राजस्थान में शीतला अष्टमी पर भक्तों की उमड़ी भीड़, जानें पर्व का महत्व

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राजस्थान में शीतला अष्टमी पर भक्तों की उमड़ी भीड़, जानें पर्व का महत्व

सारांश

राजस्थान में शीतला अष्टमी के मौके पर देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। जानें इस पर्व का महत्व और श्रद्धालुओं की आस्था के बारे में।

Key Takeaways

  • शीतला अष्टमी पर बासी भोजन का महत्व
  • देवी मां का आशीर्वाद और सुरक्षा
  • राजस्थान में धार्मिक एकता का प्रतीक
  • महिलाओं की विशेष भागीदारी
  • शीतला अष्टमी की मान्यता और परंपरा

करौली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शीतला अष्टमी के अवसर पर देशभर के देवी मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है।

राजस्थान के करौली, ब्यावर और सीकर के मंदिरों में महिला श्रद्धालु प्रात: काल से देवी के दर्शन हेतु पहुंच रही हैं और देवी मां को बासी भोजन अर्पित कर रही हैं। मान्यता है कि इस दिन मां शीतला परिवार की समृद्धि, स्वास्थ्य और सुखी जीवन का आशीर्वाद देती हैं।

मंदिर में दर्शन के लिए आई एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि यह मंदिर ५० वर्ष से भी पुराना है और इसका मूल मंदिर इससे भी पहले का है। उन्होंने कहा, "आज के दिन दही, चावल, पूए, पूरी, कड़ी, रोटी और सब्जी का भोग मां को अर्पित किया जाता है। मां पूरे परिवार की रक्षा करती हैं।" वहीं सीकर के मंदिर में भी शीतला अष्टमी के मौके पर भक्तों की भीड़ देखी गई। महिलाएं लंबी कतार में लगकर मां के दर्शन का इंतजार कर रही हैं।

दर्शन के लिए आई एक महिला ने बताया, "शीतला अष्टमी पर एक दिन पहले बनाए गए भोजन का भोग मां को अर्पित किया जाता है, और वही भोजन परिवार के अन्य सदस्यों को भी दिया जाता है। माना जाता है कि मां शीतला हर प्रकार के रोगों से भक्तों की रक्षा करती हैं और वे जग की माता और पिता हैं। उनके बिना उनके भक्त कुछ नहीं कर सकते। सीकर की एक अन्य महिला ने कहा कि पूरे राजस्थान में इस पर्व को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, और आज पूरा दिन ठंडा खाना खाया जाता है।

ब्यावर में भी शीतला अष्टमी पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए हैं। अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। बता दें कि शीतला अष्टमी को 'बासौड़ा' के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि मां शीतला विशेषकर बच्चों को होने वाले रोग जैसे फोड़े, फुंसी, खसरा और चेचक से सुरक्षा करती हैं। हर साल होली के बाद इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है।

Point of View

जो श्रद्धा और आस्था से भरा हुआ है। राजस्थान के मंदिरों में महिलाएं विशेष रूप से इस दिन देवी मां की कृपा पाने के लिए पूजा करती हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
NationPress
11/03/2026

Frequently Asked Questions

शीतला अष्टमी क्या है?
शीतला अष्टमी एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है, जिसे देवी शीतला की पूजा के लिए मनाया जाता है, खासकर राजस्थान में।
इस दिन क्या विशेष किया जाता है?
इस दिन श्रद्धालु बासी भोजन अर्पित करते हैं और देवी मां से परिवार की समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
शीतला अष्टमी कब मनाई जाती है?
शीतला अष्टमी हर साल होली के बाद मनाई जाती है।
यह पर्व क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पर्व परिवार की भलाई और स्वास्थ्य की कामना का प्रतीक है और भक्तों के लिए आस्था का आधार है।
इस पर्व पर क्या खाया जाता है?
इस दिन ठंडा भोजन जैसे दही, चावल, पूए आदि अर्पित किया जाता है।
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