उत्तराखंड में मां बालसुंदरी का भव्य डोला नगर मंदिर के लिए रवाना, श्रद्धालुओं का जोश अद्भुत
सारांश
Key Takeaways
- मां बालसुंदरी का डोला नगर मंदिर के लिए रवाना होगा।
- श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
- मंदिर समिति ने विशेष तैयारियां की हैं।
- डोला यात्रा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल होंगे।
- भक्ति का वातावरण पूरे क्षेत्र में है।
काशीपुर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में आस्था और श्रद्धा का एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। मां भगवती बालसुंदरी देवी का डोला मंगलवार रात्रि को चैती मंदिर से नगर मंदिर के लिए भव्यता के साथ प्रस्थान करेगा, जिससे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।
काशीपुर स्थित मां भगवती बालसुंदरी देवी के मंदिर में चैती मेले के दौरान धार्मिक आस्था की चरम सीमा पर है। आज रात माता का पावन डोला चैती मंदिर से नगर मंदिर की ओर पूरे विधि-विधान एवं धूमधाम के साथ निकलेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु डोले के साथ चलेंगे और जय माता दी के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठेगा।
मंदिर के सहायक प्रधान पंडा मनोज कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि माता के डोले के प्रस्थान से पहले आज पूरा दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां श्रद्धालु मां के दर्शन कर रहे हैं और प्रसाद चढ़ाकर अपनी इच्छाएं मांग रहे हैं। मंदिर परिसर 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठा और हर तरफ भक्ति का माहौल बना रहा।
ज्ञात हो कि 25 और 26 मार्च की मध्यरात्रि को मां का डोला नगर मंदिर से चैती मंदिर पहुंचा था। उसके बाद से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। स्थानीय लोग और देश-विदेश से आए भक्त माता के दरबार में मत्था टेककर अपनी मनोकामनाएं मांगते रहे हैं और प्रसाद चढ़ाते रहे हैं।
मंदिर समिति और प्रशासन द्वारा डोला यात्रा के लिए खास तैयारियां की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि यह धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न हो सके।
पंडा मनोज अग्निहोत्री ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में आने की अपील की। मां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। मध्यरात्रि 12 बजे से माता का हवन प्रारंभ होगा और लगभग ढाई बजे पूर्णाहुति होगी। तीन से साढ़े तीन के बीच मां डोले में सवार होकर नगर मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगी। सुबह की आरती मां नगर मंदिर में स्वीकार करेंगी, उसके बाद सालभर भक्तों को दर्शन नहीं मिलेगा।