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क्या झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी सिविल सर्विस रिजल्ट को चुनौती देने वाली अपील याचिका पर सुनवाई की?

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क्या झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी सिविल सर्विस रिजल्ट को चुनौती देने वाली अपील याचिका पर सुनवाई की?

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। 342 चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया गया है। क्या यह निर्णय अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करेगा? जानें पूरी कहानी!

मुख्य बातें

342 चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की हैं।
याचिकाकर्ताओं ने जेपीएससी के मूल्यांकन पर सवाल उठाए हैं।
अंतिम निर्णय का प्रभाव सीधा चयनित अभ्यर्थियों पर पड़ेगा।
सुनवाई जारी है, जो सभी के लिए महत्वपूर्ण होगी।

रांची, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के हाईकोर्ट ने झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की 11वीं से 13वीं सिविल सर्विस मुख्य परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए 342 सफल अभ्यर्थियों को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया है।

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस मामले के अंतिम निर्णय का सीधा प्रभाव चयनित अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, इसलिए उनकी पक्षकारिता आवश्यक है। सभी सफल अभ्यर्थियों को पार्टी बनाने की प्रक्रिया दो हफ्ते में पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

दरअसल, 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मेंस परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग वाली याचिका को एकल पीठ द्वारा खारिज किए जाने के बाद याचिकाकर्ता अयूब तिर्की और अन्य ने इसके खिलाफ लेटर पेटेंट अपील (एलपीए) दायर की है।

बुधवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार एवं झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभाशीष रसिक सोरेन और शोभा लकड़ा ने अदालत के समक्ष दलीलें प्रस्तुत कीं।

पिछली सुनवाई में ही अदालत ने कहा था कि इस मामले में अंतिम निर्णय से चयनित अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट की एकल पीठ, न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने 11वीं से 13वीं संयुक्त जेपीएससी मेंस परीक्षा के परिणाम को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि यह याचिका अत्यधिक विलंब से दायर की गई है, जबकि मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित जानकारियां पहले ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध थीं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि जेपीएससी द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नियमानुसार नहीं किया गया और मूल्यांकनकर्ताओं की शैक्षणिक योग्यता भी तय मानकों के अनुरूप नहीं थी। इसी आधार पर उन्होंने परिणाम रद्द करने की मांग की थी।

दूसरी तरफ, जेपीएससी ने अदालत को बताया था कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी प्रमुख अखबारों में प्रकाशित की गई थी। ऐसे में यह कहना कि अभ्यर्थियों को प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी, गलत है। आयोग ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी और अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जा चुका था।

एकल पीठ ने देरी से याचिका दायर किए जाने को अनुचित मानते हुए उसे खारिज कर दिया था। अब इस आदेश को डबल बेंच में चुनौती दी गई है, जिस पर सुनवाई जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विश्वास को भी बनाए रखता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह सुनवाई अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है?
हाँ, इस सुनवाई का परिणाम सीधे तौर पर चयनित अभ्यर्थियों पर प्रभाव डालेगा।
क्या याचिका का खारिज होना सामान्य है?
यह सामान्य है, लेकिन जब मामला संवेदनशील हो, तो पुनर्समीक्षा की आवश्यकता होती है।
राष्ट्र प्रेस
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