4 अगस्त 2026
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झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर उठाए तीखे सवाल, 6 अगस्त तक माँगा शपथपत्र

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झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर उठाए तीखे सवाल, 6 अगस्त तक माँगा शपथपत्र

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC की सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में उस नॉर्मलाइजेशन पद्धति पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसमें समान रॉ अंक (69-69) वाले अभ्यर्थियों को क्रमशः 17 और 34 नॉर्मलाइज्ड स्कोर मिले। अदालत ने 6 अगस्त तक शपथपत्र माँगा है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को JSSC की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कड़े सवाल उठाए।
समान सत्र में 69-69 रॉ अंक पाने वाले दो अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर क्रमशः 17 और 34 दर्शाए गए — यह मुख्य विवाद का बिंदु है।
मामला गिरिधर प्रसाद एवं अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में सुना गया।
JSSC को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश; अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को।
यह मामला विज्ञापन संख्या-13/2023 के तहत सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से संबंधित है।

झारखंड हाईकोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा (विज्ञापन संख्या-13/2023) में अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की वैधता पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने आयोग को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को निर्धारित की है।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एक ही परीक्षा सत्र (सिटिंग) में शामिल दो अभ्यर्थियों के रॉ अंक 69-69 समान होने के बावजूद एक का नॉर्मलाइज्ड स्कोर 17 और दूसरे का 34 दर्शाया गया। इस विसंगति पर अदालत ने JSSC से स्पष्टीकरण माँगा।

न्यायालय ने दो मुख्य बिंदुओं पर आयोग को जवाब देने को कहा: पहला, समान परिस्थितियों और समान रॉ अंक वाले अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर में इतना अंतर किस आधार पर हुआ; दूसरा, अलग-अलग रॉ अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों का अंतिम नॉर्मलाइज्ड स्कोर एक समान कैसे निर्धारित किया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष

यह मामला गिरिधर प्रसाद एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अधिवक्ता शुभम मिश्रा और अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय सहित अन्य ने पक्ष रखा। उनका तर्क है कि JSSC द्वारा अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रणाली न तो पारदर्शी है और न ही तार्किक रूप से सुसंगत।

JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने अदालत में आयोग का पक्ष रखा।

नॉर्मलाइजेशन विवाद क्यों महत्वपूर्ण है

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का उद्देश्य विभिन्न पालियों (शिफ्ट) में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के बीच कठिनाई स्तर के अंतर को संतुलित करना होता है। गौरतलब है कि यदि यह प्रक्रिया दोषपूर्ण या अपारदर्शी हो, तो मेधावी अभ्यर्थी अनुचित रूप से वंचित हो सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पहले से ही जाँच के दायरे में रही है।

अदालत का निर्देश और आगे की राह

न्यायालय ने JSSC को दोनों बिंदुओं पर विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें आयोग को अपनी नॉर्मलाइजेशन पद्धति का पूरा गणितीय और प्रक्रियागत ब्यौरा प्रस्तुत करना होगा। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि यदि आयोग संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाया, तो नियुक्ति प्रक्रिया पर और कड़े आदेश आ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भर्ती प्रक्रिया की बुनियादी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न है। JSSC का यह मामला उस व्यापक समस्या की ओर इशारा करता है जहाँ राज्य चयन आयोग नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को 'ब्लैक बॉक्स' की तरह संचालित करते हैं — बिना सार्वजनिक पद्धति-दस्तावेज़ के। यदि अदालत के समक्ष आयोग संतोषजनक गणितीय आधार नहीं दे पाया, तो यह न केवल इस भर्ती को, बल्कि आयोग की पिछली और आगामी परीक्षाओं की वैधता को भी कठघरे में खड़ा कर सकता है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर क्यों सवाल उठाए?
अदालत ने इसलिए सवाल उठाए क्योंकि एक ही परीक्षा सत्र में समान रॉ अंक (69-69) पाने वाले दो अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर में भारी अंतर — एक को 17 और दूसरे को 34 — पाया गया। यह विसंगति नॉर्मलाइजेशन पद्धति की पारदर्शिता और तार्किकता पर गंभीर संदेह पैदा करती है।
JSSC सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा विवाद क्या है?
यह विवाद विज्ञापन संख्या-13/2023 के तहत आयोजित सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में JSSC द्वारा अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता को लेकर है। गिरिधर प्रसाद एवं अन्य अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस प्रक्रिया को चुनौती दी है।
झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC को क्या निर्देश दिया है?
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने JSSC को दो मुख्य बिंदुओं पर विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।
नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया क्या होती है और इसमें विवाद क्यों होता है?
नॉर्मलाइजेशन एक सांख्यिकीय पद्धति है जिसका उद्देश्य अलग-अलग पालियों में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के बीच कठिनाई स्तर के अंतर को संतुलित करना है। विवाद तब होता है जब इस पद्धति का फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं होता और परिणाम तार्किक रूप से असंगत दिखते हैं, जिससे अभ्यर्थियों को अनुचित नुकसान हो सकता है।
इस मामले में अभ्यर्थियों की ओर से कौन से अधिवक्ता पेश हुए?
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अधिवक्ता शुभम मिश्रा और अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय सहित अन्य ने पक्ष रखा। JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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