चार धाम यात्रा की शुरुआत, सीएम धामी ने गंगोत्री में की पूजा; श्रद्धालुओं की भारी भीड़

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चार धाम यात्रा की शुरुआत, सीएम धामी ने गंगोत्री में की पूजा; श्रद्धालुओं की भारी भीड़

सारांश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम में पूजा करके चार धाम यात्रा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली और यमुनोत्री के द्वार भी खोले गए।

Key Takeaways

  • गंगोत्री धाम के द्वार खोलने का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
  • श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का स्वागत किया गया।
  • यमुनोत्री धाम के द्वार भी खोले गए।
  • भगवान केदारनाथ की डोली को रवाना किया गया।
  • 22 अप्रैल को केदारनाथ मंदिर के द्वार खुलेंगे।

गंगोत्री, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को श्री गंगोत्री धाम में पूजा-अर्चना की, जिससे मंदिर के द्वार औपचारिक रूप से खोल दिए गए। यह घटना वार्षिक चार धाम यात्रा के आरंभ का प्रतीक है।

इसी दिन यमुनोत्री धाम के द्वार भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। दोनों तीर्थस्थलों को सुंदर फूलों से सजाया गया। अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी।

इस अवसर पर धूमधाम से उत्सव मनाया गया, जिसमें पारंपरिक वाद्ययंत्र जैसे ढोल दमाऊ और रानसिंघा की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण गूंज उठा।

गढ़वाल राइफल्स बैंड ने भी समारोह में हिस्सा लिया, जिससे देवी का उनके ग्रीष्मकालीन निवास में स्वागत करते समय एक औपचारिक स्पर्श जुड़ गया।

बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, पुजारियों, साधुओं, और अधिकारियों ने इस जुलूस में भाग लिया, जो तीर्थयात्रा से जुड़ी सामूहिक आस्था और एकता को दर्शाता है।

रविवार को ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की औपचारिक 'डोली' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो हिमालय में स्थित केदारनाथ धाम की वार्षिक यात्रा की शुरुआत का संकेत है।

भगवान केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा, जो उखीमठ में अपने शीतकालीन निवास पर रहती है, को वैदिक मंत्रों, भक्ति संगीत और भक्तों की उत्साही भागीदारी के साथ एक भव्य जुलूस में ले जाया गया।

मंदिर परिसर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, जिसमें लगभग आठ क्विंटल फूलों का उपयोग किया गया था। श्रद्धालुओं ने उत्सव के हिस्से के रूप में सामुदायिक भोज या भंडारे का आयोजन भी किया।

जुलूस के दौरान गढ़वाल राइफल्स ने एक प्रमुख औपचारिक भूमिका निभाई, जिसमें सैन्य परंपरा को लंबे समय से चली आ रही धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ मिलाया गया।

कार्यक्रम के अनुसार, डोली पहली रात फाटा में रुकेगी और सोमवार को गौरीकुंड के लिए रवाना होगी। इसके 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचने की उम्मीद है, जहां प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

केदारनाथ मंदिर के द्वार 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे पूर्ण वैदिक अनुष्ठानों के साथ खुलने वाले हैं, जिसके बाद 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के द्वार भी खुलेंगे। देशभर से हजारों श्रद्धालु इस तीर्थयात्रा के लिए एकत्रित हुए हैं, जो चार धाम यात्रा के गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व को उजागर करता है।

Point of View

जो श्रद्धालुओं को एकत्रित करती है और उनके बीच की एकता को दर्शाती है।
NationPress
21/04/2026

Frequently Asked Questions

चार धाम यात्रा का क्या महत्व है?
चार धाम यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है।
गंगोत्री धाम कब खोला गया?
गंगोत्री धाम के द्वार 19 अप्रैल को खोले गए।
डोली कब रवाना हुई?
भगवान केदारनाथ की डोली 19 अप्रैल को ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना हुई।
केदारनाथ मंदिर के द्वार कब खुलेंगे?
केदारनाथ मंदिर के द्वार 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खुलेंगे।
चार धाम यात्रा में कितने तीर्थ स्थल हैं?
चार धाम यात्रा में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ शामिल हैं।
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