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झारखंड हाईकोर्ट सख्त: माध्यमिक आचार्य परीक्षा में रिस्पांस शीट न मिलने पर JSSC के IT विशेषज्ञ तलब, 13 अक्टूबर को सुनवाई

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झारखंड हाईकोर्ट सख्त: माध्यमिक आचार्य परीक्षा में रिस्पांस शीट न मिलने पर JSSC के IT विशेषज्ञ तलब, 13 अक्टूबर को सुनवाई

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा में रिस्पांस शीट और आंसर-की डाउनलोड न होने की शिकायत पर JSSC के IT विशेषज्ञ को तलब किया है। 13 अक्टूबर को अदालत में लाइव पोर्टल जाँच होगी — सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में तकनीकी पारदर्शिता पर एक अहम परीक्षण।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में रिस्पांस शीट व आंसर-की डाउनलोड न होने की समस्या पर JSSC के IT विशेषज्ञ को तलब किया।
अभ्यर्थियों के पोर्टल पर लॉग-इन प्रयास पर 'यूजर डज नॉट एग्जिस्ट' का त्रुटि संदेश आता रहा।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने विकास पांडेय एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
JSSC ने शपथ पत्र में अभ्यर्थियों की ओर से गलत क्रेडेंशियल दर्ज होने की संभावना जताई है।
अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को; विशेषज्ञों की उपस्थिति में पोर्टल का लाइव परीक्षण होगा।

झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के अभ्यर्थियों को रिस्पांस शीट और आंसर-की डाउनलोड न होने की तकनीकी समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के आईटी विशेषज्ञ को अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को भी अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के साथ उपस्थित होने को कहा है, ताकि विशेषज्ञों की मौजूदगी में पोर्टल पर लॉग-इन करके तकनीकी खामी की असल वजह जानी जा सके। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में विकास पांडेय एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि परीक्षा में शामिल होने के बाद अभ्यर्थियों ने JSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के ज़रिए रिस्पांस शीट तथा आंसर-की डाउनलोड करने का प्रयास किया। हालाँकि, पोर्टल पर 'यूजर डज नॉट एग्जिस्ट' यानी 'उपयोगकर्ता मौजूद नहीं है' का संदेश प्रदर्शित होता रहा।

अभ्यर्थियों पर असर

इस तकनीकी बाधा के चलते अभ्यर्थी अपनी रिस्पांस शीट और आंसर-की तक नहीं पहुँच सके। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे वे अपने उत्तरों और संभावित अंकों का मिलान करने में असमर्थ रहे, जो परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिहाज़ से एक अहम अधिकार है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी पारदर्शिता को लेकर देशभर में सवाल उठते रहे हैं।

JSSC का रुख

अधिवक्ता चंचल जैन के अनुसार, मामले में JSSC की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया जा चुका है। आयोग ने अपने जवाब में यह संभावना जताई है कि अभ्यर्थियों की ओर से ई-मेल आईडी या पासवर्ड सही तरीके से दर्ज न किए जाने के कारण पोर्टल पर उक्त त्रुटि संदेश प्रदर्शित हुआ हो। गौरतलब है कि आयोग और याचिकाकर्ताओं के दावों के बीच स्पष्ट विरोधाभास है, जिसे सुलझाने के लिए ही अदालत ने तकनीकी जाँच का रास्ता चुना है।

हाईकोर्ट का निर्देश

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने मामले की तकनीकी स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से परखने का निर्देश दिया। JSSC के कंप्यूटर और आईटी विशेषज्ञों को 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई में अदालत में उपस्थित रहने को कहा गया है। याचिकाकर्ताओं को भी उस दिन अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि विशेषज्ञों की मौजूदगी में पोर्टल पर लॉग-इन प्रयोग कर तकनीकी समस्या की वास्तविक प्रकृति स्थापित की जा सके।

आगे क्या होगा

अदालत की इस सक्रिय भूमिका से यह संकेत मिलता है कि हाईकोर्ट भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी पारदर्शिता को महज़ प्रशासनिक मामला नहीं मानती। 13 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में अदालत के समक्ष लाइव डेमो के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिसके बाद अदालत अगला आदेश जारी करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एकतरफ़ा लगता है — जब बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को एक ही त्रुटि मिले, तो समस्या सिस्टम में होने की संभावना कहीं अधिक है। अदालत का लाइव तकनीकी जाँच का आदेश सराहनीय है, लेकिन यह भी स्पष्ट करता है कि बिना न्यायिक दबाव के प्रशासनिक जवाबदेही अपने आप नहीं आती।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC के IT विशेषज्ञ को क्यों तलब किया?
माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के अभ्यर्थियों को JSSC पोर्टल पर रिस्पांस शीट और आंसर-की डाउनलोड करने में तकनीकी समस्या आ रही थी। हाईकोर्ट ने इस समस्या की असल वजह जानने के लिए IT विशेषज्ञों को अदालत में उपस्थित रहने और लाइव डेमो देने का निर्देश दिया है।
JSSC पोर्टल पर 'यूजर डज नॉट एग्जिस्ट' का संदेश क्यों आ रहा था?
JSSC ने शपथ पत्र में संभावना जताई है कि अभ्यर्थियों ने ई-मेल आईडी या पासवर्ड गलत दर्ज किया हो। हालाँकि याचिकाकर्ताओं का दावा है कि तकनीकी खामी पोर्टल की तरफ से है, इसी विरोधाभास को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट ने लाइव जाँच का आदेश दिया है।
माध्यमिक आचार्य परीक्षा मामले की अगली सुनवाई कब है?
झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित की है। उस दिन JSSC के IT विशेषज्ञ और याचिकाकर्ता अपनी ई-मेल आईडी एवं पासवर्ड के साथ अदालत में उपस्थित रहेंगे।
इस तकनीकी समस्या से अभ्यर्थियों को क्या नुकसान हुआ?
रिस्पांस शीट और आंसर-की न मिलने के कारण अभ्यर्थी परीक्षा में अपने दिए गए उत्तरों और संभावित अंकों का मिलान नहीं कर सके। यह भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के अधिकार से सीधे जुड़ा मामला है।
यह याचिका किसने दायर की और किस अदालत में सुनवाई हो रही है?
यह याचिका विकास पांडेय एवं अन्य की ओर से दायर की गई है और झारखंड हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई हो रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन पैरवी कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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