कावेरी जल विवाद: कर्नाटक मंत्री एमबी पाटिल बोले — कम बारिश के चलते तमिलनाडु को 4.5 टीएमसी देना संभव नहीं
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने 29 जुलाई को स्पष्ट किया कि इस वर्ष कावेरी बेसिन में मॉनसून की कमज़ोर स्थिति के कारण राज्य के पास तमिलनाडु को देने के लिए पर्याप्त कावेरी जल उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के उस निर्देश को अनुचित करार दिया, जिसमें कर्नाटक से पड़ोसी राज्य को 4.5 टीएमसी पानी छोड़ने को कहा गया था।
मौजूदा जल संकट की स्थिति
पत्रकारों से बातचीत में पाटिल ने कहा कि इस साल कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है, जिससे बेसिन के जलाशयों में जल-स्तर अपेक्षित मात्रा से काफी नीचे है। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में CWRC का निर्देश ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।
पाटिल ने यह भी रेखांकित किया कि अच्छे मॉनसून वाले वर्षों में कर्नाटक ने न केवल तय हिस्से का पानी दिया, बल्कि तमिलनाडु को निर्धारित 177 टीएमसी से अधिक जल भी छोड़ा है। हालाँकि, उन्होंने माना कि सूखे या कम वर्षा वाले वर्षों के लिए जल-बंटवारे का कोई स्पष्ट फॉर्मूला अभी तक तय नहीं किया गया है।
मेकेदातु परियोजना — दीर्घकालिक समाधान
मंत्री पाटिल ने मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वोयर परियोजना को इस पुराने विवाद का स्थायी हल बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उनके जल संसाधन मंत्री रहते हुए प्रस्तावित की गई थी और यह केवल कर्नाटक के लिए नहीं, बल्कि तमिलनाडु के हित में भी है।
पाटिल के अनुसार, कर्नाटक को कुल 65 टीएमसी जल संचयन के लिए बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता है — जिसमें कावेरी जल-बंटवारे के अंतिम निर्णय के तहत राज्य को आवंटित अतिरिक्त 14 टीएमसी भी शामिल है। उन्होंने तमिलनाडु से अपील की कि वह मेकेदातु परियोजना के प्रति अपने विरोध पर पुनर्विचार करे, क्योंकि उस राज्य की आंतरिक राजनीति इस परियोजना की प्रगति में बाधा बन रही है।
सरकार की अगली रणनीति
पाटिल ने बताया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी मौजूदा जल संकट से निपटने के उपायों पर शीघ्र विचार-विमर्श करेंगे। राज्य सरकार CWRC के निर्देश के विरुद्ध अपना पक्ष रखने की तैयारी में है।
विवाद की पृष्ठभूमि
कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है। सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के फैसले के तहत कर्नाटक को तमिलनाडु को सालाना 177.25 टीएमसी पानी देना अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस वर्ष मॉनसून की अनिश्चितता ने जल प्रबंधन को और जटिल बना दिया है। CWRC के निर्देश और राज्य सरकार की असमर्थता के बीच यह टकराव आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।