चैत्र नवरात्रि अष्टमी: दिल्ली के झंडेवालान और कालकाजी मंदिरों में भक्तों की उमड़ी भीड़
सारांश
Key Takeaways
- चैत्र नवरात्रि का पर्व 9 दिन चलता है।
- हर दिन मां दुर्गा के एक अलग रूप की पूजा होती है।
- अष्टमी का दिन मां महागौरी को समर्पित है।
- श्रद्धालु अपनी मुरादें लेकर मंदिरों में आते हैं।
- दिल्ली के झंडेवालान और कालकाजी मंदिरों में भक्ति का माहौल है।
नई दिल्ली, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि का पर्व पूरे देश में भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह नौ दिवसीय उत्सव मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित होता है और प्रत्येक दिन एक विशेष रूप की पूजा की जाती है। इस अवसर पर लोग अपनी इच्छाओं के साथ मंदिरों में आते हैं और श्रद्धा से पूजा करते हैं। इसी कड़ी में दिल्ली के झंडेवालान और कालकाजी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ नजर आई।
झंडेवालान मंदिर में अष्टमी के दिन भक्तों की संख्या इतनी अधिक थी कि गुरुवार सुबह से दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। मंदिर परिसर में भक्त भजनों का गायन कर रहे हैं, दीप जलाकर अपनी मुरादें मांग रहे हैं। मंदिर के ट्रस्टी रवींद्र गोयल ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि नवरात्रि समाप्त होने वाली है और अष्टमी का उत्सव भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। कन्या पूजन का आयोजन भी किया जाएगा। मंदिर में सुबह से ही दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है।
झंडेवालान मंदिर के पुजारी अंबिका प्रसाद पंत ने राष्ट्र प्रेस को अष्टमी के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह दिन मां गौरी के आठवें रूप देवी महागौरी को समर्पित है। महागौरी ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था, और उनका यह रूप शांत, निर्मल और पवित्रता का प्रतीक है। भक्त इस दिन देवी महागौरी की आराधना कर अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
मंदिर में आए भक्तों ने कहा, "हमें यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हमारे मन को शांति मिली है। यहां आकर भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं।"
यदि कालकाजी मंदिर की बात करें, तो यहां भी अष्टमी के दिन भक्तों की बड़ी भीड़ जुटी। एक भक्त ने कहा, "मैं नियमित रूप से कालकाजी मंदिर आती हूं लेकिन नवरात्रि के दौरान पहली बार आई हूं। इस अवसर पर मंदिर का माहौल बहुत अलग होता है और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ पूजा में भाग लेते हैं। मंदिर परिसर में भक्ति गीत और मंत्रोच्चारण ने वातावरण को और भी पावन बना दिया है।"