झंडेवालान मंदिर में नवरात्रि का उत्सव, भक्त कर रहे मां कालरात्रि की विशेष पूजा
सारांश
Key Takeaways
- झंडेवालान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
- मां कालरात्रि का स्वरूप उग्र लेकिन कल्याणकारी है।
- सप्तमी की रात की विशेष पूजा का महत्व है।
- मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का ध्यान रखा गया है।
- भक्त सुख-समृद्धि के लिए मां से आशीर्वाद मांग रहे हैं।
नई दिल्ली, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन, झंडेवालान मंदिर में बुधवार सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। भक्त दूर-दूर से मां के दर्शन के लिए आ रहे हैं। मंदिर परिसर में 'जय माता दी' के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है।
मंदिर के पुजारी अंबिका प्रसाद पंत ने बताया कि आज का दिन मां कालरात्रि के सातवें स्वरूप को समर्पित है। मां कालरात्रि का स्वरूप भले ही उग्र प्रतीत होता हो, लेकिन वह अपने भक्तों के लिए कल्याणकारी और रक्षा करने वाली मानी जाती हैं। कहा जाता है कि इसी रूप में मां ने रक्तबीज नामक राक्षस का वध किया था। रक्तबीज की हर बूंद से नया राक्षस उत्पन्न होता था, इसलिए मां ने उसका रक्त पीकर उसका अंत किया।
पुजारी के अनुसार, सप्तमी की रात का विशेष महत्व है। इस दिन विशेषकर बुधवार रात में मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। कुछ साधक और तांत्रिक इस रात विशेष साधना और तंत्र पूजा भी करते हैं। आम श्रद्धालु दिनभर पूजा-अर्चना कर मां से भयमुक्ति, साहस और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।
मंदिर में दर्शन के लिए प्रशासन की ओर से अच्छी व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और लाइन सिस्टम के माध्यम से लोगों को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए जा रहे थे।
इसी बीच, मध्य प्रदेश के मैहर देवी मंदिर में भी चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर विशेष आयोजन देखने को मिला। यहां मां शारदा का भव्य स्वर्ण श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में भक्त पहुंचे। सुबह के समय मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भर गया और चारों तरफ भक्ति का माहौल बन गया।
मंदिर के प्रधान पुजारी पवन दाऊजी महाराज ने पूरे विधि-विधान से पूजा करवाई। इस दौरान माता रानी को विशेष भोग अर्पित किया गया और भक्तों ने पूरे जोश के साथ माता के जयकारे लगाए। हर कोई मां से अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करता नजर आया।