29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कावेरी जल विवाद: मणिकम टैगोर ने कर्नाटक से CWRC आदेश तुरंत लागू करने की माँग की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कावेरी जल विवाद: मणिकम टैगोर ने कर्नाटक से CWRC आदेश तुरंत लागू करने की माँग की

सारांश

कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 15 दिन में 4 टीएमसी पानी छोड़ने का आदेश दिया, लेकिन कर्नाटक अपील की तैयारी में है। TNCC प्रमुख मणिकम टैगोर ने इसे 'गैर-जिम्मेदाराना' बताते हुए तमिलनाडु के किसानों की आजीविका का हवाला दिया — जिन्हें अब तक देय जल का केवल 10% मिला है।

मुख्य बातें

CWRC ने 28 जुलाई को कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक प्रति दिन की दर से तमिलनाडु को 4 टीएमसी कावेरी जल छोड़ने का निर्देश दिया।
TNCC अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने एक्स पर पोस्ट कर कर्नाटक से बिना देरी के आदेश लागू करने की अपील की।
कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री के.
रामलिंगा रेड्डी ने संकेत दिया कि राज्य CWMA के समक्ष अपील दायर कर सकता है।
26 जुलाई तक तमिलनाडु को देय 35.391 टीएमसी के मुकाबले केवल 3.543 टीएमसी — यानी मात्र 10.01% — पानी मिला।
पानी की कमी से तमिलनाडु में कुरुवई फसल को नुकसान; सांबा फसल भी खतरे में।

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष और विरुधुनगर के सांसद मणिकम टैगोर ने बुधवार, 29 जुलाई को कर्नाटक सरकार से कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के उस आदेश को बिना देरी के लागू करने की अपील की, जिसमें तमिलनाडु को 4 टीएमसी कावेरी जल छोड़ने का निर्देश दिया गया है। टैगोर ने चेतावनी दी कि इस आदेश में किसी भी तरह की देरी या उसे चुनौती देने की कोशिश दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच पहले से चले आ रहे तनाव को और गहरा कर देगी।

CWRC का आदेश और कर्नाटक का रुख

कावेरी जल विनियमन समिति ने मंगलवार, 28 जुलाई को कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह 29 जुलाई से 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक प्रति दिन की दर से तमिलनाडु को 4 टीएमसी पानी छोड़े। हालाँकि, कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री के. रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि राज्य सूखे की स्थिति और जलाशयों में सीमित भंडार का हवाला देते हुए इस आदेश के खिलाफ कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष अपील दायर करने पर विचार कर रहा है और वह फिलहाल पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है।

यह ऐसे समय में आया है जब दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल बँटवारे को लेकर दशकों पुराना विवाद एक बार फिर सतह पर आ गया है।

टैगोर की तीखी आलोचना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मणिकम टैगोर ने रेड्डी के बयान को 'गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया। उन्होंने कहा कि जब सहयोग की आवश्यकता है, तब इस तरह के बयान केवल अनावश्यक मनमुटाव पैदा करते हैं।

टैगोर ने अपने पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'पानी तुरंत छोड़ा जाना चाहिए। कर्नाटक सरकार को बिना किसी बहाने के CWRC के आदेश को पूरी तरह से लागू करना चाहिए। क्योंकि कावेरी डेल्टा के किसान खेती के काम को जारी रखने के लिए बेसब्री से पानी का इंतजार कर रहे हैं।'

तमिलनाडु में कृषि संकट

टैगोर ने बताया कि पानी की कमी के कारण तमिलनाडु में कुरुवई की खेती को पहले ही भारी नुकसान हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कावेरी का पानी समय पर नहीं छोड़ा गया तो आने वाली सांबा फसल भी खतरे में पड़ जाएगी, जिससे राज्य के हजारों किसानों की आजीविका प्रभावित होगी।

जल बँटवारे के नवीनतम आँकड़ों का हवाला देते हुए टैगोर ने दावा किया कि 26 जुलाई तक तमिलनाडु को निर्धारित 35.391 टीएमसी पानी के मुकाबले केवल 3.543 टीएमसी पानी ही मिला है — यानी देय मात्रा का मात्र 10.01 प्रतिशत। इस प्रकार चालू जल वर्ष में तमिलनाडु को कुल 9.46 टीएमसी पानी की कमी का सामना करना पड़ा है।

संघीय ढाँचे और कानूनी बाध्यता का तर्क

टैगोर ने तर्क दिया कि कावेरी विवाद से संबंधित न्यायिक और वैधानिक आदेशों का कार्यान्वयन भारत के संघीय ढाँचे की भावना को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। उनके अनुसार, कानूनी रूप से बाध्यकारी फैसलों और निर्देशों का सम्मान करना ही नदी-तटीय राज्यों के बीच जल का समान बँटवारा सुनिश्चित करने और आपसी सद्भाव बनाए रखने का एकमात्र मार्ग है।

गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद दशकों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच राजनीतिक और कानूनी टकराव का केंद्र रहा है, और सर्वोच्च न्यायालय तथा CWRC जैसी वैधानिक संस्थाएँ इसके समाधान के लिए अधिकृत हैं। यदि कर्नाटक CWMA में अपील दायर करता है, तो यह विवाद एक बार फिर लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह विवाद हर मानसून में नए सिरे से उभरता रहेगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CWRC ने कर्नाटक को क्या आदेश दिया है?
कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने 28 जुलाई को कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह 29 जुलाई से 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक प्रति दिन की दर से तमिलनाडु को 4 टीएमसी पानी छोड़े। यह आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
मणिकम टैगोर ने कर्नाटक की आलोचना क्यों की?
TNCC अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री के. रामलिंगा रेड्डी के उस बयान की आलोचना की जिसमें CWRC आदेश के खिलाफ अपील की बात कही गई थी। टैगोर ने इसे 'गैर-जिम्मेदाराना' बताते हुए कहा कि इससे दोनों राज्यों के बीच अनावश्यक तनाव बढ़ेगा।
तमिलनाडु को अब तक कितना कावेरी जल मिला है?
टैगोर के अनुसार, 26 जुलाई तक तमिलनाडु को निर्धारित 35.391 टीएमसी के मुकाबले केवल 3.543 टीएमसी पानी मिला है — यानी देय मात्रा का मात्र 10.01 प्रतिशत। इस प्रकार चालू जल वर्ष में कुल 9.46 टीएमसी की कमी दर्ज की गई है।
कावेरी जल की कमी से तमिलनाडु की किस फसल को नुकसान हो रहा है?
पानी की कमी से तमिलनाडु में कुरुवई की खेती को पहले ही नुकसान हो चुका है। यदि कावेरी जल समय पर नहीं छोड़ा गया तो आने वाली सांबा फसल भी खतरे में पड़ सकती है, जिससे कावेरी डेल्टा के हजारों किसान प्रभावित होंगे।
कर्नाटक CWRC आदेश को चुनौती दे सकता है?
कर्नाटक सूखे की स्थिति और जलाशयों में सीमित भंडार का हवाला देते हुए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष अपील दायर करने पर विचार कर रहा है। हालाँकि, CWRC का आदेश तब तक लागू माना जाता है जब तक कोई उच्च प्राधिकरण उसे स्थगित न करे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 घंटे पहले
  2. 19 घंटे पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले