काशीपुर में बसौड़ा पर्व पर भक्तों की उमड़ी भीड़, प्राचीन शीतला मंदिर में जारी पूजा-अर्चना

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काशीपुर में बसौड़ा पर्व पर भक्तों की उमड़ी भीड़, प्राचीन शीतला मंदिर में जारी पूजा-अर्चना

सारांश

काशीपुर में बसौड़ा पर्व को लेकर भक्तों में अद्भुत उत्साह फैला है। प्राचीन शीतला माता मंदिर में विशेष पूजा-पाठ का सिलसिला जारी है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। जानिए इस पर्व की धार्मिक मान्यता और अनुष्ठान के बारे में।

Key Takeaways

  • बसौड़ा पर्व शीतला अष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
  • यह पर्व स्वास्थ्य और स्वच्छता का प्रतीक है।
  • मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही।
  • विशेष पूजा में नारियल और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है।
  • मां शीतला को रोग नाशक देवी माना जाता है।

काशीपुर, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रंगों का त्योहार होली बीतने के बाद मनाए जाने वाले बसौड़ा पर्व (शीतला अष्टमी) को लेकर काशीपुर में भक्तों में अपार उत्साह देखने को मिल रहा है। प्राचीन सिद्ध पीठ श्री शीतला माता मंदिर में चैत्र मास की द्वितीया तिथि से आरंभ हुई विशेष पूजा-अर्चना का क्रम आज भी जारी रहा।

आज सुबह से ही सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और मां शीतला देवी की पूजा कर प्रसाद चढ़ाया। मंदिर के बाहर दोनों तरफ भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं, जहां लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

मंदिर के प्रबंधक पंडित संदीप मिश्रा ने बताया कि मां शीतला को रोगों का नाशक माना जाता है। इन्हें नगर कोट देवी, महाकाली, तृष्णा, कालरात्रि, श्री चौगानन चौराहे वाली और मसानी माता के नाम से भी श्रद्धा से पुकारा जाता है। ऋतु परिवर्तन के दौरान होने वाली बीमारियों से मुक्ति के लिए हर वर्ष चैत्र मास की द्वितीया से यहां विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। भक्त बड़ी संख्या में यहां एकत्र होते हैं और मां को हल्दी का तिलक लगाते हैं तथा नारियल, कच्चा दूध, चना, चना दाल, मसूर दाल, हल्दी, गुड़, आटा, पुए, सरसों का तेल, नमक समेत अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, बसौड़ा पूजन से घर में रोग-व्याधियों का नाश होता है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। पंडित संदीप मिश्रा ने बताया, “सुबह 5 बजे से ही दर्शन का तांता लगा हुआ है। होली के अगले दिन से वैशाखी तक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को पूजा होती है। शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी (बसौड़ा) पर विशेष पूजन का आयोजन होता है। दर्शन करने से माता कष्टों का निवारण कर रोगों का नाश करती हैं।”

उन्होंने बताया कि बसौड़ा पूजन 10 और 11 मार्च को है, लेकिन आज सोमवार होने के कारण भारी भीड़ बनी रही। कई भक्त एक सप्ताह तक लगातार प्रसाद चढ़ाते हैं। मंदिर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उचित व्यवस्था की गई है ताकि भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन और प्रसाद चढ़ाने का अवसर मिल सके। बसौड़ा पर्व स्वास्थ्य, स्वच्छता और रोग निवारण का प्रतीक है, जिसे बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।

Point of View

बल्कि स्थानीय समाज में एकता और श्रद्धा का भी प्रतीक है।
NationPress
10/03/2026

Frequently Asked Questions

बसौड़ा पर्व क्या है?
बसौड़ा पर्व, जिसे शीतला अष्टमी भी कहा जाता है, होली के एक हफ्ते बाद मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
शीतला माता की पूजा का महत्व क्या है?
शीतला माता को रोग नाशक देवी माना जाता है। उनकी पूजा से भक्तों को स्वास्थ्य लाभ और रोगों से मुक्ति की आशा होती है।
बसौड़ा पूजन में क्या सामग्री अर्पित की जाती है?
बसौड़ा पूजन में नारियल, कच्चा दूध, चना, दाल, हल्दी, गुड़, आटा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।
कब मनाया जाता है बसौड़ा पर्व?
बसौड़ा पर्व हर वर्ष चैत्र मास की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और इस बार यह 10 और 11 मार्च को है।
क्या बसौड़ा पर्व में विशेष पूजा होती है?
जी हां, बसौड़ा पर्व पर विशेष पूजा का आयोजन होता है, जिसमें भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
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