सारंगपुर में पुष्पदोलोत्सव: परम पूज्य महंत स्वामी महाराज का भव्य रंगोत्सव
सारांश
Key Takeaways
- पुष्पदोलोत्सव एक भव्य आध्यात्मिक उत्सव है।
- 75,000 भक्तों की उपस्थिति ने उत्सव को विशेष बना दिया।
- महंत स्वामी महाराज का संदेश अंतःकरण की शुद्धता पर था।
- उत्सव में संगीत और विशेष प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ।
- 5000 स्वयंसेवकों ने उत्सव में सेवा की।
सारंगपुर, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के तीर्थधाम सारंगपुर में रविवार को परम पूज्य महंत स्वामी महाराज के पावन सान्निध्य में रंगोत्सव (पुष्पदोलोत्सव) को भव्यता और भक्ति के साथ मनाया गया।
प्रमुख स्वामी महाराज, जो स्वयं ब्रह्मस्वरूप थे, प्रतिवर्ष सारंगपुर में इस फूलडोल उत्सव को बड़े उत्साह के साथ मनाते थे। इस वर्ष भी उनकी पावन उपस्थिति में यह उत्सव आयोजित हुआ।
इस आध्यात्मिक उत्सव में भारत और विदेशों से आए 75,000 श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे बीएपीएस स्वामिनारायण मंदिर और बीएपीएस विद्यामंदिर का परिसर भक्तों से खचाखच भर गया। सभा में सभी भक्तों को प्रसाद के रूप में फूड पैकेट वितरित किए गए।
उत्सव के लिए लगभग 7.5 लाख वर्ग फुट में विशाल सभा मंडप बनाया गया था, जिसमें 125 फुट लंबा, 40 फुट चौड़ा और 40 फुट ऊंचा भव्य मंच स्थापित किया गया था। मंच की पृष्ठभूमि में भगवान स्वामिनारायण और उनकी आध्यात्मिक गुरु-परंपरा को दर्शाने वाले मनोहारी दृश्य थे।
पुष्पदोलोत्सव का मुख्य कार्यक्रम सायं 4:45 बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें संगीतज्ञ संतों और युवाओं ने रंगोत्सव से संबंधित भक्तिमय पदों का गायन किया।
इस अवसर पर महंत स्वामी महाराज के दिव्य जीवन और कार्यों को विशेष प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
संस्था के वरिष्ठ संत पूज्य विवेकसागर स्वामी ने पुष्पदोल उत्सव के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि सभी को भगवान की भक्ति में रंग जाना चाहिए।
संतों ने 'सत्पुरुष पवित्र करते हैं', 'सत्पुरुष परमात्मा से जोड़ते हैं' और 'सत्पुरुष परमपद प्रदान करते हैं' विषयों पर हृदयस्पर्शी प्रवचन दिए।
महंत स्वामी महाराज ने कहा, "हम यह पावन उत्सव इसलिए मनाते हैं कि हमारा अंतःकरण शुद्ध हो। सभी को अपने अंतःकरण को शुद्ध करके भक्ति के रंग में रंगना है।"
उत्सव की चरम सीमा पर महंत स्वामी महाराज ने अक्षर-पुरुषोत्तम महाराज की मूर्तियों का पूजन कर रंगोत्सव का शुभारंभ किया। उपस्थित भक्तों ने आरती अर्पित की और महंत स्वामी महाराज ने वरिष्ठ संतों पर रंगवर्षा की। तत्पश्चात, पिचकारियों से सुगंधित जल की धाराओं से भक्तों को रंगोत्सव में सराबोर किया गया।
महंत स्वामी महाराज के आशीर्वाद और संतों-हरिभक्तों के समर्पण से यह उत्सव भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें लगभग 30 सेवा विभागों के 5000 स्वयंसेवकों ने सेवा दी।