चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन मां शारदा की भव्य सजावट, भक्तों की उमड़ी भीड़
सारांश
Key Takeaways
- मां शारदा के दरबार में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
- मां का विशेष श्रृंगार नीले वस्त्रों और सोने के आभूषणों से किया गया।
- वीआईपी दर्शन बंद रखने का निर्णय भक्तों की सुविधा के लिए लिया गया।
- मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।
- नवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालु मैहर पहुंचते हैं।
मैहर, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्र के पवित्र अवसर पर आज दूसरे दिन जगत जननी मां शारदा के दरबार में भक्तों की एक बड़ी भीड़ इकट्ठा हुई।
मां के अद्भुत श्रृंगार और दिव्य दर्शन ने सभी श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। नवरात्रि के इस दूसरे दिन मां शारदा का विशेष सजावट किया गया, जिसके दर्शन कर भक्तों ने "जय माता दी" के गगनभेदी जयकारे से मंदिर का परिसर गुंजायमान कर दिया।
चैत्र नवरात्रि के प्रारंभ के साथ ही भक्तों का सैलाब मैहर माता के दर्शन के लिए आ रहा है। आज मां शारदा ने नीले रंग के वस्त्र और सोने के आभूषणों से सुसज्जित किया गया। मां को भव्य नथ पहनाई गई। प्रमुख पुजारी पवन दाऊ महाराज द्वारा विधिपूर्वक मां की आरती की गई और भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और जयकारों से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें दर्शन के लिए लगी रहीं। भक्त 1000 से अधिक सीढ़ियां चढ़कर मां के दरबार तक पहुंच रहे हैं और इस शुभ अवसर पर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से ही भक्त बड़ी संख्या में मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन ने नौ दिनों के लिए वीआईपी दर्शन को बंद रखने का निर्णय लिया है। यह कदम भक्तों की भीड़ और भव्य मेले को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। 19 मार्च से लेकर 27 मार्च तक मंदिर में भक्त सामान्य तरीके से दर्शन कर सकेंगे।
प्रशासन के अनुसार, नवरात्रि के दौरान देश-विदेश से प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए मैहर का रुख करते हैं। ऐसे में आम भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके, इसके लिए यह फैसला लिया गया है।
यह ज्ञात है कि चैत्र नवरात्रि में प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां शारदा मंदिर की अत्यधिक मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर मां सती का हार गिरा था और यहां पुजारी से पहले मां के परम भक्त उनकी पूजा करते हैं। मान्यता है कि जब पुजारी मंदिर के कपाट खोलते हैं, तो प्रतिमा के पास ताजा फूल मिलते हैं।