलों की लगभग 70 प्रतिशत बुवाई पूरी की।
सोमन्ना ने कावेरी कैचमेंट क्षेत्र में बारिश को सकारात्मक संकेत बताया।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 2 अगस्त को स्पष्ट किया कि कावेरी बेसिन में हाल की अच्छी बारिश जल संकट का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि प्रकृति की ओर से मिली एक अस्थायी राहत मात्र है। उन्होंने राज्य सरकार को आगाह किया कि यदि सुप्रीम कोर्ट में सही दस्तावेजों और विस्तृत डेटा के साथ मजबूत तर्क नहीं रखे गए, तो न्यायालय का कोई कठोर आदेश राज्य को फिर से मुश्किल में डाल सकता है।

सर्वदलीय बैठक के बाद बोम्मई का बयान

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की अध्यक्षता में कावेरी नदी जल बंटवारे पर आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए बोम्मई ने कहा, वायनाड, कोडगु, चिकमगलूर और सकलेशपुर क्षेत्रों में हुई भारी बारिश ने कावेरी जल संकट को कुछ हद तक कम किया है। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार को अपने पास मौजूद विस्तृत डेटा के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में सही तर्क पेश करने चाहिए। वरना, अगर कोर्ट का कोई सख्त आदेश आता है तो राज्य सरकार को फिर से मुश्किल का सामना करना पड़ेगा।"

उन्होंने यह भी कहा कि कावेरी जल विनियमन समिति की बैठकें हर 15 दिन में और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक हर महीने होती है, जिनमें संकट-साझाकरण फॉर्मूले के आधार पर जल-विमोचन तय किया जाता है।

डीएमके की याचिका और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

बोम्मई ने बताया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) पहले ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुकी है और सुनवाई अगले सोमवार को निर्धारित है। उन्होंने आग्रह किया, "राज्य सरकार को ठोस डेटा के साथ सही तर्क पेश करने चाहिए। ऐसा न करने पर कोर्ट का सख्त आदेश आ सकता है, जिससे सरकार फिर से मुश्किल में पड़ सकती है।" यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद दशकों से अनसुलझा है और न्यायालयीन हस्तक्षेप की नौबत बार-बार आती रही है।

केआरएस बांध और किसानों की स्थिति

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा जल-विमोचन को 9,500 क्यूसेक से घटाकर 3,500 क्यूसेक करने को उपलब्धि के रूप में पेश करने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था, "केआरएस बांध से हमारे किसानों को पानी की एक बूंद भी छोड़े बिना किसी उपलब्धि का दावा करना स्वीकार्य नहीं है।" उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार की बुवाई न करने की सलाह के बावजूद किसानों ने खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए लगभग 70 प्रतिशत बुवाई पूरी कर ली है।

बोम्मई ने सरकार को सलाह दी कि अब जब केआरएस में जल-प्रवाह बढ़ा है, तो बांध के पूरी क्षमता तक भरने तक जल-विमोचन न किया जाए। उन्होंने कहा, "अतिरिक्त पानी को स्वाभाविक रूप से बहने दें। पहले किसानों, नहरों, झीलों और पेयजल आवश्यकताओं को प्राथमिकता दें।"

जल शक्ति मंत्री की प्रतिक्रिया

जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने मेकेदातु परियोजना और सर्वदलीय बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इस जटिल मुद्दे का समाधान खोजने के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट किया है। उन्होंने कहा, "प्रकृति की कृपा से अगस्त का महीना अक्सर कर्नाटक के लिए राहत लेकर आता है। कावेरी कैचमेंट क्षेत्र में आज हुई अच्छी बारिश ने हालात को और बेहतर बना दिया है।"

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी जल विवाद में न्यायालयीन आदेशों का अनुपालन और अंतर-राज्यीय समन्वय दोनों ही जरूरी हैं। गौरतलब है कि यह संकट हर मानसून सत्र में तीव्र रूप लेता है और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है। सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में कर्नाटक सरकार का रुख और प्रस्तुत साक्ष्य यह तय करेंगे कि इस वर्ष जल-विमोचन का भार राज्य पर कितना पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके नीचे एक गहरा सवाल है — क्या कर्नाटक सरकार कावेरी विवाद में न्यायालयीन प्रक्रिया को उतनी ही गंभीरता से लेती है जितनी राजनीतिक बयानबाजी को? 9,500 से 3,500 क्यूसेक की कटौती को 'उपलब्धि' बताना उस राज्य के लिए अजीब है जहाँ किसानों ने सरकारी सलाह की अनदेखी कर 70 प्रतिशत बुवाई कर ली। DMK की याचिका पर सुनवाई से पहले यदि कर्नाटक ने अपना पक्ष कमज़ोर रखा, तो न्यायालय का आदेश उन किसानों की फसलों का भविष्य तय कर सकता है जो पहले से ही जोखिम में हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसवराज बोम्मई ने कावेरी संकट पर क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 2 अगस्त को कहा कि कावेरी बेसिन में हुई बारिश केवल अस्थायी राहत है और राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में ठोस डेटा के साथ मजबूत तर्क पेश करने चाहिए। उन्होंने चेताया कि ऐसा न होने पर कठोर न्यायालयीन आदेश राज्य को मुश्किल में डाल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में कावेरी जल विवाद की सुनवाई कब होगी?
DMK द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अगले सोमवार को निर्धारित है। बोम्मई ने कर्नाटक सरकार से आग्रह किया है कि वह इस सुनवाई से पहले विस्तृत और सत्यापित डेटा तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।
कर्नाटक में कावेरी जल विमोचन को लेकर विवाद क्यों है?
राज्य सरकार ने जल-विमोचन 9,500 क्यूसेक से घटाकर 3,500 क्यूसेक किया और इसे उपलब्धि बताया, लेकिन बोम्मई ने इस पर आपत्ति जताई। उनका तर्क है कि केआरएस बांध से किसानों, नहरों और झीलों को पानी दिए बिना इसे उपलब्धि नहीं कहा जा सकता।
कावेरी जल संकट में किसानों की क्या स्थिति है?
राज्य सरकार ने पानी की कमी के कारण किसानों को बुवाई न करने की सलाह दी थी, फिर भी किसानों ने खरीफ और रबी दोनों फसलों की लगभग 70 प्रतिशत बुवाई पूरी कर ली है। यह स्थिति जल-विमोचन के निर्णयों को और अधिक संवेदनशील बनाती है।
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठकें कितनी बार होती हैं?
कावेरी जल विनियमन समिति की बैठक हर 15 दिन में और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक हर महीने होती है। इन बैठकों में संकट-साझाकरण फॉर्मूले के आधार पर जल-विमोचन की मात्रा तय की जाती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 4 दिन पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 4 दिन पहले
  8. 8 महीने पहले