चैत्र नवरात्रि के छठे दिन झंडेवालान और कालकाजी मंदिर में आस्था का सैलाब, सुख-समृद्धि की प्रार्थना
सारांश
Key Takeaways
- चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी के लिए विशेष होता है।
- झंडेवालान और कालकाजी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़।
- पूजा में गंगाजल, पंचामृत और भोग का विशेष महत्व।
- कन्याओं के लिए विवाह की कामना का दिन।
- मौसम की वजह से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि के छठे दिन, मंगलवार को, मां दुर्गा के छठे स्वरूप, मां कात्यायनी की विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है। सुबह के समय से ही दिल्ली के प्रसिद्ध झंडेवालान मंदिर और कालकाजी मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। परिवार के सदस्यों के साथ लोग मंदिर पहुंचे और माता के समक्ष माथा टेककर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
इन मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। झंडेवाला मंदिर के पुजारी, विनोद मिश्रा ने बताया कि आज का दिन मां कात्यायनी को समर्पित है, जो शक्ति, साहस और धर्म की प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि पूजा की शुरुआत मां को गंगाजल से स्नान कराकर की जाती है, जिसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। फिर गंध, अक्षत, फूल, धूप और भोग अर्पित किए जाते हैं। भक्त अपनी मनोकामनाओं के लिए पूरी श्रद्धा के साथ मां से प्रार्थना करते हैं।
पुजारी ने यह भी बताया कि विशेषकर उन कन्याओं के लिए, जिनका विवाह नहीं हुआ है, आज का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि वे सच्चे दिल से मां कात्यायनी की उपासना करें, तो उन्हें योग्य वर की प्राप्ति होती है।
वहीं, कालकाजी मंदिर में भी भारी भीड़ देखने को मिली। हर कोई मां कात्यायनी की भक्ति में लीन नजर आया और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति की कामना करता दिखा।
मंदिर समिति के सदस्य, रवि गौर ने बताया कि इस वर्ष का मौसम भी सुहावना है, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन ने सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं ताकि दर्शन करने आए लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सुरक्षा, साफ-सफाई और लाइन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है।
मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि गूंजती रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। लोग 'जय माता दी' के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। इस दौरान कई भक्तों ने प्रसाद चढ़ाया और अपने परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और सफलता की कामना की।