गंगोत्री धाम में मां गंगा की उत्सव डोली का भव्य प्रस्थान, अक्षय तृतीया पर होंगे दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तरकाशी, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सनातन धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक चार धाम यात्रा का आरंभ हो चुका है। अक्षय तृतीया के दिन, यानी 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे।
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के मंदिरों में सजावट का कार्य प्रारंभ हो चुका है। इसी के साथ मां गंगा की उत्सव डोली शनिवार को उनके शीतकालीन निवास स्थान मुखवा गांव से गंगोत्री धाम के लिए विधिपूर्वक पूजा-अर्चना के साथ प्रस्थान कर गई।
मां गंगा की उत्सव डोली को शनिवार को विशेष पूजा के साथ रवाना किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था, और उल्लास का मिश्रण देखने को मिला। डोली के रवाना होने पर भक्तों के बीच उत्साह का माहौल था। रविवार को निर्धारित शुभ मुहूर्त में गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। जैसे ही कपाट खुलेंगे, देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के दर्शन शुरू हो जाएंगे।
मुखवा गांव में डोली प्रस्थान से पूर्व मां की उत्सव डोली की विशेष पूजा-अर्चना की गई और पूरे गांव को भव्य तरीके से सजाया गया। स्थानीय निवासियों ने मां गंगा की डोली को ढोल-दमाऊ, रणसिंघा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ विदाई दी। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की “जय मां गंगे” के जयकारों की गूंज सुनाई दी। डोली यात्रा में भक्तों और अधिकारियों की भारी भीड़ दिखाई दी। यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, साधु-संत, तीर्थ पुरोहित, स्थानीय जनप्रतिनिधि, और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। सभी ने मिलकर मां गंगा के जयकारे लगाते हुए यात्रा को आगे बढ़ाया।
अक्षय तृतीया के अवसर पर मां गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने की तैयारी की गई है, जिसके लिए मंदिर समिति और प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यातायात प्रबंधन, पार्किंग, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की विशेष तैयारियां की गई हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
ज्ञात रहे कि शीतकाल में अधिक बर्फबारी के कारण गंगोत्री धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मां गंगा की विग्रह डोली को मुखवा गांव में स्थित मंदिर में स्थापित किया जाता है, जहाँ मां गंगा की पूजा पूरी विधि-विधान के साथ की जाती है।