मैहर देवी मंदिर में भक्तों का उमड़ता सैलाब, त्रिकूट पर्वत पर जय माता दी की गूंज
सारांश
Key Takeaways
- मैहर देवी मंदिर का महत्व धार्मिक आस्था में है।
- नवरात्रि के दौरान भक्तों की भारी भीड़ होती है।
- मंदिर 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
- विशेष आरती और शृंगार का आयोजन किया जाता है।
- यह 51 शक्तिपीठों में से एक है।
मध्य प्रदेश, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित प्रसिद्ध मैहर देवी मंदिर (मां शारदा देवी मंदिर) में चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मंगलवार की भोर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सभी श्रद्धालु माता के दिव्य स्वरूप को देखने के लिए उत्सुक नजर आ रहे थे।
तड़के ३ बजे जब मंदिर के पट खुले, त्रिकूट पर्वत 'जय माता दी' के जयकारों से गूंज उठा। चारों ओर भक्ति और आस्था का अद्भुत माहौल बन गया, जो नवरात्रि के छठे दिन को और भी पावन बना रहा।
सुबह के समय माता रानी के पट खुलते ही उनका भव्य शृंगार किया गया। इसमें मां शारदा को विशेष शृंगार, फूलों की माला और नए वस्त्र अर्पित किए गए।
माता का यह शृंगार दाऊ महाराज द्वारा किया जाता है। इसके बाद मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य आरती की गई। इस समय त्रिकूट पर्वत पर 'जय माता दी' और 'जय मां शारदा' के उद्घोष से मंदिर का माहौल भक्तिमय बन गया।
चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है और नौ दिनों तक मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना एवं विशेष आरती होती है। मैहर देवी मंदिर में भक्तों का आगमन नवरात्रि के एक दिन पहले से शुरू हो जाता है और पूरे वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में बनी रहती है, लेकिन नवरात्रि के दौरान यह संख्या और भी अधिक बढ़ जाती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मंदिर में बड़ा मेला लगता है, जिसमें विशेष आरती और भव्य सजावट होती है।
मैहर देवी मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में त्रिकूट पर्वत पर ६०० फीट की ऊंचाई पर स्थित एक प्रसिद्ध सिद्धपीठ है। इसे ५१ शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का हार गिरा था। श्रद्धालु सीढ़ियों से चढ़कर या फिर किसी रोपवे द्वारा मंदिर तक पहुंचते हैं।